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पुण्य के जल से धुलता पाप: पुष्पेन्द्र शास्त्री
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टूंडला के पमारी में श्रीजी का अभिषेक करते श्रद्धालु
- फोटो : TUNDLA
टूंडला। श्री मल्लिनाथ दिगंबर अतिशय क्षेत्र मिथिलापुरी पमारी में आयोजित सिद्धचक्र महामंडल विधान में बृहस्पतिवार को बाल ब्रह्मचारी पुष्पेंद्र शास्त्री ने कहा कि पाप पुण्य के जल से ही धुलता है।
इस मौके पर उन्होंने कहा कि धर्म पुण्य पाप से परे है। आत्मा का स्वभाव है और पुण्य चुपचाप करना चाहिए। पुण्य तो पाप का प्रायश्चित है। परमात्मा अविरोध की दिशा है और पूर्ण परमात्मा प्राप्ति की दिशा है। अभिषेक का प्रथम कलश सर्वेश जैन पमारी वालों ने किया। शांतिधारा अनिल कुमार जैन शिकोहाबाद वालों ने की।
आरती पारसनाथ दिगंबर जैन महिला मंडल टूंडला वालों ने और चिक्की जैन छत्र लगाएं। सोमेंद्र ने भगवान के ऊपर चंवर चढ़ाएं और रत्नों की वर्षा राजीव जैन ने की। इस दौरान 1024 महामृत्युंजय मंत्र से सिद्धचक्र महामंडल विधान की पूजा की गई। वहीं कार्यक्रम के दौरान शुक्रवार को अभिषेक, शांतिधारा के बाद विश्व शांति महायज्ञ का आयोजन किया जाएगा।
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इसके बाद देवशास्त्र गुरु की पूजा, आचार्य विमल सागर महाराज की पूजा, मुनि अमित सागर महाराज की पूजा, गणिका मां विशुद्धमति माताजी की पूजा, आर्यिका मां विजय मति माताजी की पूजा, आर्यिका मां विशिष्ट मति माताजी की पूजा की जाएगी। सरस्वती पूजा के साथ ही मनोकामना पूर्ण विधान का समापन समारोह किया जाएगा। कार्यक्रम के बाद वात्सल्य भोज और मंदिर की मूल वेदी के सामने 64 चंवर की स्थापना धूमधाम से गाजेबाजों के साथ की जाएगी।
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इस मौके पर उन्होंने कहा कि धर्म पुण्य पाप से परे है। आत्मा का स्वभाव है और पुण्य चुपचाप करना चाहिए। पुण्य तो पाप का प्रायश्चित है। परमात्मा अविरोध की दिशा है और पूर्ण परमात्मा प्राप्ति की दिशा है। अभिषेक का प्रथम कलश सर्वेश जैन पमारी वालों ने किया। शांतिधारा अनिल कुमार जैन शिकोहाबाद वालों ने की।
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आरती पारसनाथ दिगंबर जैन महिला मंडल टूंडला वालों ने और चिक्की जैन छत्र लगाएं। सोमेंद्र ने भगवान के ऊपर चंवर चढ़ाएं और रत्नों की वर्षा राजीव जैन ने की। इस दौरान 1024 महामृत्युंजय मंत्र से सिद्धचक्र महामंडल विधान की पूजा की गई। वहीं कार्यक्रम के दौरान शुक्रवार को अभिषेक, शांतिधारा के बाद विश्व शांति महायज्ञ का आयोजन किया जाएगा।
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इसके बाद देवशास्त्र गुरु की पूजा, आचार्य विमल सागर महाराज की पूजा, मुनि अमित सागर महाराज की पूजा, गणिका मां विशुद्धमति माताजी की पूजा, आर्यिका मां विजय मति माताजी की पूजा, आर्यिका मां विशिष्ट मति माताजी की पूजा की जाएगी। सरस्वती पूजा के साथ ही मनोकामना पूर्ण विधान का समापन समारोह किया जाएगा। कार्यक्रम के बाद वात्सल्य भोज और मंदिर की मूल वेदी के सामने 64 चंवर की स्थापना धूमधाम से गाजेबाजों के साथ की जाएगी।