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चांदी के नैनो कणों से कपड़ा उद्योग के प्रदूषण को कम कर सकते हैं
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आगरा। आरबीएस इंजीनियरिंग टेक्निकल कैंपस के बॉयो टेक्नोलॉजी विभाग के एक प्रोजेक्ट में सामने आया है कि चांदी के नैनो कण कपड़ा उद्योग के प्रदूषण को कम कर सकते हें। बीटेक चतुर्थ वर्ष के छात्रों ने नैनो टेक्नोलॉजी विधि से तैयार चांदी के इन नैनो कणों पर काम किया है। हरित तकनीक से चांदी के इन नैनो कणों को विकसित करने पर कार्बनिक डाई के हानिकारक प्रभाव कम हो गए।
बॉयो टेक्नोलॉजी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. आशीष शुक्ला के निर्देशन में छात्र अस्तित्व सक्सेना, देवांश पुंडीर, ऋतिक कश्यप, पुनीत शुक्ला और शिवम भारद्वाज ने प्रोजेक्ट पर काम किया है। डॉ. आशीष शुक्ला ने बताया कि कपड़ा उद्योग में इस्तेमाल होने वाली हानिकारक डाई मिथाइलीन ब्लू व मिथाइल रेड से जल प्रदूषण उत्पन्न होता है। इसे कम करने के लिए हरित तकनीकी के माध्यम से नैनो टेक्नोलॉजी का उपयोग करके चांदी के नैनो कणों को विकसित किया गया है। तकनीकी में मेथी दाना, नीम व मूली के पत्ते का अर्क सिल्वर नाइट्रेट के साथ मिलाकर उसे धूप में रखा गया। इस प्रक्रिया से बनने वाले चांदी के नैनों कणों के माध्यम से मिथाइलीन ब्लू व मिथाइल रेड से उत्पन्न हानिकारक अपशिष्टों को 72 घंटे बाद जांच करने पर पता चला कि दोनों डाई के हानिकर प्रभाव करीब 70 फीसदी तक कम हो गए।
डॉ. आशीष शुक्ला ने बताया कि चांदी के नैनो कणों को विकसित करने की यह हरित तकनीकी कारगर होने के साथ पर्यावरण के अनुकूल है। तकनीकी कपड़ा उद्योग के अपशिष्ट और निकलने वाले प्रदूषित पानी के हानिकारक प्रभावों को कम करने में कारगर सहायक साबित हो सकती है। विभागाध्यक्ष डॉ. विवेक कुमार श्रीवास्तव के मुताबिक देश के अलावा दुनिया में कपड़ा उद्योगों में इस्तेमाल होने वाली कार्बनिक डाई से जल और वायु प्रदूषण बढ़ता जा रहा है। संस्थान के निदेशक प्रशासनिक व वित्त डॉ. पंकज गुप्ता और निदेशक अकादमिक डॉ. बीएस कुशवाह ने हरित तकनीकी से चांदी के नैनो कणों को विकसित करने की इस तकनीकी को पेटेंट कराने के लिए हर संभव मदद करने का आश्वासन दिया है।
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बॉयो टेक्नोलॉजी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. आशीष शुक्ला के निर्देशन में छात्र अस्तित्व सक्सेना, देवांश पुंडीर, ऋतिक कश्यप, पुनीत शुक्ला और शिवम भारद्वाज ने प्रोजेक्ट पर काम किया है। डॉ. आशीष शुक्ला ने बताया कि कपड़ा उद्योग में इस्तेमाल होने वाली हानिकारक डाई मिथाइलीन ब्लू व मिथाइल रेड से जल प्रदूषण उत्पन्न होता है। इसे कम करने के लिए हरित तकनीकी के माध्यम से नैनो टेक्नोलॉजी का उपयोग करके चांदी के नैनो कणों को विकसित किया गया है। तकनीकी में मेथी दाना, नीम व मूली के पत्ते का अर्क सिल्वर नाइट्रेट के साथ मिलाकर उसे धूप में रखा गया। इस प्रक्रिया से बनने वाले चांदी के नैनों कणों के माध्यम से मिथाइलीन ब्लू व मिथाइल रेड से उत्पन्न हानिकारक अपशिष्टों को 72 घंटे बाद जांच करने पर पता चला कि दोनों डाई के हानिकर प्रभाव करीब 70 फीसदी तक कम हो गए।
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डॉ. आशीष शुक्ला ने बताया कि चांदी के नैनो कणों को विकसित करने की यह हरित तकनीकी कारगर होने के साथ पर्यावरण के अनुकूल है। तकनीकी कपड़ा उद्योग के अपशिष्ट और निकलने वाले प्रदूषित पानी के हानिकारक प्रभावों को कम करने में कारगर सहायक साबित हो सकती है। विभागाध्यक्ष डॉ. विवेक कुमार श्रीवास्तव के मुताबिक देश के अलावा दुनिया में कपड़ा उद्योगों में इस्तेमाल होने वाली कार्बनिक डाई से जल और वायु प्रदूषण बढ़ता जा रहा है। संस्थान के निदेशक प्रशासनिक व वित्त डॉ. पंकज गुप्ता और निदेशक अकादमिक डॉ. बीएस कुशवाह ने हरित तकनीकी से चांदी के नैनो कणों को विकसित करने की इस तकनीकी को पेटेंट कराने के लिए हर संभव मदद करने का आश्वासन दिया है।
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