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सीकरी में गोकुला जाट का नाम पर उद्यान
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आगरा। फतेहपुर सीकरी में तेरहमोरी बांध के पास राजकीय उद्यान का नाम बदलकर अब वीर गोकुला जाट उद्यान कर दिया गया है। 76 एकड़ में फैले बाग में वीर गोकुला जाट की आदमकद प्रतिमा स्थापित की जाएगी। हर साल एक जनवरी को वीर गोकुला जाट बलिदान दिवस मनाया जाएगा।
प्रदेश सरकार के सूक्ष्म, लघु, मध्यम उद्यम राज्यमंत्री चौ. उदयभान सिंह के मुताबिक चार साल से वीर गोकुला जाट की प्रतिमा स्थापित कराने का प्रयास हो रहा था। उद्यान विभाग कीविशेष सचिव संदीप कौर ने बृहस्पतिवार को यह आदेश जारी कर दिया है। तेरहमोरी बांध के पास राजकीय उद्यान का नाम बदलकर वीर गोकुला जाट उद्यान करने से आने वाली पीढ़ियां उनके बलिदान से रूबरू हो सकेंगी। प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा वीर गोकुला जाट के नाम पर उद्यान का नाम करने के निर्णय पर सीकरी की जनता की ओर से उनका नागरिक अभिनंदन किया जाएगा। चौ. उदयभान सिंह ने कहा कि वीर गोकुला जाट की शहादत की जानकारी हर एक को होनी चाहिए।
वीर गोकुला जाट तिलपत के जमींदार थे। मुगल बादशाह ने जब अधिक मालगुजारी वसूलने का आदेश दिया तो उन्होंने हर वर्ग के किसानों को एकत्रित किया और मालगुजारी न देने का एलान किया। मुगल फौज और गोकुला जाट की किसान सेना के बीच संघर्ष शुरू हो गया। दिसंबर 1669 में औरंगजेब और गोकुला जाट के बीच तीन दिन तक भीषण युद्ध हुआ। गोकुला जाट और उनके साथियों व परिजनों को बंदी बना लिया गया। आगरा में पुरानी कोतवाली, फ व्वारे के पास गोकुला जाट शहीद हुए।
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प्रदेश सरकार के सूक्ष्म, लघु, मध्यम उद्यम राज्यमंत्री चौ. उदयभान सिंह के मुताबिक चार साल से वीर गोकुला जाट की प्रतिमा स्थापित कराने का प्रयास हो रहा था। उद्यान विभाग कीविशेष सचिव संदीप कौर ने बृहस्पतिवार को यह आदेश जारी कर दिया है। तेरहमोरी बांध के पास राजकीय उद्यान का नाम बदलकर वीर गोकुला जाट उद्यान करने से आने वाली पीढ़ियां उनके बलिदान से रूबरू हो सकेंगी। प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा वीर गोकुला जाट के नाम पर उद्यान का नाम करने के निर्णय पर सीकरी की जनता की ओर से उनका नागरिक अभिनंदन किया जाएगा। चौ. उदयभान सिंह ने कहा कि वीर गोकुला जाट की शहादत की जानकारी हर एक को होनी चाहिए।
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वीर गोकुला जाट तिलपत के जमींदार थे। मुगल बादशाह ने जब अधिक मालगुजारी वसूलने का आदेश दिया तो उन्होंने हर वर्ग के किसानों को एकत्रित किया और मालगुजारी न देने का एलान किया। मुगल फौज और गोकुला जाट की किसान सेना के बीच संघर्ष शुरू हो गया। दिसंबर 1669 में औरंगजेब और गोकुला जाट के बीच तीन दिन तक भीषण युद्ध हुआ। गोकुला जाट और उनके साथियों व परिजनों को बंदी बना लिया गया। आगरा में पुरानी कोतवाली, फ व्वारे के पास गोकुला जाट शहीद हुए।
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