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साइबेरियन परिंदों को रास आया ब्रज का जोधपुर झाल, प्रकृति की गोद में कर रहे अठखेलियां
Wed, 21 Oct 2020 12:13 AM IST
मुकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा/मथुरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा/मथुरा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Wed, 21 Oct 2020 12:13 AM IST
सार
- आगरा और मथुरा जिले की सीमा पर फरह ब्लॉक की ग्राम पंचायत कौह के मौजा जोधपुर के लगभग 125 हेक्टेयर क्षेत्रफल में फैला जोधपुर झाल परिंदों के लिए नया ठिकाना बन गया है।
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जोधपुर झाल में साइबेरियाई पक्षी पिपिट
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
हल्की ठंड से खुशनुमा हुई जोधपुर झाल साइबेरियाई पक्षी पिपिट को रास आ रही है। साइबेरिया से हजारों किलोमीटर की यात्रा करके आई पिपिट की दो प्रजातियों ने जोधपुर झाल में सर्दी के प्रवास के लिए आशियाना बना लिया है।
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पांच से छह इंच तक बड़े साइबेरियाई पिपिट नुकीली चोंच, नुकीले पंख और लंबे पैरों के बड़े पंजे वाले हैं। आगरा और मथुरा जिले की सीमा पर लगभग 125 हेक्टेयर क्षेत्रफल में फैला जोधपुर झाल के प्राकृतिक आवास में ये पक्षी कीटों को खाते हुए दिख रहे हैं। एक बार में यह छह अंडे तक देते हैं।
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जोधपुर झाल की जैव विविधता का अध्ययन कर रहे बायोडायवर्सिटी रिसर्च एंड डवलपमेंट सोसायटी के सदस्यों ने जोधपुर झाल पर पिपिट की चार प्रजातियों की पहचान की है। यहां पिपिट की सर्दी के मौसम में प्रवास के लिए आने वाली अन्य प्रजातियां भी मौजूद हो सकती हैं। पिपिट की 50 में से 11 प्रजातियां भारत मे हैं।
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सर्दियों के प्रवास पर पिपिट
बायोडायवर्सिटी रिसर्च एंड डेवलपमेंट सोसायटी के अध्यक्ष डॉ. केपी सिंह ने बताया कि जोधपुर झाल पर साइबेरिया से प्रवासी टैनी पिपिट और ट्री पिपिट सर्दियों के मौसम में प्रवास हेतु पहुंची हैं। जोधपुर झाल पर पेडीफील्ड पिपिट व लोंग बिल्ड पिपिट पहले से ही मौजूद हैं।
पानी रोके सिंचाई विभाग
जलाधिकार फाउंडेशन के अध्यक्ष अनुराग शर्मा ने कहा कि जोधपुर झाल पर बड़ी संख्या में विदेशी पक्षी आने लगे हैं। यह और बेहतर हो सकता है अगर सिंचाई विभाग जोधपुर झाल में पानी रोकने के लिए सैल्यूस गेट लगा दे। एक साल से यह प्रस्ताव अटका पड़ा है। पानी भरते ही जोधपुर झाल रमणीक स्थल बन जाएगा।
गौरैया की तरह दिखती है ट्री पिपिट
ट्री पिपिट गौरैया की तरह नजर आती है। यह यूरोप और साइबेरियन पर्वतीय क्षेत्र में प्रजनन करता है। यह सर्दियों में अफ्रीका और दक्षिणी एशिया में लंबी दूरी तय करके प्रवास पर पहुंचता है। पेड़ों में अपना बसेरा बनाते हैं। प्रजनन के लिए खुला वेटलैंड और झाड़ियां तलाशते हैं।
जबकि टैनी पिपिट उत्तर-पश्चिम अफ्रीका, पुर्तगाल से मध्य साइबेरिया और मध्य मंगोलिया तक के पैलेक्टिक क्षेत्रों में प्रजनन करती है। यह सर्दियों में अफ्रीका और भारत आते हैं। यह मधुर गीत गाता है। सर्दियों में प्रवास के समय यह रिचर्ड ब्लिथ व पैडीफील्ड पिपिट के साथ प्रवास करता है।
पानी रोके सिंचाई विभाग
जलाधिकार फाउंडेशन के अध्यक्ष अनुराग शर्मा ने कहा कि जोधपुर झाल पर बड़ी संख्या में विदेशी पक्षी आने लगे हैं। यह और बेहतर हो सकता है अगर सिंचाई विभाग जोधपुर झाल में पानी रोकने के लिए सैल्यूस गेट लगा दे। एक साल से यह प्रस्ताव अटका पड़ा है। पानी भरते ही जोधपुर झाल रमणीक स्थल बन जाएगा।
गौरैया की तरह दिखती है ट्री पिपिट
ट्री पिपिट गौरैया की तरह नजर आती है। यह यूरोप और साइबेरियन पर्वतीय क्षेत्र में प्रजनन करता है। यह सर्दियों में अफ्रीका और दक्षिणी एशिया में लंबी दूरी तय करके प्रवास पर पहुंचता है। पेड़ों में अपना बसेरा बनाते हैं। प्रजनन के लिए खुला वेटलैंड और झाड़ियां तलाशते हैं।
जबकि टैनी पिपिट उत्तर-पश्चिम अफ्रीका, पुर्तगाल से मध्य साइबेरिया और मध्य मंगोलिया तक के पैलेक्टिक क्षेत्रों में प्रजनन करती है। यह सर्दियों में अफ्रीका और भारत आते हैं। यह मधुर गीत गाता है। सर्दियों में प्रवास के समय यह रिचर्ड ब्लिथ व पैडीफील्ड पिपिट के साथ प्रवास करता है।