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श्री पारस अस्पताल मामला: सेवानिवृत्त डीआईजी ने कहा- सारे मरीजों की एक साथ कैसे कम कर सकते हैं ऑक्सीजन
Mon, 28 Jun 2021 04:33 PM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Mon, 28 Jun 2021 04:33 PM IST
सार
सेवानिवृत्त डीआईजी महेश कुमार मिश्र का कहना है कि मामले में थाना न्यू आगरा में मुकदमा दर्ज कराया गया है। इसमें ऑक्सीजन की कमी को लेकर भ्रम फैलाने की बात कही गई है।
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सेवानिवृत्त डीआईजी महेश कुमार मिश्र और वीएस त्यागी बाएं से दाएं
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
श्री पारस अस्पताल में ऑक्सीजन मॉकड्रिल को लेकर तथाकथित वीडियो सामने आने के बाद जहां पीड़ितों ने कई सवाल उठाए हैं, वहीं सेवानिवृत्त डीआईजी महेश कुमार मिश्र ने भी कई बिंदुओं की तरफ पुलिस का ध्यान खींचा है। उनका कहना है कि वायरल वीडियो में ऑक्सीजन की मॉकड्रिल की बात कही गई है। पुलिस विभाग में तो मॉकड्रिल अक्सर की जाती है, लेकिन चिकित्सा जगत में पहली बार सुना गया है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि किसी एक मरीज की तो ऑक्सीजन कम की जा सकती है, लेकिन सारे मरीजों की ऑक्सीजन एक साथ कैसे कम कर सकते हैं।
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सेवानिवृत्त डीआईजी महेश कुमार मिश्र का कहना है कि मामले में थाना न्यू आगरा में मुकदमा दर्ज कराया गया है। इसमें ऑक्सीजन की कमी को लेकर भ्रम फैलाने की बात कही गई है। इसमें डॉक्टर को आरोपी बनाया गया। पुलिस अपनी जांच वीडियो वायरल करने वाले, बनाने वाले और भ्रम फैलाने के बिंदु पर कर रही है, जबकि पुलिस को अपनी जांच ऑक्सीजन की मॉकड्रिल को लेकर भी करनी चाहिए।
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अस्पताल में भर्ती मरीजों का पूरा रिकॉर्ड इलाज के दौरान रखा जाता है। किसको क्या दवा देनी है, कब देनी है, डॉक्टर को कब विजिट करनी है, ऑक्सीजन लेबल की क्या स्थिति है, ऑक्सीजन कब बंद करनी है, कब कम करनी है, कब ज्यादा, यह सब बेड पर ही एक चार्ट पर लिखा जाता है। पुलिस को सबसे पहले एक्सपर्ट की मदद से 26 और 27 अप्रैल को अस्पताल में भर्ती मरीजों की स्थिति का पता करना चाहिए। यह अस्पताल के रिकॉर्ड से पता चल जाएगा। अगर, ऑक्सीजन की मॉकड्रिल की गई तो इसका रिकॉर्ड होना चाहिए।
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सबसे बड़ा सवाल यह है कि एक साथ सारे मरीज की ऑक्सीजन कैसे कम की जा सकती है, जबकि हर मरीज का ऑक्सीजन लेवल अलग होता है। कोरोना में मरीजों की ऑक्सीजन का लेवल भी अलग-अलग स्तर पर होगा। ऐसे में एक साथ मरीजों की ऑक्सीजन वायरल वीडियो के मुताबिक, कैसे बंद की जा सकती है। इस बिंदु पर पुलिस अपनी जांच बढ़ाए तो पुलिस के सामने अहम तथ्य आ सकते हैं।
10 दिन में मंगाई जा सकती है डीवीआर की एफएसएल रिपोर्ट
सेवानिवृत्त डीआईजी महेश कुमार मिश्र ने बताया कि पुलिस ने अस्पताल के सीसीटीवी कैमरों की डीवीआर को कब्जे में लिया है। अगर, पुलिस प्रमुखता पर रखकर लैब को पत्र लिखे तो सात से दस दिन में रिपोर्ट मिल सकती है। इसमें क्या फुटेज आए होंगे, इसके बारे में पता चल जाएगा। सामान्य मामलों में एफएसएल से महीनों तक रिपोर्ट मिलना मुश्किल होता है। उधर, पुलिस आज डीवीआर को फोरेंसिक साइंस लैब में भेजेगी।
कहां गया पुलिस की कोरोना सेल का रिकॉर्ड
कोरोना काल में मरीजों की संख्या और परिवार की स्थिति का पता करने के लिए कोरोना सेल का गठन किया गया था। कोरोना पॉजिटिव की रिपोर्ट आने के बाद जहां स्वास्थ्य विभाग की टीम फोन करके मरीज की स्थिति का पता करती थी। नगर निगम की टीम सैनिटाइजेशन करती थी, वहीं पुलिस की कोरोना सेल भी मरीज से जानकारी लेती थी। फोन करके परिवार की स्थिति के बारे में पूछा जाता था। श्री पारस अस्पताल में कितने मरीज भर्ती हुए, कितने डिस्चार्ज हुए, कितनों की मौत हुई, यही भी पुलिस की कोरोना सेल में उपलब्ध होगा। मगर, अभी तक कोरोना सेल के रिकॉर्ड को चेक नहीं किया गया है।
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10 दिन में मंगाई जा सकती है डीवीआर की एफएसएल रिपोर्ट
सेवानिवृत्त डीआईजी महेश कुमार मिश्र ने बताया कि पुलिस ने अस्पताल के सीसीटीवी कैमरों की डीवीआर को कब्जे में लिया है। अगर, पुलिस प्रमुखता पर रखकर लैब को पत्र लिखे तो सात से दस दिन में रिपोर्ट मिल सकती है। इसमें क्या फुटेज आए होंगे, इसके बारे में पता चल जाएगा। सामान्य मामलों में एफएसएल से महीनों तक रिपोर्ट मिलना मुश्किल होता है। उधर, पुलिस आज डीवीआर को फोरेंसिक साइंस लैब में भेजेगी।
कहां गया पुलिस की कोरोना सेल का रिकॉर्ड
कोरोना काल में मरीजों की संख्या और परिवार की स्थिति का पता करने के लिए कोरोना सेल का गठन किया गया था। कोरोना पॉजिटिव की रिपोर्ट आने के बाद जहां स्वास्थ्य विभाग की टीम फोन करके मरीज की स्थिति का पता करती थी। नगर निगम की टीम सैनिटाइजेशन करती थी, वहीं पुलिस की कोरोना सेल भी मरीज से जानकारी लेती थी। फोन करके परिवार की स्थिति के बारे में पूछा जाता था। श्री पारस अस्पताल में कितने मरीज भर्ती हुए, कितने डिस्चार्ज हुए, कितनों की मौत हुई, यही भी पुलिस की कोरोना सेल में उपलब्ध होगा। मगर, अभी तक कोरोना सेल के रिकॉर्ड को चेक नहीं किया गया है।
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