श्रीकृष्ण जन्मभूमि ईदगाह प्रकरण: मंदिर तोड़कर बनी ईदगाह, वादी के अधिवक्ता ने रखा अपना पक्ष
पक्षकार के अधिवक्ता ने अयोध्या मंदिर प्रकरण में सुप्रीम कोर्ट के निर्णय से भी अदालत को अवगत कराया। जिसमें बताया गया गया है कि यदि कोई मंदिर को तोड़कर मस्जिद बना लेता है तो वह स्थान उसका नहीं हो जाता।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
श्रीकृष्ण जन्मभूमि ईदगाह से जुड़े एक मामले में मंगलवार को मनीष यादव के अधिवक्ता ने सिविल जज सीनियर डिवीजन कोर्ट के समक्ष अपना पक्ष रखा। उन्होंने कोर्ट को बताया कि औरंगजेब ने मंदिर को तोड़कर ईदगाह को तैयार कराया था। उन्होंने इस संबंध में अयोध्या मंदिर प्रकरण में सुप्रीम कोर्ट के निर्णय से भी अदालत को अवगत कराया। जिसमें बताया गया गया है कि यदि कोई मंदिर को तोड़कर मस्जिद बना लेता है तो वह स्थान उसका नहीं हो जाता।
डेढ़ घंटे चली बहस
करीब डेढ़ घंटे चली बहस में पक्षकार की ओर से श्रीकृष्ण जन्मभूमि की 13.37 एकड़ जमीन से शाही ईदगाह हटाने के लिए कई दलीलें दी गईं। इस दौरान पक्षकार मनीष यादव के अधिवक्ता सुरजीत, अधिवक्ता देवकीनंदन शर्मा अदालत में मौजूद रहे।
ये भी पढ़ें - Agra: पुलिस ने एक बिल्ली को खोजने के लिए झोंक दी पूरी ताकत, यूं लौटाई नन्हे-मुन्ने बच्चों के चहरों पर मुस्कान
16 नवंबर को होगी सुनवाई
पक्षकार मनीष यादव ने बताया कि अदालत में वह अपने पक्ष में अभी और बहस करेंगे। प्रतिवादी गण में से एक शाही ईदगाह के सचिव एडवोकेट तनवीर अहमद ने बताया कि वह अदालत में अपनी बहस पूरी कर चुके हैं। पक्षकार की बहस के दौरान भी उन्होंने अदालत का ध्यान इस ओर आकृष्ट कराया कि पक्षकार ने अपनी बहस के पक्ष में कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किए हैं। अधिवक्ता देवकीनंदन शर्मा ने बताया कि अदालत में अगली सुनवाई 16 नवंबर को होगी।