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शनैश्चरी अमावस्या पर गंगा घाटों पर श्रद्धालुओं ने लगाई आस्था की डुबकी
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कासगंज शनि अमावस्या एवं बैशाखी अमावस्या पर कछला गंगाघाट पर स्नान करते श्रद्यालू
- फोटो : KASGANJ
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कासगंज/सोरोंजी। शनैश्चरी अमावस्या पर बड़ी संख्या में कछला गंगा घाट, लहरा घाट, कादरगंज घाट, तीर्थनगरी में हरि की पौड़ी सहित अन्य गंगा घाटों पर श्रद्धालुओं ने आस्था का डुबकी लगाई। हर-हर गंगे और गंगा मैैया की जयकारे घाटों पर लगाए गए। श्रद्धालुुओं ने घाटों पर साधुओं और निर्धनों को दान देकर पुण्य लाभ अर्जित किया।
गंगा घाटों पर सुबह से ही श्रद्धालु पहुंचना शुरू हो गए। तीर्थनगरी हरि की पौड़ी पर राजस्थान, मध्य प्रदेश सहित अन्य सुदूर क्षेत्रों से भी श्रद्धालु गंगा स्नान को पहुंचे। श्रद्धालुओं द्वारा भोर की किरण से ही गंगा स्नान शुरू किया गया। दोपहर तक श्रद्धालुओं द्वारा गंगा स्नान किया गया। श्रद्धालुओं ने मां गंगा की पूजा की। दुग्ध अभिषेक कर मां गंगा की पैरावनी की व आरती उतारी। गंगा किनारे बैठे गरीबों को अनाज व वस्त्र का दान किया। हरि नाम का संकीर्तन व गंगा मैया की परिक्रमा करते हुए श्रद्धालु क्षेत्राधीश वराह मंदिर पहुंचे। जहां भगवान वराह के आगे मत्था टेककर प्रसाद चढ़ाया। मंदिर परिसर भगवान वराह व गंगा मैया के जयकारे लगाए गए।
कराए गए संस्कार एवं अनुष्ठान
तीर्थनगरी हरि की पौड़ी व कछला गंगा घाट पर श्रद्धालुओं ने नवजात बच्चों का मुंडन संस्कार कराया। वहीं, पूर्वजों की आत्म शांति के लिए तीर्थ पुरोहितों से पूजन अनुष्ठान कराया। अनुष्ठान के बाद पुरोहितों को दान दक्षिणा दी गई। पितरों का विधिविधान पूर्वक पूजन करने के बाद श्रद्धालुओं ने सपरिवार गंगा स्नान किया।
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मंदिरों पर की पूजा अर्चना, मांगी मनौतियां
तीर्थनगरी पर हरि की पौड़ी परिक्रमा मार्ग पर सहित अन्य मंदिरों पर श्रद्धालुओं ने गंगा स्नान के बाद पूजा-अर्चना की। देव दर्शन कर उनकी आरती उतारी। तीर्थनगरी के रघुनाथजी, द्वारिकाधीश, बालाजी, बटुकनाथ, सिद्ध हनुमान, पंचमहाशक्ति, मानस मंदिर, शनिदेव, अन्नपूर्णा, सिद्ध विनायक, सोमेश्वर, भागीरथ गुफा आदि मंदिरों पर भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के कर पूजा-अर्चना की। परिवार की खुशहाली के लिए मनौतियां की गईं।
वैशाखी अमावस्या पर गंगा स्नान का है विशेष महत्व
शास्त्रों में वैशाख अमावस्या को धर्म-कर्म, स्नान-दान और पितरों के तर्पण के लिए बेहद शुभ माना जाता है। यह पितरों को मोक्ष दिलाने वाली तिथि है। मान्यता है कि इस माह से त्रेता युग की शुरुआत हुई थी। जिस कारण भी वैशाख अमावस्या का धार्मिक महत्व अधिक हो जाता है।
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गंगा घाटों पर सुबह से ही श्रद्धालु पहुंचना शुरू हो गए। तीर्थनगरी हरि की पौड़ी पर राजस्थान, मध्य प्रदेश सहित अन्य सुदूर क्षेत्रों से भी श्रद्धालु गंगा स्नान को पहुंचे। श्रद्धालुओं द्वारा भोर की किरण से ही गंगा स्नान शुरू किया गया। दोपहर तक श्रद्धालुओं द्वारा गंगा स्नान किया गया। श्रद्धालुओं ने मां गंगा की पूजा की। दुग्ध अभिषेक कर मां गंगा की पैरावनी की व आरती उतारी। गंगा किनारे बैठे गरीबों को अनाज व वस्त्र का दान किया। हरि नाम का संकीर्तन व गंगा मैया की परिक्रमा करते हुए श्रद्धालु क्षेत्राधीश वराह मंदिर पहुंचे। जहां भगवान वराह के आगे मत्था टेककर प्रसाद चढ़ाया। मंदिर परिसर भगवान वराह व गंगा मैया के जयकारे लगाए गए।
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कराए गए संस्कार एवं अनुष्ठान
तीर्थनगरी हरि की पौड़ी व कछला गंगा घाट पर श्रद्धालुओं ने नवजात बच्चों का मुंडन संस्कार कराया। वहीं, पूर्वजों की आत्म शांति के लिए तीर्थ पुरोहितों से पूजन अनुष्ठान कराया। अनुष्ठान के बाद पुरोहितों को दान दक्षिणा दी गई। पितरों का विधिविधान पूर्वक पूजन करने के बाद श्रद्धालुओं ने सपरिवार गंगा स्नान किया।
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मंदिरों पर की पूजा अर्चना, मांगी मनौतियां
तीर्थनगरी पर हरि की पौड़ी परिक्रमा मार्ग पर सहित अन्य मंदिरों पर श्रद्धालुओं ने गंगा स्नान के बाद पूजा-अर्चना की। देव दर्शन कर उनकी आरती उतारी। तीर्थनगरी के रघुनाथजी, द्वारिकाधीश, बालाजी, बटुकनाथ, सिद्ध हनुमान, पंचमहाशक्ति, मानस मंदिर, शनिदेव, अन्नपूर्णा, सिद्ध विनायक, सोमेश्वर, भागीरथ गुफा आदि मंदिरों पर भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के कर पूजा-अर्चना की। परिवार की खुशहाली के लिए मनौतियां की गईं।
वैशाखी अमावस्या पर गंगा स्नान का है विशेष महत्व
शास्त्रों में वैशाख अमावस्या को धर्म-कर्म, स्नान-दान और पितरों के तर्पण के लिए बेहद शुभ माना जाता है। यह पितरों को मोक्ष दिलाने वाली तिथि है। मान्यता है कि इस माह से त्रेता युग की शुरुआत हुई थी। जिस कारण भी वैशाख अमावस्या का धार्मिक महत्व अधिक हो जाता है।