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मनरेगा से होगा 24 किमी लंबी सेंगर नदी का कायाकल्प
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बरनाहल क्षेत्र में बदहाल सेंगर नदी
- फोटो : MAINPURI
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मैनपुरी। फसलों को अपने पानी से सींचने वाली यमुना की सहायक सेंगर नदी तंत्र की लापरवाही के चलते बदहाल हो गई है। दशकों से सफाई न होने के चलते नदी की धारा अवरुद्ध हो गई है। अब इस नदी का कायाकल्प करने की पहल सीडीओ ईशा प्रिया ने की है। मनरेगा से जल्द ही नदी की खोदाई का काम शुरू होगा।
जिले में मुख्य रूप से तीन नदियां बहती हैं। इसमें ईशन नदी, अरिंद नदी और सेंगर नदी शामिल हैं। ईशन नदी की सफाई विगत वर्ष कराई जा चुकी है। वहीं अरिंद नदी में भी लगभग पांच वर्ष पूर्व कार्य कराया गया था लेकिन सेंगर नदी के पुनरोद्धार के लिए पहल नहीं हो सकी थी। अनदेखी के चलते कभी फसलों की सिंचाई में अहम भूमिका निभाने वाली सेंगर नदी अब बदहाल पड़ी है। सिल्ट से धीरे-धीरे नदी की धारा अवरुद्ध होती चली गई।
इतना ही नहीं कई जगह नदी की पटरी भी गायब हो गई है। अब मुख्य विकास अधिकारी ईशा प्रिया ने इस नदी को फिर से पुराने स्वरूप में लाने का जिम्मा उठाया है। उन्होंने मनरेगा से नदी की खोदाई कराने के लिए प्लान तैयार किया है। इसके लिए संबंधित खंड विकास अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। अगले सप्ताह नदी की खोदाई का काम शुरू हो जाएगा।
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जिले में 24 किमी है नदी का क्षेत्रफल
फिरोजाबाद जिले की सीमा से मैनपुरी में प्रवेश करने वाली सेंगर नदी जिले में लगभग 24 किमी का सफर तय करती है। खंड विकास अधिकारी धीरेंद्र कुमार ने बताया कि बरनाहल विकास खंड के गांव कनिकपुर खिजरपुर से जिले में प्रवेश कर नदी सजावारपुर, अब्दुल नवीपुर, नवाटेढ़ा, रसूलपुर, मांसरपुर और भूरेपुर होती हुई करहल विकास खंड की सीमा में प्रवेश कर जाती है। करहल के कुछ गांवों को छूती हुई नदी जिले की सीमा से बाहर निकलती है।
मथुरा से हुआ है उद्गम
सेंगर नदी का उद्गम मथुरा जिले की नूह झील से हुआ है। झील से निकलकर सेंगर नदी मथुरा, अलीगढ़, एटा, फिरोजाबाद, मैनपुरी, औरैया, रमाबाईनगर जिलों से होती हुई घाटमपुर के मूसानगर कस्बे के चोर सराह नामक स्थान पर यमुना नदी में गिरती है। इस नदी में साल भर पानी रहता था। झील के अलावा निचली गंग नहर का पानी भी इसी नदी में आता था लेकिन धीरे-धीरे अवरुद्ध होने के कारण इसकी धारा प्रभावित हो गई।
सेंगर नदी की खोदाई का काम मनरेगा से किया जाएगा। अगले सप्ताह से काम शुरू होने की उम्मीद है। इससे न केवल नदी की सफाई होगी अपितु श्रमिकों को मनरेगा के तहत रोजगार भी मिलेगा।
ईशा प्रिया, मुख्य विकास अधिकारी।
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जिले में मुख्य रूप से तीन नदियां बहती हैं। इसमें ईशन नदी, अरिंद नदी और सेंगर नदी शामिल हैं। ईशन नदी की सफाई विगत वर्ष कराई जा चुकी है। वहीं अरिंद नदी में भी लगभग पांच वर्ष पूर्व कार्य कराया गया था लेकिन सेंगर नदी के पुनरोद्धार के लिए पहल नहीं हो सकी थी। अनदेखी के चलते कभी फसलों की सिंचाई में अहम भूमिका निभाने वाली सेंगर नदी अब बदहाल पड़ी है। सिल्ट से धीरे-धीरे नदी की धारा अवरुद्ध होती चली गई।
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इतना ही नहीं कई जगह नदी की पटरी भी गायब हो गई है। अब मुख्य विकास अधिकारी ईशा प्रिया ने इस नदी को फिर से पुराने स्वरूप में लाने का जिम्मा उठाया है। उन्होंने मनरेगा से नदी की खोदाई कराने के लिए प्लान तैयार किया है। इसके लिए संबंधित खंड विकास अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। अगले सप्ताह नदी की खोदाई का काम शुरू हो जाएगा।
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जिले में 24 किमी है नदी का क्षेत्रफल
फिरोजाबाद जिले की सीमा से मैनपुरी में प्रवेश करने वाली सेंगर नदी जिले में लगभग 24 किमी का सफर तय करती है। खंड विकास अधिकारी धीरेंद्र कुमार ने बताया कि बरनाहल विकास खंड के गांव कनिकपुर खिजरपुर से जिले में प्रवेश कर नदी सजावारपुर, अब्दुल नवीपुर, नवाटेढ़ा, रसूलपुर, मांसरपुर और भूरेपुर होती हुई करहल विकास खंड की सीमा में प्रवेश कर जाती है। करहल के कुछ गांवों को छूती हुई नदी जिले की सीमा से बाहर निकलती है।
मथुरा से हुआ है उद्गम
सेंगर नदी का उद्गम मथुरा जिले की नूह झील से हुआ है। झील से निकलकर सेंगर नदी मथुरा, अलीगढ़, एटा, फिरोजाबाद, मैनपुरी, औरैया, रमाबाईनगर जिलों से होती हुई घाटमपुर के मूसानगर कस्बे के चोर सराह नामक स्थान पर यमुना नदी में गिरती है। इस नदी में साल भर पानी रहता था। झील के अलावा निचली गंग नहर का पानी भी इसी नदी में आता था लेकिन धीरे-धीरे अवरुद्ध होने के कारण इसकी धारा प्रभावित हो गई।
सेंगर नदी की खोदाई का काम मनरेगा से किया जाएगा। अगले सप्ताह से काम शुरू होने की उम्मीद है। इससे न केवल नदी की सफाई होगी अपितु श्रमिकों को मनरेगा के तहत रोजगार भी मिलेगा।
ईशा प्रिया, मुख्य विकास अधिकारी।