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मूर्तिकार ने पत्नी को दी सच्ची श्रद्धांजलि, ताजमहल से कम नहीं ये 'सृजन'
ब्यूरो/अमर उजाला आगरा
Updated Fri, 06 Oct 2017 03:22 PM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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‘कला एक साधना है।’ यह कहते बहुत लोगों को सुना होगा। यह साबित कर दिखाया महाराष्ट्र के मूर्तिकार रविंद्र साल्वे ने। पत्नी के निधन के बाद भी वह डा. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय में आयोजित ‘सृजन-2017’ में हिस्सा लेने आए।
अपने भावों को पत्थर पर उकेरा, उसको ‘पुष्पांजलि’ नाम देकर पत्नी को समर्पित किया। बुधवार शाम पत्नी की तेरहवीं में हिस्सा लेने के लिए रवाना हो गए। रविंद्र साल्वे ने काले पत्थर पर एक स्त्री का चेहरा बनाया है, उस पर फूल, पत्ती की भी आकृति है।
मूर्तिकार ने अपने आंसुओं को भी मूर्ति में लहर के रूप में प्रदर्शित किया है। सृजन-2017 का समापन सात अक्तूबर को होना है, पर रविंद्र साल्वे ने लगातार काम कर चार अक्तूबर को ही मूर्ति तैयार कर दी। छह अक्तूबर को पत्नी की तेरहवीं है, उसमें शामिल होने के लिए चले गए।
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अपने भावों को पत्थर पर उकेरा, उसको ‘पुष्पांजलि’ नाम देकर पत्नी को समर्पित किया। बुधवार शाम पत्नी की तेरहवीं में हिस्सा लेने के लिए रवाना हो गए। रविंद्र साल्वे ने काले पत्थर पर एक स्त्री का चेहरा बनाया है, उस पर फूल, पत्ती की भी आकृति है।
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मूर्तिकार ने अपने आंसुओं को भी मूर्ति में लहर के रूप में प्रदर्शित किया है। सृजन-2017 का समापन सात अक्तूबर को होना है, पर रविंद्र साल्वे ने लगातार काम कर चार अक्तूबर को ही मूर्ति तैयार कर दी। छह अक्तूबर को पत्नी की तेरहवीं है, उसमें शामिल होने के लिए चले गए।
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रोये और मोबाइल में देखी तस्वीर
ललित कला संस्थान की प्रवक्ता डा. मृदुल जुनेजा ने बताया कि काम करते समय कई बार रविंद्र साल्वे पत्नी को याद कर रो गए। पत्नी की तस्वीर बार-बार मोबाइल में देख लिया करते थे। मूर्तिकारी के प्रति उनका समर्पण देखने लायक था। उन्होंने ललित कला संस्थान में पेंटिंग भी बनाई, उनकी ओर से बनाई गई मूर्ति में अब पॉलिस होना ही बाकी है।
ये है तस्वीर