फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Agra News ›   School vehicles are running in violation of rules due to permit game in Agra RTO

UP: आरटीओ से परमिट का खेल, खतरे में नाैनिहाल; अनदेखी कर दाैड़ रहे स्कूली वाहन

Thu, 03 Jul 2025 08:55 AM IST
धीरेन्द्र सिंह अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा Published by: धीरेन्द्र सिंह Updated Thu, 03 Jul 2025 08:55 AM IST
सार

अफसरों की लापरवाही से नियमों की अनदेखी कर स्कूली वाहन दाैड़ रहे हैं। स्कूल वाहनों में क्षमता से अधिक 10 से 16 तक विद्यार्थी बैठाते हैं।

 

विज्ञापन
School vehicles are running in violation of rules due to permit game in Agra RTO
आगरा आरटीओ - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

आगरा आरटीओ में परमिट के खेल से नियमों की अनदेखी कर स्कूली वाहन दाैड़ रहे हैं। इससे 3 हजार से अधिक वैन और 500 से अधिक ऑटो में नाैनिहाल की जान खतरे में है। चालक क्षमता से अधिक विद्यार्थियों को बैठा रहे हैं तो खुद भी वाहन चलाने के लिए प्रशिक्षित नहीं है। हर बार हादसों के बाद अभियान चलाया जाता है, लेकिन कार्रवाई के नाम पर खानापूर्ति ही रह जाती है।
विज्ञापन


स्कूल वैन के लिए आरटीओ से परमिट लेना होता है। इसमें जिस स्कूल में वैन चलानी होती है, उससे भी एक पत्र लिखवाकर लाना होता है। इसके बाद ही परमिट जारी होता है। ऑटो को स्कूल में चलाने के लिए परमिट नहीं मिलता है। रिकाॅर्ड के मुताबिक, 1186 स्कूल बस और 370 वैन ही पंजीकृत हैं। जानकारों के मुताबिक, 3 हजार से अधिक वैन और 500 से अधिक ऑटो अनाधिकृत रूप से दाैड़ रहे हैं।
विज्ञापन


इनमें भी नियमों का पालन नहीं होता है। चालक वर्दी नहीं पहनते हैं। नाम पटि्टका भी नहीं लगाते हैं। निर्धारित गति का पालन नहीं होता है। पूर्व में रुनकता में एक वैन पलट गई थी, जिसमें बच्चे घायल हो गए थे। इससे पहले वैन में आग लगने की घटनाएं भी सामने आ चुकी हैं। आलोक कुमार एआरटीओ प्रवर्तन स्कूलों की वाहनों की चेकिंग के लिए अभियान चलाया जाएगा। स्कूल प्रबंधकों के साथ बैठक की जाएगी।
विज्ञापन
विज्ञापन


नहीं होती जांच
परमिट के लिए वैन स्वामी स्कूल का प्रमाण पत्र लगाते हैं। हालांकि जिस स्कूल का प्रमाण पत्र होता है, उसमें शायद ही कोई वैन चलाई जाती है। इसकी जांच भी विभाग की ओर से नहीं की जाती है। क्षमता से अधिक विद्यार्थियों को बैठाने के मामले में भी ध्यान नहीं दिया जाता है। अगर, संख्या कम की जाती है तो चालक किराया बढ़ा देते हैं। ऐसे में अभिभावकों को बोझ बढ़ता है। इस कारण अधिक बच्चे वाहन में बैठाने पर अभिभावक भी चुप ही रहते हैं।

 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed