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UP: रामगंगा कमांड परियोजना में घोटाला...तत्कालीन भूमि संरक्षण अधिकारी पर एफआईआर दर्ज, विजिलेंस ने की थी जांच

Mon, 01 Dec 2025 10:26 PM IST
अरुन पाराशर संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा Published by: अरुन पाराशर Updated Mon, 01 Dec 2025 10:26 PM IST
सार

तत्कालीन भूमि संरक्षण अधिकारी ने रामगंगा कमांड परियोजना में मिले फंड में घोटाला किया। विकास कार्यों के लिए नगर पालिका परिषद से धनराशि आवंटित की गई थी। बिना निविदा के विकाय कार्य का ठेका अपनी पत्नी के नाम से बनाई फर्म  को कर दिया।

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Scam in Ramganga Command Project, FIR against land conservation officer Dinesh Kumar Yadav
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

विजिलेंस आगरा सेक्टर थाना में मैनपुरी के तत्कालीन भूमि संरक्षण अधिकारी दिनेश कुमार यादव के खिलाफ धोखाधड़ी, सरकारी धन के गबन सहित अन्य आरोप में प्राथमिकी दर्ज की गई है। इस मामले में विजिलेंस ने जांच की थी। शिकायत के बाद 13 साल बाद शासन के आदेश पर कार्रवाई हुई है।
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आरोप है कि अधिकारी ने रामगंगा कमांड परियोजना में विकास कार्यों के लिए मिले सरकारी धन का दुरुपयोग किया। 6.45 करोड़ की धनराशि में से 3.27 करोड़ की धनराशि हड़प ली। गाजियाबाद की फर्म से निर्माण सामग्री की खरीद दिखाई। बंद ईंट-भट्ठे को भी भुगतान होना दर्शा दिया। फर्जी बिल लगाकर अपनी पत्नी के नाम से बनाई फर्म के खातों में रकम प्राप्त कर ली। आरोपी अधिकारी वर्तमान में लखनऊ में तैनात हैं।
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एसपी विजिलेंस आलोक शर्मा ने बताया कि तत्कालीन भूमि संरक्षण अधिकारी दिनेश कुमार यादव मूलरूप से इटावा के रहने वाले हैं। उनके खिलाफ वर्ष 2012 में अनियमितताओं की शिकायत की गई थी। इस पर विभाग की ओर से जांच कराई गई। मगर जांच वर्ष 2015 में स्थगित कर दी गई। फरवरी 2019 में फिर से जांच शुरू हुई। यह विजिलेंस को मिल गई।
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खुली जांच में पाया गया कि वर्ष 2006-07 में भूमि संरक्षण अधिकारी दिनेश कुमार यादव ने रामगंगा कमांड परियोजना में मिले फंड में घोटाला किया। विकास कार्यों के लिए नगर पालिका परिषद से धनराशि आवंटित की गई थी। बिना निविदा के विकाय कार्य का ठेका अपनी पत्नी शकुंतला के नाम से बनाई फर्म शकुंतला ट्रेडर्स को कर दिया।

वहीं गाजियाबाद की रूबी इंजीनियरिंग एंड स्टील से सरिया खरीदना दिखाया गया। जांच अधिकारी ने जब फर्म से जानकारी मांगी तो फर्म से किसी तरह की खरीद की बात सामने नहीं आई। फर्म को कोई भुगतान नहीं किया गया था। तीन चेकों के माध्यम से भुगतान दर्शा दिया गया था। पवन ईंट-भट्ठे, बोझी सुमेरपुर, मैनपुरी से ईंटों की खरीद दिखाई। इसके लिए 49 लाख रुपये का भुगतान दर्शाया। यह ईंट-भट्ठा भी तीन साल पहले वर्ष 2003 में बंद हो चुका था। इस तरह अधिकारी ने अपनी पत्नी की फर्म को 2.1 करोड़ का भुगतान कर दिया।


सामने आया कि परियोजना अधिकारी ने रिवाल्विंग फंड वर्ष 2006-07 में विकास व साैंदर्यीकरण के लिए आवंटित 6.45 करोड़ की धनराशि में से 3.27 करोड़ की धनराशि फर्जी बिलों से अपने खातों में प्राप्त कर ली। उन्होंने लोकसेवक के रूप में कार्य करते हुए सरकारी धन को हड़प लिया। इसकी रिपोर्ट शासन को भेजी गई थी। इस पर 28 नवंबर को विजिलेंस थाना आगरा सेक्टर में प्राथमिकी दर्ज की गई है।
 
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