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सबने निभाई जिम्मेदारी तो चहकी बेटियों की किलकारी
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मैनपुरी। बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ की मुहिम अब मैनपुरी में रंग लाने लगी है। जागरूकता के चलते महिला-पुरुष लिंगानुपात में लगातार सुधार हो रहा है। स्वास्थ्य विभाग के पास उपलब्ध संस्थागत प्रसव के आंकड़े इस सुधार को प्रमाणिक करने के लिए काफी हैं।
शासन और प्रशासन द्वारा बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान संचालन किया जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य बेटियों की कोख में हत्या को रोकने के साथ ही उन्हें शिक्षा दिलाना है। जिले में बीते चार सालों में इस अभियान ने अपना काम बखूबी किया है। जागरूक होकर लोगों ने अपनी जिम्मेदारी संभाली तो मैनपुरी में बेटियों की किलकारी तेज होते देर न लगी।
स्वास्थ्य विभाग के पास उपलब्ध संस्थागत प्रसव के आंकड़ों के अनुसार लगातार चार साल से बेटियों की संख्या बढ़ रही है। इससे लिंगानुपात में भी सुधार हो रहा है। वर्ष 2017 में एक हजार पुरुष बच्चों के सापेक्ष 918 महिला बच्चों का जन्म हुआ तो वहीं वर्ष 2018 में ये आंकड़ा 920 ओर वर्ष 2019 में 944 पहुंच गया।
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ये चलाए जा रहे अभियान
-भ्रूण हत्या रोकने को अल्ट्रासाउंड सेंटर पर कसा शिकंजा
-गर्भवती महिलाओं की हो रही मॉनीटरिंग
-बालिकाओं को बांटा जा रहा पुष्टाहार
-बेटियों के शिक्षा के लिए किया जा रहा प्रेरित
चार वर्षों के आंकड़ों पर एक नजर
वर्ष जन्म पुरुष जन्म महिला अनुपात
2017 18272 16784 918.08
2018 17275 15907 920.8
2019 21091 19917 944.3
2020 13534 12552 -
नोट: वर्ष 2020 के आंकड़े जनवरी से सितंबर तक के हैं।
शासन और प्रशासन लिंगानुपात कम करने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है। जिले में इसका असर भी नजर आने लगा है। अभी हमारी जिम्मेदारी खत्म नहीं हुई है, इसमें और सुधार की आवश्यकता है।
डॉ. एके पांडेय, मुख्य चिकित्साधिकारी।
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शासन और प्रशासन द्वारा बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान संचालन किया जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य बेटियों की कोख में हत्या को रोकने के साथ ही उन्हें शिक्षा दिलाना है। जिले में बीते चार सालों में इस अभियान ने अपना काम बखूबी किया है। जागरूक होकर लोगों ने अपनी जिम्मेदारी संभाली तो मैनपुरी में बेटियों की किलकारी तेज होते देर न लगी।
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स्वास्थ्य विभाग के पास उपलब्ध संस्थागत प्रसव के आंकड़ों के अनुसार लगातार चार साल से बेटियों की संख्या बढ़ रही है। इससे लिंगानुपात में भी सुधार हो रहा है। वर्ष 2017 में एक हजार पुरुष बच्चों के सापेक्ष 918 महिला बच्चों का जन्म हुआ तो वहीं वर्ष 2018 में ये आंकड़ा 920 ओर वर्ष 2019 में 944 पहुंच गया।
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ये चलाए जा रहे अभियान
-भ्रूण हत्या रोकने को अल्ट्रासाउंड सेंटर पर कसा शिकंजा
-गर्भवती महिलाओं की हो रही मॉनीटरिंग
-बालिकाओं को बांटा जा रहा पुष्टाहार
-बेटियों के शिक्षा के लिए किया जा रहा प्रेरित
चार वर्षों के आंकड़ों पर एक नजर
वर्ष जन्म पुरुष जन्म महिला अनुपात
2017 18272 16784 918.08
2018 17275 15907 920.8
2019 21091 19917 944.3
2020 13534 12552 -
नोट: वर्ष 2020 के आंकड़े जनवरी से सितंबर तक के हैं।
शासन और प्रशासन लिंगानुपात कम करने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है। जिले में इसका असर भी नजर आने लगा है। अभी हमारी जिम्मेदारी खत्म नहीं हुई है, इसमें और सुधार की आवश्यकता है।
डॉ. एके पांडेय, मुख्य चिकित्साधिकारी।