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सत्संग से कठिन कार्य हो जाते हैं सफल: सत्यानंद
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फिरोजाबाद। अखिल भारतीय सोह्म महामंडल के तत्वावधान में आयोजित संत सम्मेलन में स्वामी सत्यानंद महाराज ने कहा कि कलिकाल में यदि कोई चीज महत्वपूर्ण है तो वह सत्संग है। सत्संग से कठिन से कठिन कार्य भी सफल हो जाते हैं।
जैननगर स्थित सोह्म आश्रम में आखिल भारतीय सोह्म महामंडल के अध्यक्ष स्वामी सत्यानंद महाराज ने कहा कि भय की उत्पत्ति होने पर भगवान की शरण में पहुंचने से सभी का भय दूर हो जाता है। परमात्मा की शरण लेने वालों की सभी समस्याओं का समाधान होता है। स्वामी जी ने सत्संग की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि सत्संग महिमा से भगवत कृपा होती है। मानव मात्र को सत्संग जीवन जीना सिखाता है। सत्संग हमें धर्म और दान की प्रेरणा देता है।
रामचरित मानस के मर्मज्ञ स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने कहा कि भगवान ने स्वयं कहा है कि मेरे भक्त की सेवा ही असली सेवा है। रामायण के अनेक उदाहरण देते हुए उन्होंने प्रेम की परिभाषा देते हुए कहा कि प्रेम ऐसा करो जैसे दूध व पानी का साथ है। प्रेम के अभाव में मनुष्य जी नहीं सकता है। स्वामी प्रज्ञानंद, स्वामी अनंतानंद, स्वामी नारायणानंद, स्वामी प्रणवानंद महाराज ने भी अपने विचार रखे। सत्संग समारोह के समापन पर आरती के साथ प्रसाद वितरण किया गया। चंद्रप्रकाश शर्मा, द्विजेंद्र मोहन शर्मा, उमाकांत पचौरी एडवोकेट, राकेश प्रधान, सम्मन सिंह यादव, रामौतार, राजेश गुप्ता, मातादीन, संजय, महेश यादव, विद्याराम, सर्वेश दीक्षित, अनुग्रह गोपाल अग्रवाल, राधेश्याम, लल्ला चौधरी आदि मौजूद रहे।
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जैननगर स्थित सोह्म आश्रम में आखिल भारतीय सोह्म महामंडल के अध्यक्ष स्वामी सत्यानंद महाराज ने कहा कि भय की उत्पत्ति होने पर भगवान की शरण में पहुंचने से सभी का भय दूर हो जाता है। परमात्मा की शरण लेने वालों की सभी समस्याओं का समाधान होता है। स्वामी जी ने सत्संग की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि सत्संग महिमा से भगवत कृपा होती है। मानव मात्र को सत्संग जीवन जीना सिखाता है। सत्संग हमें धर्म और दान की प्रेरणा देता है।
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रामचरित मानस के मर्मज्ञ स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने कहा कि भगवान ने स्वयं कहा है कि मेरे भक्त की सेवा ही असली सेवा है। रामायण के अनेक उदाहरण देते हुए उन्होंने प्रेम की परिभाषा देते हुए कहा कि प्रेम ऐसा करो जैसे दूध व पानी का साथ है। प्रेम के अभाव में मनुष्य जी नहीं सकता है। स्वामी प्रज्ञानंद, स्वामी अनंतानंद, स्वामी नारायणानंद, स्वामी प्रणवानंद महाराज ने भी अपने विचार रखे। सत्संग समारोह के समापन पर आरती के साथ प्रसाद वितरण किया गया। चंद्रप्रकाश शर्मा, द्विजेंद्र मोहन शर्मा, उमाकांत पचौरी एडवोकेट, राकेश प्रधान, सम्मन सिंह यादव, रामौतार, राजेश गुप्ता, मातादीन, संजय, महेश यादव, विद्याराम, सर्वेश दीक्षित, अनुग्रह गोपाल अग्रवाल, राधेश्याम, लल्ला चौधरी आदि मौजूद रहे।
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