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UP: प्रधानों का कार्यकाल बढ़ा, लेकिन अधिकारों पर असमंजस; 690 ग्राम पंचायतों में गाइडलाइन का इंतजार
Wed, 27 May 2026 10:06 AM IST
Dhirendra Singh
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Wed, 27 May 2026 10:06 AM IST
सार
आगरा की 690 ग्राम पंचायतों में प्रधानों का कार्यकाल छह माह के लिए बढ़ा दिया गया है, लेकिन उनके अधिकारों को लेकर स्पष्ट गाइडलाइन जारी नहीं हुई है। इससे प्रधान प्रशासक की भूमिका और नीतिगत फैसलों को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
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आगरा कलेक्ट्रेट
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
प्रधानों का कार्यकाल मंगलवार को छह माह के लिए बढ़ गया, लेकिन प्रधानों को अभी तक कोई स्पष्ट गाइड लाइन नहीं दी गई है। ऐसे में वह नीतिगत और सामान्य कार्यों की गाइड लाइन मिलने का इंतजार कर रहे हैं।
जिले में 690 ग्राम पंचायतें हैं। 26 मई को इनका पांच साल का कार्यकाल पूर्ण हो गया। शासन ने छह माह के लिए प्रधानों को प्रशासक नियुक्त किया है। प्रधान संघ के ब्लाक अध्यक्ष व विप्रावली के प्रधान देवानंद परिहार ने बताया कि प्रशासक बना दिया गया है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि उनके कार्य क्या होंगे। शासनादेश में दो बातें कही गई, जिनमें वह सामान्य कार्य करते रहेंगे।
दूसरा नीतिगत फैसले लेने का अधिकार नहीं होगा। अब नीतिगत कार्यों में कौन-कौन से कार्य आते हैं। शासन और प्रशासन को यह भी स्पष्ट करना चाहिए। कुकथला के प्रधान पवन कुमार भी प्रशासक की भूमिका व अधिकारों को लेकर असमंजस में दिखे। इस संबंध में जिला पंचायत राज अधिकारी मनीष कुमार का कहना है कि सामान्य कार्य प्रशासक के रूप में प्रधान को कराने की अनुमति होगी, लेकिन नीतिगत निर्णय के लिए अनुमति उन्हें पंचायती राज विभाग के माध्यम से जिलाधिकारी ही देंगे। सामान्य और नीतिगत कार्यों के वर्गीकरण को लेकर जो शासन से निर्देश मांगे गए हैं।
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जिले में 690 ग्राम पंचायतें हैं। 26 मई को इनका पांच साल का कार्यकाल पूर्ण हो गया। शासन ने छह माह के लिए प्रधानों को प्रशासक नियुक्त किया है। प्रधान संघ के ब्लाक अध्यक्ष व विप्रावली के प्रधान देवानंद परिहार ने बताया कि प्रशासक बना दिया गया है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि उनके कार्य क्या होंगे। शासनादेश में दो बातें कही गई, जिनमें वह सामान्य कार्य करते रहेंगे।
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दूसरा नीतिगत फैसले लेने का अधिकार नहीं होगा। अब नीतिगत कार्यों में कौन-कौन से कार्य आते हैं। शासन और प्रशासन को यह भी स्पष्ट करना चाहिए। कुकथला के प्रधान पवन कुमार भी प्रशासक की भूमिका व अधिकारों को लेकर असमंजस में दिखे। इस संबंध में जिला पंचायत राज अधिकारी मनीष कुमार का कहना है कि सामान्य कार्य प्रशासक के रूप में प्रधान को कराने की अनुमति होगी, लेकिन नीतिगत निर्णय के लिए अनुमति उन्हें पंचायती राज विभाग के माध्यम से जिलाधिकारी ही देंगे। सामान्य और नीतिगत कार्यों के वर्गीकरण को लेकर जो शासन से निर्देश मांगे गए हैं।
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