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सपा नेताओं ने एक-दूसरे को कहे जातिसूचक शब्द
सपा नेताओं ने एक-दूसरे को कहे जातिसूचक शब्द
Updated Tue, 31 Jan 2017 10:42 PM IST
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केंद्रीय संचालन समिति की बैठक में केंद्रीय चुनाव संचालन समिति की बैठक में सपा नेताओं ने एक-दूसरे के खिलाफ जमकर जातिसूचक शब्द प्रयोग किए। इसको लेकर दो गुटों में जमकर हंगामा हो गया। मौके पर मौजूद जिलाध्यक्ष रामसहाय यादव और महानगर अध्यक्ष रईसउद्दीन ने झगड़ा शांत कराया।
विधानसभा चुनाव और तीन फरवरी को मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की प्रस्तावित सभा की तैयारियों के लिए सपा ने अपनी केंद्रीय चुनाव संचालन समिति की बैठक फतेहाबाद रोड स्थित पार्टी कार्यालय पर बुलाई थी। सुबह लगभग दस बजे समिति के सदस्यों के अलावा वरिष्ठ नेता भी मौजूद थे। मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव विवाद के बाद अंदर ही अंदर दो फाड़ चुके कुछ वरिष्ठ नेताओं ने अखिलेश गुट के स्थानीय नेता पर जाति सूचक शब्द के साथ तंज कस दिया। यह अखिलेश गुट के दूसरे कार्यकर्ता को नागंवार गुजरी। उसने भी जातिसूचक शब्दों का प्रयोग शुरू कर दिया। इस पर दोनों के बीच हंगामा बढ़ गया। दोनों के समर्थकों ने भी आस्तीन चढ़ा लीं। जिला और महानगर अध्यक्ष ने दोनों को समझाबुझा कर मामला शांत कराया। इस हंगामे की वजह से न तो चुनावी तैयारियों पर चर्चा हो सकी और न सभा की।
इनसेट
संगठन प्रभारी के खिलाफ खोला मोर्चा
सपा में उच्च स्तर पर विवाद भले ही हल्का पड़ गया हो लेकिन स्थानीय स्तर पर नेता दो फाड़ हो गए हैं। ताजा मामला संगठन प्रभारी को लेकर छिड़ गया है। सोमवार को सपा कार्यालय पर हुई बैठक में संगठन प्रभारी विपुल पुरोहित की नियुक्ति पर सवाल खड़े किए गए। इस संबंध में जिलाध्यक्ष रामसहाय यादव और महानगर अध्यक्ष रईसउद्दीन द्वारा संयुक्त रूप से जारी विज्ञप्ति में कहा गया कि एमएलसी राजपाल कश्यप प्रभारी व दिग्विजय सिंह देव को सह प्रभारी नियुक्त किया गया है। इनके अलावा महानगर और जिले का और कोई प्रभारी नहीं है। इधर, विपुल पुरोहित का कहना है कि राजपाल कश्यप को चुनाव प्रभारी बनाया गया है, जबकि वह संगठन प्रभारी हैं। इनके पास इसका नियुक्ति पत्र भी है।
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विधानसभा चुनाव और तीन फरवरी को मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की प्रस्तावित सभा की तैयारियों के लिए सपा ने अपनी केंद्रीय चुनाव संचालन समिति की बैठक फतेहाबाद रोड स्थित पार्टी कार्यालय पर बुलाई थी। सुबह लगभग दस बजे समिति के सदस्यों के अलावा वरिष्ठ नेता भी मौजूद थे। मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव विवाद के बाद अंदर ही अंदर दो फाड़ चुके कुछ वरिष्ठ नेताओं ने अखिलेश गुट के स्थानीय नेता पर जाति सूचक शब्द के साथ तंज कस दिया। यह अखिलेश गुट के दूसरे कार्यकर्ता को नागंवार गुजरी। उसने भी जातिसूचक शब्दों का प्रयोग शुरू कर दिया। इस पर दोनों के बीच हंगामा बढ़ गया। दोनों के समर्थकों ने भी आस्तीन चढ़ा लीं। जिला और महानगर अध्यक्ष ने दोनों को समझाबुझा कर मामला शांत कराया। इस हंगामे की वजह से न तो चुनावी तैयारियों पर चर्चा हो सकी और न सभा की।
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संगठन प्रभारी के खिलाफ खोला मोर्चा
सपा में उच्च स्तर पर विवाद भले ही हल्का पड़ गया हो लेकिन स्थानीय स्तर पर नेता दो फाड़ हो गए हैं। ताजा मामला संगठन प्रभारी को लेकर छिड़ गया है। सोमवार को सपा कार्यालय पर हुई बैठक में संगठन प्रभारी विपुल पुरोहित की नियुक्ति पर सवाल खड़े किए गए। इस संबंध में जिलाध्यक्ष रामसहाय यादव और महानगर अध्यक्ष रईसउद्दीन द्वारा संयुक्त रूप से जारी विज्ञप्ति में कहा गया कि एमएलसी राजपाल कश्यप प्रभारी व दिग्विजय सिंह देव को सह प्रभारी नियुक्त किया गया है। इनके अलावा महानगर और जिले का और कोई प्रभारी नहीं है। इधर, विपुल पुरोहित का कहना है कि राजपाल कश्यप को चुनाव प्रभारी बनाया गया है, जबकि वह संगठन प्रभारी हैं। इनके पास इसका नियुक्ति पत्र भी है।
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