Russia Ukraine War: यूक्रेन में फंसा बाह के किसान का इकलौता बेटा पहुंचा घर, बयां की दहशत की दास्तां
पिनाहट ब्लॉक के गांव राटौटी निवासी किसान का इकलौता बेटा यूक्रेन की बुकोविनिन स्टेट मेडिकल यूनिवर्सिटी से एमबीबीएस कर रहा है। बुधवार सुबह जब बेटा घर पहुंचा तो परिवार के लोग भावुक हो गए। इस दौरान उसने यूक्रेन के हालात के बारे में बताया।
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पिनाहट ब्लॉक के गांव राटौटी निवासी बृज मोहन परमार पेशे से किसान हैं। उनका 25 वर्षीय इकलौता बेटा अरविंद कुमार परमार वर्ष 2017 में एमबीबीएस की पढ़ाई के लिए यूक्रेन गया था। यूक्रेन के बुकोविनिन स्टेट मेडिकल यूनिवर्सिटी से वह एमबीबीएस कर रहा था। बृजमोहन ने बताया कि एमबीबीएस का पांचवां वर्ष है। इस बीच यूक्रेन में बिगड़े हालातों में वह फंस गया।
परिजनों ने बांटी मिठाई
मंगलवार दोपहर करीब 12 बजे अरविंद रोमानिया शहर से फ्लाइट के द्वारा दिल्ली के लिए बैठा और रात में करीब 11 बजे दिल्ली एयरपोर्ट पर पहुंच गया। वहां से निजी वाहन द्वारा अपने पैतृक गांव बाह पहुंचा। अरविंद के घर पहुंचने पर परिजनों ने खुशी व्यक्त करते हुए मोहल्ले में मिठाई बांटी।समस्याओं से जूझ रहे भारतीय छात्र
अरविंद कुमार ने बताया कि यूक्रेन में कई भारतीय छात्र अत्यंत कठिनाई में हैं। उसने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से वहां फंसे छात्रों को निकालने की गुहार लगाई। अरविंद ने बताया कि यूक्रेन में बम धमाकों से काफी दहशत है। बाजार पूरी तरह बंद हैं। रूस की ओर से अटैक जारी है।
शमशाबाद में भी खुशी की लहर
शमशाबाद के गांव रंजीतपुरा निवासी आनंद भी यूक्रेन की दहशत से निकलकर सकुशल अपने घर पहुंच गए हैं। आनंद यूक्रेन के टेरणोपिल शहर में नेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी से मेडिकल की पढ़ाई कर रहे हैं। रूस का यूक्रेन पर हमला होने के बाद आनंद ने रोमानिया बॉर्डर के लिए टैक्सी पकड़ी। टैक्सी ने उन्हें 10 से 12 किलोमीटर पहले ही छोड़ दिया, जिसके बाद पैदल यात्रा करते हुए आनंद बॉर्डर पर पहुंचे, जहां काफी भीड़ थी।
उन्होंने बताया कि दो घंटे लाइन में लगने के बाद वह जैसे-तैसे फाटक के करीब पहुंचे। सीमा पार करने के बाद वह रोमानिया में दूतावास पहुंचे। वहां रास्ते में कई जगह खाने-पीने की व्यवस्थाएं थीं, जो निशुल्क चल रही थीं। आनंद सिकरवार ने बताया यूक्रेन में एक रात बंकर में गुजारी, जो काफी डरावनी थी। धमाके हो रहे थे। रात को सो नहीं सके। रोमानिया पहुंचते ही डर निकल गया। बस यही लग रहा था कि जल्दी से जल्दी अपने घर पहुंचें।