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यमुना नदी मिलेगी 'संजीवनी', नगला पैमा में बनेगा रबर डैम
Wed, 05 Jun 2019 05:46 PM IST
Abhishek Saxena
राजीव शर्मा, अमर उजाला, आगरा
राजीव शर्मा, अमर उजाला, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Wed, 05 Jun 2019 05:46 PM IST
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यमुना नदी
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यमुना पर बैराज का प्रस्ताव खारिज होने के बाद शासन से रबर डैम के प्रस्ताव को मंजूरी मिल गई है। यह 434 करोड़ रुपये की लागत से ताजमहल से डेढ़ किमी आगे नगला पैमा में ही बनेगा। बैराज भी यहीं प्रस्तावित था।
शासन ने मई के आखिर में रबर डैम योजना की डीपीआर (डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट) को स्वीकृति दे दी थी। इसके अनुसार, ताजगंज स्थित नगला पैमा में यमुना पर 385 मीटर लंबा डैम बनेगा। इसके लिए 70 मीटर का कंकरीट का फ्लोर तैयार किया जाएगा। इस पर बड़े-बड़े आठ बलून लगाए जाएंगे।
इससे नदी में 146 मीटर तक पानी का स्तर रखा जा सकेगा। दो बलून नेवीगेशन के होंगे, इनकी मदद से रबर डैम के दूसरी तरफ पानी छोड़ा जा सकेगा। रबर डैम बनाने का काम देश में कम ही कंपनियां करती हैं, इसलिए इसके लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर टेंडर आमंत्रित किए जाएंगे।
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शासन ने मई के आखिर में रबर डैम योजना की डीपीआर (डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट) को स्वीकृति दे दी थी। इसके अनुसार, ताजगंज स्थित नगला पैमा में यमुना पर 385 मीटर लंबा डैम बनेगा। इसके लिए 70 मीटर का कंकरीट का फ्लोर तैयार किया जाएगा। इस पर बड़े-बड़े आठ बलून लगाए जाएंगे।
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इससे नदी में 146 मीटर तक पानी का स्तर रखा जा सकेगा। दो बलून नेवीगेशन के होंगे, इनकी मदद से रबर डैम के दूसरी तरफ पानी छोड़ा जा सकेगा। रबर डैम बनाने का काम देश में कम ही कंपनियां करती हैं, इसलिए इसके लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर टेंडर आमंत्रित किए जाएंगे।
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रबर डैम के लिए भी ताज ट्रिपेजियम जोन (टीटीजेड) के साथ-साथ पर्यावरण और पुरातत्व विभाग से एनओसी की जरूरत होगी। इसके लिए ताज बैराज खंड के अधिकारियों ने मंगलवार को दिल्ली में दोनों विभागों के अधिकारियों के साथ बैठक की।
ताज बैराज खंड के अधिशासी अभियंता विशाल पोरवाल ने बताया कि दोनों विभागों को योजना की डीपीआर दी गई है। अध्ययन के बाद उनकी टीम अपनी रिपोर्ट देगी। एनओसी जल्द मिलने के आसार हैं।
रबर डैम बनने से ये फायदे होंगे
यमुना नदी बदहाली का शिकार है। पानी के अभाव में इसमें सिल्ट जमा होती जा रही है। बल्केश्वर घाट से ताजमहल से आगे तक इसकी स्थिति काफी खराब है। दरअसल, गोकुल बैराज से सीमित मात्रा में ही पानी छोड़ा जाता है।
यह पूरा पानी बहकर आगे निकल जाता है। रबर डैम बनने से इस पानी को रोका जा सकेगा। नदी का जलस्तर बढ़ेगा। इससे न सिर्फ जीवनी मंडी व सिकंदरा वाटर वर्क्स में पानी की कमी दूर होगी बल्कि नदी के आसपास के क्षेत्र का भूमिगत जलस्तर भी बढ़ेगा। साथ ही शहर में विकराल होती जल संकट की समस्या का समाधान हो सकेगा।
ताज बैराज खंड के अधिशासी अभियंता विशाल पोरवाल ने बताया कि दोनों विभागों को योजना की डीपीआर दी गई है। अध्ययन के बाद उनकी टीम अपनी रिपोर्ट देगी। एनओसी जल्द मिलने के आसार हैं।
रबर डैम बनने से ये फायदे होंगे
यमुना नदी बदहाली का शिकार है। पानी के अभाव में इसमें सिल्ट जमा होती जा रही है। बल्केश्वर घाट से ताजमहल से आगे तक इसकी स्थिति काफी खराब है। दरअसल, गोकुल बैराज से सीमित मात्रा में ही पानी छोड़ा जाता है।
यह पूरा पानी बहकर आगे निकल जाता है। रबर डैम बनने से इस पानी को रोका जा सकेगा। नदी का जलस्तर बढ़ेगा। इससे न सिर्फ जीवनी मंडी व सिकंदरा वाटर वर्क्स में पानी की कमी दूर होगी बल्कि नदी के आसपास के क्षेत्र का भूमिगत जलस्तर भी बढ़ेगा। साथ ही शहर में विकराल होती जल संकट की समस्या का समाधान हो सकेगा।
यमुना में जलस्तर के बढ़ने से ताजमहल के पार्श्व का नजारा खूबसूरत होगा। स्मारक के पीछे रिवर फ्रंट भी विकसित करने की योजना है। इसके तहत यहां नौकायन भी होगा।
इससे पर्यटन को आकर्षित करने के लिए शहर में एक और स्थान होगा। बता दें कि लगभग 15 हजार पर्यटक प्रतिदिन ताजमहल देखने आते हैं। इसमें से लगभग 15 से 20 फीसदी ताज के पीछे दशहरा घाट पर भी पहुंचते हैं।
ताज बैराज खंड के अधिशासी अभियंता विशाल पोरवाल ने बताया कि रबर डैम योजना को मंजूरी मिली गई है। ताज बैराज का प्रस्ताव खारिज कर दिया गया है। विभिन्नि विभागों से एनओसी लेने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।
इससे पर्यटन को आकर्षित करने के लिए शहर में एक और स्थान होगा। बता दें कि लगभग 15 हजार पर्यटक प्रतिदिन ताजमहल देखने आते हैं। इसमें से लगभग 15 से 20 फीसदी ताज के पीछे दशहरा घाट पर भी पहुंचते हैं।
ताज बैराज खंड के अधिशासी अभियंता विशाल पोरवाल ने बताया कि रबर डैम योजना को मंजूरी मिली गई है। ताज बैराज का प्रस्ताव खारिज कर दिया गया है। विभिन्नि विभागों से एनओसी लेने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।