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वृंदावन में संतों से मिले संघ प्रमुख मोहन भागवत, हिंदू समाज को संगठित करने पर चर्चा
Tue, 30 Jul 2019 12:11 AM IST
मुकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वृंदावन (मथुरा)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वृंदावन (मथुरा)
Published by: मुकेश कुमार
Updated Tue, 30 Jul 2019 12:11 AM IST
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रमण रेती आश्रम में संतों के साथ मोहन भागवत
- फोटो : अमर उजाला
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वृंदावन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की दो दिवसीय सामाजिक सद्भाव बैठक के बाद मोहन भागवत ने सोमवार को संतों ने मुलाकात की। संघ प्रमुख ने जातियों में बंटे हिंदु समाज को एकजुट करने को लेकर संत समाज से चर्चा की। इसके बाद वो टिकारी घाट स्थित मंदिर में संत हंस देवरहा बाबा से भी मिलने पहुंचे।
जातियों में बंटे हिंदू समाज को एकजुट करने के लिए संघ ने वृंदावन के वात्सल्य ग्राम में बैठक कर गहन चिंतन और मंथन किया। दो दिन चली इस बैठक में संघ प्रमुख मोहन भागवत सर सह कार्यवाह भैया जी जोशी, दतात्रेय होसबोले, कृष्णगोपाल, सुरेश सोनी और सामाजिक सद्भाव प्रमुख अशोक बेरी मौजूद रहे।
सोमवार की सुबह संघ प्रमुख मोहन भागवत रमणरेती आश्रम में पहुंचे थे। संत समाज से मिलकर मोहन भागवत ने हिंदु समाज को संगठित करने के लिए मदद मांगी। इसके बाद संघ प्रमुख ने संतों के साथ प्रसाद ग्रहण किया। इस दौरान गीता मनीषी महामंडलेश्वर संत ज्ञानानंद, गुरु शरणानंद सहित कई संतों मौजूद थे।
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जातियों में बंटे हिंदू समाज को एकजुट करने के लिए संघ ने वृंदावन के वात्सल्य ग्राम में बैठक कर गहन चिंतन और मंथन किया। दो दिन चली इस बैठक में संघ प्रमुख मोहन भागवत सर सह कार्यवाह भैया जी जोशी, दतात्रेय होसबोले, कृष्णगोपाल, सुरेश सोनी और सामाजिक सद्भाव प्रमुख अशोक बेरी मौजूद रहे।
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सोमवार की सुबह संघ प्रमुख मोहन भागवत रमणरेती आश्रम में पहुंचे थे। संत समाज से मिलकर मोहन भागवत ने हिंदु समाज को संगठित करने के लिए मदद मांगी। इसके बाद संघ प्रमुख ने संतों के साथ प्रसाद ग्रहण किया। इस दौरान गीता मनीषी महामंडलेश्वर संत ज्ञानानंद, गुरु शरणानंद सहित कई संतों मौजूद थे।
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संतों से मुलाकात करते मोहन भागवत
- फोटो : अमर उजाला
इससे पूर्व रविवार हुई बैठक में संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि आज समाज में जितनी भी बिरादरियां हैं सभी ने अपने संगठन बना रखे हैं। हमारा मकसद उन तक पहुंचना होना चाहिए। उनके भीतर राष्ट्रवाद का भाव पैदा किया जाए। जगह-जगह कार्यक्रम कराकर लोगों को समझाया जाए कि वह पहले हिंदू हैं और बाकी सब उसके बाद।
भागवत ने कहा कि हमें हर वर्ग में अपने संबंध बनाने हैं। संबंध इस तरह के बनाए जाएं कि वह लोगों के घरों पर जाकर भोजन करें। उनके दुख दर्द में शामिल हों। समाज में जो भी कुरीतियां हैं उन्हें दूर किया जाए। समाज को संगठित करने के लिए सभी मिल-जुलकर काम करें। एक ऐसा समाज तैयार किया जाए जिसमें राष्ट्रवाद का भाव कूट-कूटकर भरा हो।
भागवत ने कहा कि हमें हर वर्ग में अपने संबंध बनाने हैं। संबंध इस तरह के बनाए जाएं कि वह लोगों के घरों पर जाकर भोजन करें। उनके दुख दर्द में शामिल हों। समाज में जो भी कुरीतियां हैं उन्हें दूर किया जाए। समाज को संगठित करने के लिए सभी मिल-जुलकर काम करें। एक ऐसा समाज तैयार किया जाए जिसमें राष्ट्रवाद का भाव कूट-कूटकर भरा हो।