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Agra: यमुना महाआरती स्थल पर विवाद बढ़ा, बसपा ने लगाया पैसे की बर्बादी का आरोप; जानें पूरा मामला
Tue, 24 Feb 2026 09:54 AM IST
धीरेन्द्र सिंह
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Tue, 24 Feb 2026 09:54 AM IST
सार
यमुना व्यू प्वाइंट पर महाआरती आयोजन को लेकर बसपा पार्षदों ने लाखों रुपये खर्च करने पर सवाल उठाते हुए इसे पैसे की बर्बादी बताया है। वहीं महापौर ने संबंधित विभागों से एनओसी लेने के निर्देश दिए हैं
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आगरा यमुना
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विस्तार
यमुना व्यू प्वाइंट स्थित यमुना महा आरती स्थल को लेकर विवाद अब तूल पकड़ने लगा है। अधिवक्ता के मंडलायुक्त से शिकायत के बाद बहुजन समाज पार्टी के पार्षदों ने अस्थायी आरती स्थल के लिए लाखों रुपये खर्च करने पर सवाल उठाए हैं। बसपा पार्षद दल के नेता कप्तान सिंह ने इसे पैसे की बर्बादी बताया है। कहा कि शहर में जगह-जगह विकास कार्य पैसों की कमी की वजह से नहीं हो पा रहे और निगम प्रशासन नदी की जमीन पर अस्थायी विकास के लिए लाखों रुपये खर्च कर रहा है। कहा कि इस विषय को सदन में उठाया जाएगा।
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वहीं, महापौर हेमलता दिवाकर की ओर से एक चिट्ठी नगर आयुक्त को भेजी गई है। इसमें उन्हें सभी संबंधित विभागों से जरूरी एनओसी प्राप्त करने के लिए कहा गया है। खास बात यह है कि इस चिट्ठी में इस बात का भी जिक्र किया गया है कि यमुना की तलहटी में कराए जा रहे कार्यक्रम के संबंध में पूर्व में एनजीटी कई आदेश-निर्देश दे चुका है।
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ऐसे में महापौर ने अधिकारियों को हर हाल में अनुमति लेने के बाद ही कार्यक्रम आगे आयोजित करने के निर्देश दिए हैं। उधर इस प्रकरण की मंडलायुक्त से शिकायत करने वाले अधिवक्ता अपूर्व शर्मा ने अब एनजीटी में शिकायत करने की तैयारी कर ली है। शर्मा ने बताया कि वह बुधवार को एनजीटी में नगर निगम के खिलाफ याचिका दायर करेंगे।
पिछले साल भी तूल पकड़ा था यमुना आरती स्थल विवाद का मुद्दा
बता दें, पिछले साल भी यमुना आरती स्थल को लेकर हुए विवाद के बाद मामला नगर निगम के सदन में उछला था। इसके बाद सितंबर में हुए सदन के दौरान यह फैसला लिया गया था कि आरती स्थल के रूप में हाथी घाट को ही चुना जाएगा और वहां पर ही महाआरती के कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। हालांकि इस फैसले को कभी भी मिनट्स से आगे नहीं आने दिया गया। अब सदन की अवमानना के बाद यह मामला फिर से सियासी मुद्दा बन गया है।
बता दें, पिछले साल भी यमुना आरती स्थल को लेकर हुए विवाद के बाद मामला नगर निगम के सदन में उछला था। इसके बाद सितंबर में हुए सदन के दौरान यह फैसला लिया गया था कि आरती स्थल के रूप में हाथी घाट को ही चुना जाएगा और वहां पर ही महाआरती के कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। हालांकि इस फैसले को कभी भी मिनट्स से आगे नहीं आने दिया गया। अब सदन की अवमानना के बाद यह मामला फिर से सियासी मुद्दा बन गया है।