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फोरमैन चला रहा वृंदावन का रोडवेज बस स्टैंड
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मथुरा। वृंदावन के बस स्टैंड पर पसरा सन्नाटा और बंद पड़ी एलईडी टीवी।
- फोटो : VRINDAVAN
वृंदावन (मथुरा)। धर्म की नगरी को मॉडल नगरी बनाने का सपना संजोए बैठी प्रदेश की योगी आदित्यनाथ की सरकार ब्रज के हृदय स्थल वृंदावन आने वाले श्रद्धालुओं को आवागमन की सुविधा तक नहीं दे रही है। करोड़ों की लागत से बना वृंदावन रोडवेज बस स्टैंड सफेद हाथी साबित हो रहा है। बस स्टैंड का संचालन सिर्फ एक फोरमैन कौशल किशोर द्वारा किया जा रहा है। जिसके चलते बस स्टैंड की न तो देखरेख हो पा रही है और ना ही देश विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को कोई सुविधा ही मिल पा रही है। मंदिरों की नगरी से श्रद्धालु आवागमन की सरकारी सुविधा से वंचित हैं।
वृंदावन में प्रतिदिन करीब 30 हजार श्रद्धालुओं का आवागमन होता है। शनिवार और रविवार को तो यह संख्या कई लाख तक पहुंच जाती है। इनमें से मात्र 20 प्रतिशत लोग ही निजी संसाधनों से आते हैं। बाकी श्रद्धालु सरकार द्वारा दिए जा रहे साधनों को ध्यान में रखते हुए आते हैं लेकिन वृंदावन पहुंचने पर उन्हें निराशा हाथ लगती है।
यहां पर करोड़ों रुपये की लागत से बने वृंदावन रोडवेज बस स्टैंड पर सन्नाटा पसरा रहता है। मात्र एक फोरमैन द्वारा ही पूरे बस स्टैंड का संचालन किया जाता है। उसके द्वारा ही बुकिंग की जाती है, टिकट दी जाती है, चालक और बसों के आवागमन का रिकॉर्ड रखा जाता है तथा बस स्टैंड का रखरखाव की जिम्मेदारी भी इसी एक मात्र कर्मचारी की है।
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पांच काउंटर मेें से चार बंद
जब इस बस स्टैंड का निर्माण कराया गया था तो उस समय बस स्टैंड के विस्तारीकरण की योजना थी। जिसके चलते इसे दो मंजिला बनाकर विराट स्वरूप देने की योजना थी। इसको ध्यान में रखते हुए बस स्टैंड पर पांच काउंटर तैयार कराए गए थे। आज इनमें से चार काउंटर बंद पड़े हैं तो एक काउंटर पर फोरमैन बैठकर टिकट देता नजर आता है।
केवल दिन में जाती हैं सिर्फ आठ रोडवेज बसें
कभी वृंदावन के लिए करीब दस जेनर्म बसें (जवाहरलाल नेहरू नेशनल अर्बन रिन्यूवल मिशन) चलती थीं, जिससे स्थानीय लोगों को काफी सुविधा मिलती थी और वह मात्र 10-11 रुपये में बस स्टैंड से मथुरा जंक्शन तक चले जाते थे। वर्तमान में जेनर्म बस वृंदावन के लिए नहीं चल रही है। चार-पांच जेनर्म बसें चल रही हैं वह वाया वृंदावन होकर नौहझील, मांट आदि क्षेत्रों तक जाती हैं। इनका भी कोई समय तय नहीं हैं। रोडवेज बस स्टैंड से पूरे दिन में बमुश्किल आठ बसें ही चल पाती हैं। यह बसें हिसार, उदयपुर, अजमेर, गोरखपुर, अलीगढ़, नोएडा तथा हरिद्वार तथा ब्रज दर्शन हैं।
पसरा रहता है सन्नाटा, पीने के पानी का भी अभाव
न कोई यात्री न कोई बस दिनभर सन्नाटा। यदि कोई यात्री आ भी जाए तो पीने के पानी के लिए भी तरस जाए। जो पानी रोडवेज बस स्टैंड की टोंटियों से निकल रहा है वह पीने योग्य नहीं हैं। बस स्टैंड के नुक्कड़ पर लगी प्याऊ बंद पड़ी रहती है।
बयान
सीओ से सिफारिश करके कराना पड़ता है बसों का प्रवेश
वृंदावन में अधिक बसें चलनी चाहिए लेकिन जेनर्म बसें बंद कर दी गई हैं। जिसके चलते आठ-दस बसें ही वृंदावन बस स्टैंड से ऑपरेट हो पाती हैं। इनको भी वृंदावन में प्रवेश कराने के लिए पुलिस क्षेत्राधिकारी (सीओ) से सिफारिश करनी पड़ती है। आए दिन होने वाले मेला आदि मेें पुलिस द्वारा रोडवेज बसों का प्रवेश तक भी बंद कर दिया जाता है। इसके चलते सीओ आदि की सिफारिश करके ही बसें स्टैंड तक जा पाती हैं। फिलहाल हमने वृंदावन में सिर्फ एक कर्मचारी को नियुक्त कर रखा है। एक और कर्मचारी था उसे अभी मथुरा बुला लिया है।
- वीके शुक्ला, एआरएम मथुरा
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वृंदावन में प्रतिदिन करीब 30 हजार श्रद्धालुओं का आवागमन होता है। शनिवार और रविवार को तो यह संख्या कई लाख तक पहुंच जाती है। इनमें से मात्र 20 प्रतिशत लोग ही निजी संसाधनों से आते हैं। बाकी श्रद्धालु सरकार द्वारा दिए जा रहे साधनों को ध्यान में रखते हुए आते हैं लेकिन वृंदावन पहुंचने पर उन्हें निराशा हाथ लगती है।
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यहां पर करोड़ों रुपये की लागत से बने वृंदावन रोडवेज बस स्टैंड पर सन्नाटा पसरा रहता है। मात्र एक फोरमैन द्वारा ही पूरे बस स्टैंड का संचालन किया जाता है। उसके द्वारा ही बुकिंग की जाती है, टिकट दी जाती है, चालक और बसों के आवागमन का रिकॉर्ड रखा जाता है तथा बस स्टैंड का रखरखाव की जिम्मेदारी भी इसी एक मात्र कर्मचारी की है।
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पांच काउंटर मेें से चार बंद
जब इस बस स्टैंड का निर्माण कराया गया था तो उस समय बस स्टैंड के विस्तारीकरण की योजना थी। जिसके चलते इसे दो मंजिला बनाकर विराट स्वरूप देने की योजना थी। इसको ध्यान में रखते हुए बस स्टैंड पर पांच काउंटर तैयार कराए गए थे। आज इनमें से चार काउंटर बंद पड़े हैं तो एक काउंटर पर फोरमैन बैठकर टिकट देता नजर आता है।
केवल दिन में जाती हैं सिर्फ आठ रोडवेज बसें
कभी वृंदावन के लिए करीब दस जेनर्म बसें (जवाहरलाल नेहरू नेशनल अर्बन रिन्यूवल मिशन) चलती थीं, जिससे स्थानीय लोगों को काफी सुविधा मिलती थी और वह मात्र 10-11 रुपये में बस स्टैंड से मथुरा जंक्शन तक चले जाते थे। वर्तमान में जेनर्म बस वृंदावन के लिए नहीं चल रही है। चार-पांच जेनर्म बसें चल रही हैं वह वाया वृंदावन होकर नौहझील, मांट आदि क्षेत्रों तक जाती हैं। इनका भी कोई समय तय नहीं हैं। रोडवेज बस स्टैंड से पूरे दिन में बमुश्किल आठ बसें ही चल पाती हैं। यह बसें हिसार, उदयपुर, अजमेर, गोरखपुर, अलीगढ़, नोएडा तथा हरिद्वार तथा ब्रज दर्शन हैं।
पसरा रहता है सन्नाटा, पीने के पानी का भी अभाव
न कोई यात्री न कोई बस दिनभर सन्नाटा। यदि कोई यात्री आ भी जाए तो पीने के पानी के लिए भी तरस जाए। जो पानी रोडवेज बस स्टैंड की टोंटियों से निकल रहा है वह पीने योग्य नहीं हैं। बस स्टैंड के नुक्कड़ पर लगी प्याऊ बंद पड़ी रहती है।
बयान
सीओ से सिफारिश करके कराना पड़ता है बसों का प्रवेश
वृंदावन में अधिक बसें चलनी चाहिए लेकिन जेनर्म बसें बंद कर दी गई हैं। जिसके चलते आठ-दस बसें ही वृंदावन बस स्टैंड से ऑपरेट हो पाती हैं। इनको भी वृंदावन में प्रवेश कराने के लिए पुलिस क्षेत्राधिकारी (सीओ) से सिफारिश करनी पड़ती है। आए दिन होने वाले मेला आदि मेें पुलिस द्वारा रोडवेज बसों का प्रवेश तक भी बंद कर दिया जाता है। इसके चलते सीओ आदि की सिफारिश करके ही बसें स्टैंड तक जा पाती हैं। फिलहाल हमने वृंदावन में सिर्फ एक कर्मचारी को नियुक्त कर रखा है। एक और कर्मचारी था उसे अभी मथुरा बुला लिया है।
- वीके शुक्ला, एआरएम मथुरा