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कमाई 64 करोड़, मगर सड़कें खस्ताहाल
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 10 Apr 2016 02:08 AM IST
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सड़क
- फोटो : amar ujala
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ताजमहल पर टिकट से कमाई करोड़ों की है लेकिन पर्यटकों की सहूलियत के संसाधनों में कोई सुधार नहीं हुआ है। खस्ताहाल सड़कों से गुजरकर ताज तक पहुंचने वालों की मुश्किल तब और बढ़ जाती है, जब परिसर में वॉशरूम, टॉयलेट और बेंच जैसी बुनियादी संसाधनों का टोटा दिखाई पड़ता है। इस धरोहर से होने वाली कमाई परिसर में संसाधन बढ़ाने पर खर्च होने के बजाय खामोशी से अफसरों की सुविधाओं पर खर्च हो जाती है।
पिछले साल यहां सात लाख विदेशी और 60 लाख भारतीय पर्यटक आए। इस हिसाब से देखें तो एएसआई-एडीए को टिकट से 64 करोड़ रुपये की आय हुई। ताज के टिकट पर वसूले जा रहे पथकर को खर्च करने के लिए कमिश्नर की अध्यक्षता में बाकायदा एक कमेटी बनी हुई है। डीएम, नगर आयुक्त, एएसआई के अधीक्षण पुरातत्वविद, एडीए के उपाध्यक्ष और होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष इसके सदस्य हैं। कमेटी पर्यटन सुविधाओं व सड़क-बिजली पर 40 फीसदी, पर्यावरण सुधार व सफाई पर 20 फीसदी, पर्यटन के इन्फ्रास्ट्रक्चर पर 15 फीसदी, टूरिस्ट पुलिस पर 10 फीसदी और पर्यटकों की सुविधा पर 15 फीसदी खर्च कर सकती है।
हालांकि वास्तविकता इसके उलट है। यह रकम अपेक्षाकृत गैरजरूरी सुविधाओं पर खर्च की गई है। जिला प्रशासन ने दो इनोवा व दो बोलेरो गाड़ियां खरीदने पर 45 लाख रुपये खर्च किए हैं। एएसआई अधिकारी के लिए टोयोटा इटियोस कार के लिए 8.67 लाख, दो स्कॉर्पियो के लिए 48.87 लाख, एडीएम (प्रोटोकॉल) आफिस के लिए लैपटॉप, कंप्यूटर, प्रिंटर, फोटोकापी मशीन पर 2 लाख रुपये खर्च किए गए। यही नहीं डिप्टी एसपी के आफिस की रंगाई-पुताई पर भी 5.92 लाख रुपये खर्च किए गए हैं। कमिश्नर प्रदीप भटनागर का कहना है कि पथकर के इस्तेमाल से पर्यटन सुविधाओं में लगातार इजाफा हो रहा है। किसी तरह के खर्च को लेकर जो भी प्रस्ताव आते हैं, उन पर सभी सदस्य चर्चा करते हैं।
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196 करोड़ खर्च फिर भी हालात बदतर
ताजमहल के 500 मीटर के दायरे में इलाके की सूरत बदलने के लिए 196 करोड़ रुपये का ताजगंज प्रोजेक्ट चल रहा है लेकिन छह महीने से इसका काम बंद है। छह महीने पहले ही ताजगंज की सड़कों को केबल डालने के लिए खोदा गया था। बाद में इसे मरम्मत के बिना ही छोड़ दिया गया। आए दिन पर्यटक इन सड़कों पर गिरकर घायल हो जाते हैं।
‘पथकर का पैसा सड़कों पर खर्च नहीं हो रहा है। अधिकारी मनमाने तरीके से पथकर की रकम को खर्च करते हैं।’
- राकेश चौहान (सदस्य, पथकर सलाहकार समिति)
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पिछले साल यहां सात लाख विदेशी और 60 लाख भारतीय पर्यटक आए। इस हिसाब से देखें तो एएसआई-एडीए को टिकट से 64 करोड़ रुपये की आय हुई। ताज के टिकट पर वसूले जा रहे पथकर को खर्च करने के लिए कमिश्नर की अध्यक्षता में बाकायदा एक कमेटी बनी हुई है। डीएम, नगर आयुक्त, एएसआई के अधीक्षण पुरातत्वविद, एडीए के उपाध्यक्ष और होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष इसके सदस्य हैं। कमेटी पर्यटन सुविधाओं व सड़क-बिजली पर 40 फीसदी, पर्यावरण सुधार व सफाई पर 20 फीसदी, पर्यटन के इन्फ्रास्ट्रक्चर पर 15 फीसदी, टूरिस्ट पुलिस पर 10 फीसदी और पर्यटकों की सुविधा पर 15 फीसदी खर्च कर सकती है।
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हालांकि वास्तविकता इसके उलट है। यह रकम अपेक्षाकृत गैरजरूरी सुविधाओं पर खर्च की गई है। जिला प्रशासन ने दो इनोवा व दो बोलेरो गाड़ियां खरीदने पर 45 लाख रुपये खर्च किए हैं। एएसआई अधिकारी के लिए टोयोटा इटियोस कार के लिए 8.67 लाख, दो स्कॉर्पियो के लिए 48.87 लाख, एडीएम (प्रोटोकॉल) आफिस के लिए लैपटॉप, कंप्यूटर, प्रिंटर, फोटोकापी मशीन पर 2 लाख रुपये खर्च किए गए। यही नहीं डिप्टी एसपी के आफिस की रंगाई-पुताई पर भी 5.92 लाख रुपये खर्च किए गए हैं। कमिश्नर प्रदीप भटनागर का कहना है कि पथकर के इस्तेमाल से पर्यटन सुविधाओं में लगातार इजाफा हो रहा है। किसी तरह के खर्च को लेकर जो भी प्रस्ताव आते हैं, उन पर सभी सदस्य चर्चा करते हैं।
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196 करोड़ खर्च फिर भी हालात बदतर
ताजमहल के 500 मीटर के दायरे में इलाके की सूरत बदलने के लिए 196 करोड़ रुपये का ताजगंज प्रोजेक्ट चल रहा है लेकिन छह महीने से इसका काम बंद है। छह महीने पहले ही ताजगंज की सड़कों को केबल डालने के लिए खोदा गया था। बाद में इसे मरम्मत के बिना ही छोड़ दिया गया। आए दिन पर्यटक इन सड़कों पर गिरकर घायल हो जाते हैं।
‘पथकर का पैसा सड़कों पर खर्च नहीं हो रहा है। अधिकारी मनमाने तरीके से पथकर की रकम को खर्च करते हैं।’
- राकेश चौहान (सदस्य, पथकर सलाहकार समिति)