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Health: प्रदूषण और कोहरे से अस्थमा मरीजों की हालत बिगड़ी, बच्चों और बुजुर्गों का रखें विशेष ध्यान
Wed, 17 Dec 2025 12:12 PM IST
धीरेन्द्र सिंह
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Wed, 17 Dec 2025 12:12 PM IST
सार
बढ़ते प्रदूषण और घने कोहरे ने लोगों की सेहत पर सीधा असर डालना शुरू कर दिया है। बीते 15 दिनों से लगातार बढ़ रहे प्रदूषण स्तर और पिछले तीन दिनों से छाए कोहरे के कारण हवा और ज्यादा जहरीली हो गई है। इसका सबसे गंभीर असर अस्थमा, टीबी, सीओपीडी और अन्य सांस संबंधी बीमारियों से ग्रस्त मरीजों पर देखने को मिल रहा है।
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एसएन ओपीडी
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विस्तार
एसएन मेडिकल कॉलेज के श्वसन रोग विभाग के अध्यक्ष डॉ. जीवी सिंह ने बताया कि पिछले 15 दिनों में सांस संबंधी बीमारियों के मरीजों की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। सीओपीडी और अस्थमा के मरीजों की संख्या में करीब 50 से 60 की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिनमें से लगभग 10 मरीज अस्थमा अटैक के गंभीर मामलों के हैं। रोजाना 30 से 40 सीओपीडी के मरीज इलाज के लिए आ रहे हैं। जहां रेस्पिरेटरी विभाग की ओपीडी में लगभग 200 के आस-पास मरीज होते थे। वहीं, अब इनकी संख्या 245 से 300 तक पहुंच गई है।
डॉ. जीवी सिंह ने बताया कि मौजूदा हालात में 100 से 150 टीबी के मरीज रोजाना अस्पताल पहुंच रहे हैं। उन्होंने कहा कि ठंड के मौसम में वैसे भी क्रॉनिक ब्रोंकाइटिस और सांस की पुरानी बीमारियों के मरीज बढ़ जाते हैं, क्योंकि सर्दियों में प्रदूषण का स्तर अधिक रहता है। कोहरा प्रदूषक तत्वों को निचली सतह पर रोक लेता है, जिससे हवा और ज्यादा जहरीली हो जाती है और सांस लेने में परेशानी बढ़ जाती है। ऐसे में इन मरीजों के लिए ये हवा जहर से कम नहीं होती है।
बच्चों और बुजुर्गों का रखें विशेष ध्यान
वायु गुणवत्ता पहले से ही काफी खराब श्रेणी में है। ऐसे में सांस संबंधी रोगियों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है। उन्होंने बताया कि जिन मरीजों को पहले से सांस की बीमारी है या जिनकी दवाएं चल रही हैं, वे दवाएं नियमित रूप से लें और इनहेलर का सही तरीके से इस्तेमाल करें। परेशानी बढ़ने पर तुरंत चिकित्सकीय परामर्श लें। वहीं, ऐसे समय बच्चों और बुजुर्गों का खास ध्यान दें। लोग बाहर निकलते समय मास्क का इस्तेमाल जरूर करें, ठंडी और प्रदूषित हवा से बचें और शरीर में पानी की मात्रा अधिक रखें।
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डॉ. जीवी सिंह ने बताया कि मौजूदा हालात में 100 से 150 टीबी के मरीज रोजाना अस्पताल पहुंच रहे हैं। उन्होंने कहा कि ठंड के मौसम में वैसे भी क्रॉनिक ब्रोंकाइटिस और सांस की पुरानी बीमारियों के मरीज बढ़ जाते हैं, क्योंकि सर्दियों में प्रदूषण का स्तर अधिक रहता है। कोहरा प्रदूषक तत्वों को निचली सतह पर रोक लेता है, जिससे हवा और ज्यादा जहरीली हो जाती है और सांस लेने में परेशानी बढ़ जाती है। ऐसे में इन मरीजों के लिए ये हवा जहर से कम नहीं होती है।
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बच्चों और बुजुर्गों का रखें विशेष ध्यान
वायु गुणवत्ता पहले से ही काफी खराब श्रेणी में है। ऐसे में सांस संबंधी रोगियों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है। उन्होंने बताया कि जिन मरीजों को पहले से सांस की बीमारी है या जिनकी दवाएं चल रही हैं, वे दवाएं नियमित रूप से लें और इनहेलर का सही तरीके से इस्तेमाल करें। परेशानी बढ़ने पर तुरंत चिकित्सकीय परामर्श लें। वहीं, ऐसे समय बच्चों और बुजुर्गों का खास ध्यान दें। लोग बाहर निकलते समय मास्क का इस्तेमाल जरूर करें, ठंडी और प्रदूषित हवा से बचें और शरीर में पानी की मात्रा अधिक रखें।
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