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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Agra News ›   riot of Sambhal in 1978 Chief Minister visited twice yet violence did not stop know what happened at that time

UP: 1978 में संभल का वो दंगा...मुख्यमंत्री के हुए दो दौरे, फिर भी नहीं रुकी हिंसा; जानें उस समय क्या-क्या हुआ

Tue, 14 Jan 2025 01:37 PM IST
धीरेन्द्र सिंह संजीव जूरैल, अमर उजाला आर्काइव, आगरा
संजीव जूरैल, अमर उजाला आर्काइव, आगरा Published by: धीरेन्द्र सिंह Updated Tue, 14 Jan 2025 01:37 PM IST
सार

संभल में वर्ष 1978 में हुए दंगे एक बार फिर चर्चा में हैं। उस समय हिंसा की आग इस कदर जली, कि तत्कालीन मुख्यमंत्री रानरेश यादव के दो दौरे हुए, उसके बाद में हालात नहीं संभल सके थे। 

 

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riot of Sambhal in 1978 Chief Minister visited twice yet violence did not stop know what happened at that time
संभल में वर्ष 1978 में हुए दंगे - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

संभल में वर्ष 1978 में हुए दंगे की सरकार ने जिला प्रशासन से रिपोर्ट मांगी है। हिंसा से जुड़े तथ्य खोजे जा रहे हैं। तत्कालीन मुख्यमंत्री रामनेरश यादव ने तब क्षेत्र का दो बार दाैरा किया था, लेकिन उपद्रव नहीं थमा। दंगे में 184 लोगों की जान चली गई थी। क्षेत्र लगभग दो महीने कर्फ्यू की जद में रहा था। 
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अमर उजाला के 1 अप्रैल, 1978 के अंक में प्रकाशित खबर के अनुसार, तत्कालीन मुख्यमंत्री रामनरेश यादव पहली बार दंगे के तीसरे दिन 31 मार्च को संभल पहुंचे। रात में अधिकारियों के साथ दंगाग्रस्त क्षेत्र का दाैरा किया। लोगों से शांति और सौहार्द बनाने की अपील की। अफवाहों पर ध्यान नहीं देने और असामाजिक तत्वों की गतिविधियों से प्रभावित नहीं होने की सलाह दी। अधिकारियों को लोगों के शस्त्र लाइसेंस रद्द कर उनके हथियारों को जमा करने के निर्देश दिए थे। 
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मुख्यमंत्री दौरे के बाद 2 अप्रैल को कर्फ्यू में ढील दी गई तो कस्बे में चाकूबाजी शुरू हो गई। एक व्यक्ति की हत्या कर दी गई। इसके बाद हत्याओं का क्रम जारी रहा और 11 अप्रैल तक यह आंकड़ा 19 पहुंच गया था। जब हिंसा की आग नहीं थमी तो मुख्यमंत्री रामनरेश यादव ने 13 अप्रैल को फिर दाैरा किया। दंगा प्रभावित क्षेत्र में 2 घंटे तक लोगों के बीच रहे। जनता से शांति बनाए रखने और प्रशासन का सहयोग करने की अपील की। मोहल्ला सराय तारिन में उन्होंने सभा संबोधित की।
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 दंगे की शुरुआत गांधी मेमोरियल काॅलेज से हुई। जहां छात्रसंघ की ओर से होली पर परिहासात्मक पर्चा प्रकाशित हुआ। जिसमें दो लड़कियों के भी नाम थे। इस मजाक को सांप्रदायिक रूप देकर उस समय मुस्लिम लीग के नेता मजरशफी ने कस्बे में जुलूस निकाला, जिसने हिंसात्मक रूप ले लिया।
 
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