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आगरा: निरीक्षक और दरोगा के आवास, सिपाहियों ने कर रखा है कब्जा
Thu, 07 Dec 2023 12:21 PM IST
धीरेन्द्र सिंह
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Thu, 07 Dec 2023 12:21 PM IST
सार
पुलिस लाइन में नियम ताक पर रखकर 35 से अधिक टाइप सी आवास आवंटित किए गए। गोपनीय शिकायत पर डीसीपी लाइन इस मामले में जांच कर रहे हैं।
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विस्तार
आगरा पुलिस लाइन में निरीक्षक और दरोगा के करीब 35 सरकारी आवासों पर सिपाहियों का कब्जा है। नियम ताक पर रखकर ये आवास आवंटित किए गए हैं। गोपनीय शिकायत मिलने पर डीसीपी लाइन ने जांच शुरू करा दी है। जांच में मामला सही मिलने पर आवास खाली कराए जाएंगे। दरोगा और निरीक्षकों को आवंटित किए जाएंगे।
पुलिस लाइन में सरकारी आवास पाने के लिए सिपाही से लेकर निरीक्षकों की मारामारी रहती है। पुलिस आयुक्त के पास रोजाना पुलिसकर्मी आवास नहीं मिलने की समस्या लेकर पहुंचते हैं। आरक्षी और मुख्य आरक्षी को टाइप ए-बी आवास आवंटित किए जाते हैं। इनमें एक और दो कमरे के आवास होते हैं।
इसी के साथ दरोगा और निरीक्षक को टाइप सी-डी आवास दिए जा सकते हैं। इनमें तीन या चार कमरे होते हैं। इससे अधिक कमरे वाले आवासों को सहायक पुलिस आयुक्त व अपर पुलिस उपायुक्त को आवंटित किया जाता है। मगर, शिकायत मिली है कि टाइप सी-डी आवास में भी सिपाही रह रहे हैं। ऐसे 35 आवास हैं। इन आवासों में जो पुलिसकर्मी रह रहे हैं, उनका तबादला भी दूसरे जनपद में हो गया है। इसके बावजूद वो आवास खाली नहीं कर रहे हैं। डीसीपी लाइन रवि कुमार ने बताया कि शिकायत मिली है। इस पर एसीपी लाइन से जांच कराई जा रही है। जांच रिपोर्ट मिलने पर कार्रवाई की जाएगी।
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कर्मचारियों को मिलता है आवास भत्ता
पुलिसकर्मियों के सरकारी आवास में रहने के पीछे वजह आवास भत्ता है। पुलिसकर्मियों को आवास भत्ता कम मिलता है। अगर, पुलिसकर्मी किराये के मकान में जाएंगे तो ज्यादा खर्च होगा। मगर, सरकारी में कोई खर्च नहीं होता है। बिजली बिल भी कम आता है।
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पुलिस लाइन में सरकारी आवास पाने के लिए सिपाही से लेकर निरीक्षकों की मारामारी रहती है। पुलिस आयुक्त के पास रोजाना पुलिसकर्मी आवास नहीं मिलने की समस्या लेकर पहुंचते हैं। आरक्षी और मुख्य आरक्षी को टाइप ए-बी आवास आवंटित किए जाते हैं। इनमें एक और दो कमरे के आवास होते हैं।
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इसी के साथ दरोगा और निरीक्षक को टाइप सी-डी आवास दिए जा सकते हैं। इनमें तीन या चार कमरे होते हैं। इससे अधिक कमरे वाले आवासों को सहायक पुलिस आयुक्त व अपर पुलिस उपायुक्त को आवंटित किया जाता है। मगर, शिकायत मिली है कि टाइप सी-डी आवास में भी सिपाही रह रहे हैं। ऐसे 35 आवास हैं। इन आवासों में जो पुलिसकर्मी रह रहे हैं, उनका तबादला भी दूसरे जनपद में हो गया है। इसके बावजूद वो आवास खाली नहीं कर रहे हैं। डीसीपी लाइन रवि कुमार ने बताया कि शिकायत मिली है। इस पर एसीपी लाइन से जांच कराई जा रही है। जांच रिपोर्ट मिलने पर कार्रवाई की जाएगी।
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कर्मचारियों को मिलता है आवास भत्ता
पुलिसकर्मियों के सरकारी आवास में रहने के पीछे वजह आवास भत्ता है। पुलिसकर्मियों को आवास भत्ता कम मिलता है। अगर, पुलिसकर्मी किराये के मकान में जाएंगे तो ज्यादा खर्च होगा। मगर, सरकारी में कोई खर्च नहीं होता है। बिजली बिल भी कम आता है।