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स्नातक स्तर पर पढ़ाने वाले शिक्षकों को शोध पर्यवेक्षक बनाया जाए
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आगरा। डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय शिक्षक संघ (औटा) के महामंत्री डॉ. भूपेंद्र सिंह चिकारा ने सोमवार को विश्वविद्यालय के प्रति कुलपति प्रो. अजय तनेजा से मुलाकात की। शासनादेश की कड़ी में स्नातक स्तर पर पढ़ाने वाले अर्ह शिक्षकों को शोध पर्यवेक्षक बनाए जाने की मांग उनके समक्ष रखी।
अभी तक विश्वविद्यालय में परास्नातक स्तर पढ़ाने वाले शिक्षकों को ही शोध पर्यवेक्षक बनाया जा रहा है। विश्वविद्यालय के अध्यादेश में स्नातक स्तर पर पढ़ाने वाले शिक्षकों को शोध पर्यवेक्षक बनाए जाने की व्यवस्था नहीं है। इससे अर्ह शिक्षक शोध कार्य नहीं करा पा रहे हैं। शासन की ओर से जारी दिशा-निर्देश में भी स्नातक स्तर पर पढ़ाने वाले शिक्षकों को शोध पर्यवेक्षक बनाने के लिए कहा गया है। बस वह विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की ओर से दिए गए शर्तों को पूरा कर रहे हों।
प्रति कुलपति ने कहा कि स्नातक स्तर पर पढ़ाने वाले शिक्षकों को शामिल कराने के लिए प्रभारी कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक से बात की गई है। इस दिशा में कदम उठाए जाएंगे। प्रयास है कि आगामी सत्र में ही इनको शामिल कर लिया जाए।
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शोध पर्यवेक्षक बनाए जाने के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से परास्नातक स्तर पर पढ़ाने वाले शिक्षकों से आवेदन लिए जा चुके हैं। करीब 440 शिक्षकों के आवेदन प्राप्त हुए हैं। इसमें करीब 140 शिक्षकों ने पहली बार शोध पर्यवेक्षक बनने के लिए आवेदन किया है। इनको अर्हता के आधार पर शोध पर्यवेक्षक बनाया जाना है। अभी इनकी सूची जारी नहीं हुई है।
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अभी तक विश्वविद्यालय में परास्नातक स्तर पढ़ाने वाले शिक्षकों को ही शोध पर्यवेक्षक बनाया जा रहा है। विश्वविद्यालय के अध्यादेश में स्नातक स्तर पर पढ़ाने वाले शिक्षकों को शोध पर्यवेक्षक बनाए जाने की व्यवस्था नहीं है। इससे अर्ह शिक्षक शोध कार्य नहीं करा पा रहे हैं। शासन की ओर से जारी दिशा-निर्देश में भी स्नातक स्तर पर पढ़ाने वाले शिक्षकों को शोध पर्यवेक्षक बनाने के लिए कहा गया है। बस वह विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की ओर से दिए गए शर्तों को पूरा कर रहे हों।
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प्रति कुलपति ने कहा कि स्नातक स्तर पर पढ़ाने वाले शिक्षकों को शामिल कराने के लिए प्रभारी कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक से बात की गई है। इस दिशा में कदम उठाए जाएंगे। प्रयास है कि आगामी सत्र में ही इनको शामिल कर लिया जाए।
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शोध पर्यवेक्षक बनाए जाने के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से परास्नातक स्तर पर पढ़ाने वाले शिक्षकों से आवेदन लिए जा चुके हैं। करीब 440 शिक्षकों के आवेदन प्राप्त हुए हैं। इसमें करीब 140 शिक्षकों ने पहली बार शोध पर्यवेक्षक बनने के लिए आवेदन किया है। इनको अर्हता के आधार पर शोध पर्यवेक्षक बनाया जाना है। अभी इनकी सूची जारी नहीं हुई है।