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कोरोना संकट काल की स्याह तस्वीर: संक्रमित बेटे की लाश के पास बिलखती रही मां, रिश्तेदारों ने फेरा मुंह
Fri, 23 Apr 2021 12:20 PM IST
मुकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Fri, 23 Apr 2021 12:20 PM IST
सार
मथुरा में कोरोना संक्रमित बेटे की लाश के पास मां दिनभर बिलखती रही, लेकिन कोरोना के डर से कोई भी रिश्तेदार उन्हें ढांढस बंधाने तक नहीं आया।
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युवक के शव पास बैठीं शोकाकुुल मां और बहन
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
कोरोना संकट काल में मथुरा से एक ऐसी स्याह तस्वीर सामने आई है, जिसने सभी को झकझोर कर रख दिया। एक मां अपने कोरोना संक्रमित बेटे के शव के पास बैठी घंटों बिलखती रही, लेकिन मदद के नाम पर किसी ने भी हाथ नहीं बढ़ाए। सूचना मिलने के बाद शाम को एंबुलेंस आई तो युवक को अंतिम संस्कार हो सका।
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कृष्णानगर स्थित बैंक कॉलोनी में 42 वर्षीय युवक एक मकान में किराए पर रहता था। युवक पास की दुकान पर काम करता था। 19 अप्रैल को तबीयत बिगड़ने पर जिला अस्पताल में कोरोना जांच कराई गई लेकिन स्वास्थ्य विभाग ने उसका उपचार शुरू करने की बजाय उसे घर जाने की बोल दिया।
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पड़ोस के लोगों के सहयोग से उसे निजी कोविड अस्पताल में भर्ती कराया गया। गुरुवार की सुबह युवक की मौत हो गई। सुबह स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट आई तो युवक कोरोना पॉजिटिव पाया गया। घर में मां और बेटे अकेले थे। बुजुर्ग मां बेटे को लेकर रोती रही।
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सिर्फ बहन पहुंची, अन्य रिश्तेदार नहीं आए
कोई रिश्तेदार और शुभचिंतक घर पर कोरोना के डर से नहीं आया। सिर्फ बहन ही घर पहुंची। अकेली मां और बहन पलंग पर पड़े शव के पास बिलखतीं रहीं। कई बार स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को फोन भी किए, लेकिन शाम तीन बजे तक मृतक के घर कोई एंबुलेंस नहीं पहुंची। तभी किसी प्रभावशाली के फोन के बाद एंबुलेंस पहुंची, तब शव को अंतिम संस्कार के लिए ले जाया गया।
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कोई रिश्तेदार और शुभचिंतक घर पर कोरोना के डर से नहीं आया। सिर्फ बहन ही घर पहुंची। अकेली मां और बहन पलंग पर पड़े शव के पास बिलखतीं रहीं। कई बार स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को फोन भी किए, लेकिन शाम तीन बजे तक मृतक के घर कोई एंबुलेंस नहीं पहुंची। तभी किसी प्रभावशाली के फोन के बाद एंबुलेंस पहुंची, तब शव को अंतिम संस्कार के लिए ले जाया गया।
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