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पत्र पर लिखे पत्र, फिर भी जारी नहीं हुई 17.24 लाख के घोटोले की रिकवरी
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मैनपुरी। विकास खंड बरनाहल की ग्राम पंचायत मांसरपुर में मनरेगा कार्यों के नाम पर 17.24 लाख के फर्जीवाड़े के खुलासा सोशल ऑडिट में गोने के बाद अब तक रिकवरी के आदेश नहीं हुए हैं। निदेशालय व सीडीओ के ने इस मसले पर डीसी मनरेगा को पत्र भी लिखे। इसके बावजूद सुनवाई नहीं हुई।
मामला लगभग एक वर्ष पुराना है। शासन से मनरेगा कार्यों के लिए आवंटित ग्राम पंचायत मांसरपुर में जिला विकास अधिकारी पीके राय ने निरीक्षण कर कार्यों का सत्यापन किया था। यहां उन्हें करीब 19 लाख रुपये का फर्जीवाड़ा मिला था। मामले की रिपोर्ट शासन को भेजी गई थी। इसके बाद जब सोशल ऑडिट हुआ तो भी ये फर्जीवाड़ा सामने आया। इसमें मनरेगा से कराए गए कार्यों में कुल 17.24 लाख रुपये का फर्जीवाड़ा करने की बात कही गई।
इस पर सोशल ऑडिट निदेशालय ने प्रधान और सचिव से धनराशि की रिकवरी कराने के लिए आदेश जारी किया। आदेश के आधार पर दो बार जिला विकास अधिकारी पीके राय ने मनरेगा को पत्र लिखकर रिकवरी कराने के लिए कहा, लेकिन इसके बाद भी रिकवरी आदेश जारी नहीं हो सका। यहां तक कि मुख्य विकास अधिकारी के पत्र के बाद भी रिकवरी के लिए कोई संज्ञान नहीं लिया गया। इससे रिकवरी अब तक लटकी हुई है। रिकवरी करने में लापरवाही क्यों की जा रही है, इस बारे में भी कोई जानकारी नहीं दे पा रहा है।
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मिट्टी के कार्यों में किया गया गोलमाल
मांसरपुर में पूरा घोटाला मनरेगा कार्यों के नाम पर ही किया गया। इसमें चक मार्ग निर्माण कराए बिना ही धनराशि का आहरण कर लिया गया तो वहीं तालाबों की खोदाई के बिना ही लाखों का भुगतान हुआ। मौके पर जांच के दौरान कार्य नहीं मिले।
कब किसने जारी किया पत्र
- 18 सितंबर 2020 को सोशल ऑडिट निदेशालय से।
- 22 सितंबर 2020 को मुख्य विकास अधिकारी ने खंड विकास अधिकारी को।
- 25 सितंबर 2020 को जिला विकास अधिकारी ने डीसी मनरेगा को।
- 17 अक्तूबर 2020 को जिला विकास अधिकारी ने डीसी मनरेगा को।
- 18 नवंबर 2020 को जिला विकास अधिकारी ने डीसी मनरेगा को।
रिकवरी का आदेश जारी करने में देरी क्यों हुई, इस बारे में जानकारी की जाएगी। हर हाल में घोटाले की धनराशि की रिकवरी कराई जाएगी।
ईशा प्रिया, मुख्य विकास अधिकारी
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मामला लगभग एक वर्ष पुराना है। शासन से मनरेगा कार्यों के लिए आवंटित ग्राम पंचायत मांसरपुर में जिला विकास अधिकारी पीके राय ने निरीक्षण कर कार्यों का सत्यापन किया था। यहां उन्हें करीब 19 लाख रुपये का फर्जीवाड़ा मिला था। मामले की रिपोर्ट शासन को भेजी गई थी। इसके बाद जब सोशल ऑडिट हुआ तो भी ये फर्जीवाड़ा सामने आया। इसमें मनरेगा से कराए गए कार्यों में कुल 17.24 लाख रुपये का फर्जीवाड़ा करने की बात कही गई।
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इस पर सोशल ऑडिट निदेशालय ने प्रधान और सचिव से धनराशि की रिकवरी कराने के लिए आदेश जारी किया। आदेश के आधार पर दो बार जिला विकास अधिकारी पीके राय ने मनरेगा को पत्र लिखकर रिकवरी कराने के लिए कहा, लेकिन इसके बाद भी रिकवरी आदेश जारी नहीं हो सका। यहां तक कि मुख्य विकास अधिकारी के पत्र के बाद भी रिकवरी के लिए कोई संज्ञान नहीं लिया गया। इससे रिकवरी अब तक लटकी हुई है। रिकवरी करने में लापरवाही क्यों की जा रही है, इस बारे में भी कोई जानकारी नहीं दे पा रहा है।
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मिट्टी के कार्यों में किया गया गोलमाल
मांसरपुर में पूरा घोटाला मनरेगा कार्यों के नाम पर ही किया गया। इसमें चक मार्ग निर्माण कराए बिना ही धनराशि का आहरण कर लिया गया तो वहीं तालाबों की खोदाई के बिना ही लाखों का भुगतान हुआ। मौके पर जांच के दौरान कार्य नहीं मिले।
कब किसने जारी किया पत्र
- 18 सितंबर 2020 को सोशल ऑडिट निदेशालय से।
- 22 सितंबर 2020 को मुख्य विकास अधिकारी ने खंड विकास अधिकारी को।
- 25 सितंबर 2020 को जिला विकास अधिकारी ने डीसी मनरेगा को।
- 17 अक्तूबर 2020 को जिला विकास अधिकारी ने डीसी मनरेगा को।
- 18 नवंबर 2020 को जिला विकास अधिकारी ने डीसी मनरेगा को।
रिकवरी का आदेश जारी करने में देरी क्यों हुई, इस बारे में जानकारी की जाएगी। हर हाल में घोटाले की धनराशि की रिकवरी कराई जाएगी।
ईशा प्रिया, मुख्य विकास अधिकारी