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Agra News: जमीन के मुकदमे में तहसील से गायब कर दिए अभिलेख
Mon, 08 Jul 2024 10:56 PM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
Updated Mon, 08 Jul 2024 10:56 PM IST
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मैनपुरी। तहसील सदर में तैनात रहे अधिकारियों के भी कारनामे निराले हैं। जमीन के मुकदमे में मामले से बाहरी व्यक्ति को वादी बना दिया तो कभी अभिलेख ही गायब कर दिए। इतना ही नहीं राजस्व परिषद के आदेशों को भी नहीं माना। मामले में अब पीड़ित ने साक्ष्य के साथ जिलाधिकारी से शिकायत की है। मामले की जांच अपर जिलाधिकारी से कराए जाने के साथ ही दोषियों पर कार्रवाई की मांग की गई है।
मामला तहसील सदर की ग्राम पंचायत नौनेर से जुड़ा हुआ है। कोठी सदर ए आला निवासी धर्मपाल सिंह चौहान ने जिलाधिकारी से शिकायत की है। उन्होंने बताया कि 2012 में उन्होंने रमेश चंद्र पुत्र कनौजी लाल से तीन बैनामें अपने और पत्नी के नाम कराए थे। तभी तहसीलदार न्यायालय में अमलदरामद के लिए मुकदमा भी दायर किया था। इसके बाद विपक्षीगणों ने 1989 और 1991 का उसी जमीन का बैनामा दिखाते हुए आपत्ति दायर की थी। आपत्ति में कहा गया था कि उस जमीन का बैनामा पूर्व में रमेश चंद्र के पिता से रामबेटी देवी और बेटी देवी के नाम करा लिया था। इसका मुकदमा चलता रहा, लेकिन इसमें दूसरे पक्ष में बेटी देवी या रामबेटी देवी नहीं बल्कि दिनेश सिंह को बना दिया गया। जबकि जमीन के मामले में किसी अन्य व्यक्ति को वादी नहीं बनाया जा सकता।
इतना ही नहीं बाद में दाखिल मुकदमा संख्या 582 में दाखिल एक आपत्ति को भी फाइल से गायब कर दिया गया। इसकी प्रति के साथ ही तत्कालीन तहसीलदार की एक रिपोर्ट भी उन्होंने जिलाधिकारी को सौंपी है। इस रिपोर्ट में साफ लिखा है कि मुकदमे की सुनवाई के दौरान आपत्ति फाइल में थी। इससे साफ हो गया कि पत्रावली से अभिलेख गायब किए गए थे। इसके अलावा मामले में राजस्व परिषद ने भी तहसीलदार न्यायालय के आदेश को निरस्त कर दिया था। दोबारा मामले को सुनकर कार्रवाई के आदेश 2013 में दिए थे। आदेश निरस्त होने के फर्द में पुराना आदेश बहाल किया जाना चाहिए थे। लेकिन 11 साल बाद भी ऐसा नहीं किया जा सका। उन्होंने पूरे मामले में अन्य कई उल्लेखनीय तथ्यों से भी डीएम को अवगत कराते हुए जांच कराने की मांग की है। एडीएम से जांच कराते हुए दोषी अधिकारियों पर एफआईआर दर्ज कराने की मांग की है।
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फाइल का भी नहीं है कोई पता
मुकदमा संख्या 582 जो वर्ष 2012 में विपक्षीगणों की ओर से दायर किया गया था, उस फाइल का भी अब कोई अता पता नहीं है। शिकायकर्ता धर्मपाल सिंह चौहान ने जिलाधिकारी को दिए गए प्रार्थना पत्र में बताया कि ये फाइल गायब कर दी गई है। कई बार सूचना का अधिकार अधिनियम से जानकारी मांगे जाने पर भी इस फाइल का कोई पता नहीं चल रहा है।
दो दिन में दाखिल खारिज का सामने आया था मामला
तहसील सदर में बीते माह भी अधिकारियों की मनमानी का मामला सामने आया था। यहां तैनात तहसीलदार विशाल यादव ने दो दिन में ही एक अमलदरामद पत्रावली को निस्तारित कर दिया था। 24 जनवरी 2024 को अमलदराम का वाद तहसीलदार न्यायालय में दायर हुआ था और 26 जनवरी को अमलदरामद का आदेश जारी कर दिया गया। नियमानुसार 35 दिन का समय देने के बाद ही अमलदरामद की कार्रवाई की जा सकती है।
न्यायालय से संबंधित अगर कोई मामला है तो संबंधित वादी अपील में जा सकता है। जहां तक शिकायत की बात है तो अभी शिकायत मेरे संज्ञान में नहीं है। जानकारी कर उचित कार्रवाई की जाएगी।
- अभिषेक कुमार, एसडीएम सदर
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मामला तहसील सदर की ग्राम पंचायत नौनेर से जुड़ा हुआ है। कोठी सदर ए आला निवासी धर्मपाल सिंह चौहान ने जिलाधिकारी से शिकायत की है। उन्होंने बताया कि 2012 में उन्होंने रमेश चंद्र पुत्र कनौजी लाल से तीन बैनामें अपने और पत्नी के नाम कराए थे। तभी तहसीलदार न्यायालय में अमलदरामद के लिए मुकदमा भी दायर किया था। इसके बाद विपक्षीगणों ने 1989 और 1991 का उसी जमीन का बैनामा दिखाते हुए आपत्ति दायर की थी। आपत्ति में कहा गया था कि उस जमीन का बैनामा पूर्व में रमेश चंद्र के पिता से रामबेटी देवी और बेटी देवी के नाम करा लिया था। इसका मुकदमा चलता रहा, लेकिन इसमें दूसरे पक्ष में बेटी देवी या रामबेटी देवी नहीं बल्कि दिनेश सिंह को बना दिया गया। जबकि जमीन के मामले में किसी अन्य व्यक्ति को वादी नहीं बनाया जा सकता।
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इतना ही नहीं बाद में दाखिल मुकदमा संख्या 582 में दाखिल एक आपत्ति को भी फाइल से गायब कर दिया गया। इसकी प्रति के साथ ही तत्कालीन तहसीलदार की एक रिपोर्ट भी उन्होंने जिलाधिकारी को सौंपी है। इस रिपोर्ट में साफ लिखा है कि मुकदमे की सुनवाई के दौरान आपत्ति फाइल में थी। इससे साफ हो गया कि पत्रावली से अभिलेख गायब किए गए थे। इसके अलावा मामले में राजस्व परिषद ने भी तहसीलदार न्यायालय के आदेश को निरस्त कर दिया था। दोबारा मामले को सुनकर कार्रवाई के आदेश 2013 में दिए थे। आदेश निरस्त होने के फर्द में पुराना आदेश बहाल किया जाना चाहिए थे। लेकिन 11 साल बाद भी ऐसा नहीं किया जा सका। उन्होंने पूरे मामले में अन्य कई उल्लेखनीय तथ्यों से भी डीएम को अवगत कराते हुए जांच कराने की मांग की है। एडीएम से जांच कराते हुए दोषी अधिकारियों पर एफआईआर दर्ज कराने की मांग की है।
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फाइल का भी नहीं है कोई पता
मुकदमा संख्या 582 जो वर्ष 2012 में विपक्षीगणों की ओर से दायर किया गया था, उस फाइल का भी अब कोई अता पता नहीं है। शिकायकर्ता धर्मपाल सिंह चौहान ने जिलाधिकारी को दिए गए प्रार्थना पत्र में बताया कि ये फाइल गायब कर दी गई है। कई बार सूचना का अधिकार अधिनियम से जानकारी मांगे जाने पर भी इस फाइल का कोई पता नहीं चल रहा है।
दो दिन में दाखिल खारिज का सामने आया था मामला
तहसील सदर में बीते माह भी अधिकारियों की मनमानी का मामला सामने आया था। यहां तैनात तहसीलदार विशाल यादव ने दो दिन में ही एक अमलदरामद पत्रावली को निस्तारित कर दिया था। 24 जनवरी 2024 को अमलदराम का वाद तहसीलदार न्यायालय में दायर हुआ था और 26 जनवरी को अमलदरामद का आदेश जारी कर दिया गया। नियमानुसार 35 दिन का समय देने के बाद ही अमलदरामद की कार्रवाई की जा सकती है।
न्यायालय से संबंधित अगर कोई मामला है तो संबंधित वादी अपील में जा सकता है। जहां तक शिकायत की बात है तो अभी शिकायत मेरे संज्ञान में नहीं है। जानकारी कर उचित कार्रवाई की जाएगी।
- अभिषेक कुमार, एसडीएम सदर