फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Agra News ›   Receipt of fee deducted after 14 days of medicolegal

Agra News: मेडिकोलीगल के 14 दिन बाद कटी शुल्क की रसीद

Thu, 16 May 2024 11:34 PM IST
आगरा ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा Updated Thu, 16 May 2024 11:34 PM IST
विज्ञापन
Receipt of fee deducted after 14 days of medicolegal
मैनपुरी।
विज्ञापन

जिला अस्पताल में मेडिकोलीगल बनाने के नाम पर बड़ा फर्जीवाड़ा किया गया। बैक डेट में चिकित्सकों ने मेडिकोलीगल जारी कर दिए। इसका खुलासा तब हुआ जब आरटीआई कार्यकर्ता गौरव चौहान ने मेडिकोलीगल और शुल्क रसीद की प्रति आरटीआई से प्राप्त की। अब उन्होंने मामले की शिकायत उच्चाधिकारियों के साथ ही प्रधानमंत्री को भी भेजी है। इसके बाद जिला अस्पताल में खलबली मच गई है।

किसी भी घायल का मेडिकोलीगल इसलिए कराया जाता है कि इस बात को साबित किया जा सके कि उसे कितनी चोटें लगीं। मारपीट या अन्य आपसी विवाद या हमले के मामले में ये मेडिकोलीगल ही पुलिस और न्यायालय की कार्रवाई का आधार बनता है। लेकिन जिला अस्पताल में धड़ल्ले से मेडिकोलीगल के नाम पर फर्जीवाड़ा किया जा रहा है।
विज्ञापन

थाना दन्नाहार क्षेत्र के गांव तिलोकपुर निवासी गौरव चौहान ने स्वास्थ्य विभाग से बीते कुछ सालों में जिला अस्पताल में हुए प्राइवेट मेडिकोलीगल का डाटा आरटीआई से मांगा था। आरटीआई द्वारा प्राइवेट मेडिकोलीगल का डाटा सामने आने पर एक बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया। जिला अस्पताल में होने वाले अधिकांश प्राइवेट मेडिकोलीगल वास्तविक से पीछे की तारीख में जारी किए गए थे। दरअसल ये पूरा फर्जीवाड़ा तब और पुख्ता हो गया जब मेडिकोलीगल के लिए जमा कराई जानी वाली फीस की रसीदें भी आरटीआई के माध्यम से प्राप्त की गईं। अधिकांश रसीदें मेडिकोलीगल की तिथि से 15-15 दिन बाद तक काटी गई थीं। इनका मिलान करने पर स्पष्ट हो गया कि रसीद वास्तविक तारीख में जमा कर मेडिकोलीगल बैक डेट में जारी किए गए थे। नीचे दिए गए केस इस फर्जीवाड़े की बानगी मात्र हैं, ऐसे दर्जनों मामले हैं, जिनमें चिकित्सकों ने इसी तरह फर्जीवाड़ा किया है।
विज्ञापन
विज्ञापन

मामले की शिकायत गौरव चौहान ने मुख्य चिकित्साधिकारी, उत्तर प्रदेश शासन और प्रधानमंत्री कार्यालय को भी भेजी है। शिकायत के साथ उन्होंने सभी साक्ष्य भी संलग्न किए हैं। संवाद


पुलिस को भी नहीं भेजी गई सूचना
आरटीआई के माध्यम से गौरव चौहान द्वारा प्राप्त किए गए किसी भी मेडिकोलीगल की सूचना पुलिस को नहीं दी गई है। नियमानुसार अगर किसी घायल का मेडिकल किया जाता है तो संबंधित पुलिस स्टेशन को सूचना भेजना अस्पताल प्रशासन की जिम्मेदारी है। लेकिन किसी भी मामले में पुलिस को सूचना न भेजा जाने से अस्पताल प्रशासन की कार्यशैली सवालों के घेरे में है।


केस एक :
किशनी क्षेत्र के गांव हुसैनपुर निवासी लालू पुत्र मुनेश चंद्र का मेडिकोलीगल जिला अस्पताल से जारी किया गया था। मेडिकोलीगल में परीक्षण की तारीख 1 फरवरी 2023 दर्ज की गई है। वहीं मेडिकोलीगल की शुल्क रसीद 14 फरवरी 2023 को काटी गई है। इससे स्पष्ट है कि मेडिकोलीगल बैक डेट में किया गया है।


केस दो :
एलाऊ के गांव नखतपुर निवासी सुनीता पत्नी प्रमोद कुमार का मेडिकोलीगल जिला अस्पताल में हुआ था। मेडिकोलीगल प्रमाण पत्र पर परीक्षण की तारीख 2 फरवरी 2023 दर्ज है। लेकिन परीक्षण के लिए जमा किए गए शुल्क की रसीद पर 14 फरवरी 2023 की तिथि अंकित है। यहां भी फर्जीवाड़ा साफ स्पष्ट हो रहा है।




वर्तमान में प्राइवेट मेडिकोलीगल जांच का कार्य बंद कर दिया गया है। प्राइवेट मेडिकोलीगल जांच के लिए उसी दिन शुल्क रसीद काटे जाने का नियम है । दो बजे के बाद अगर कोई मेडिकोलीगल होता है उसकी फीस अगले कार्यदिवस में जमा कराए जाने का प्रावधान है। अगर कहीं गड़बड़ी की शिकायत मिलती है तो जांच कराई जाएगी। - आरके वर्मा, प्रशासनिक अधिकारी जिला अस्पताल
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article