अमर उजाला पड़ताल: कागजों में रोपे 54 लाख पौधे... कितने जिंदा, कितने मर गए, कोई रिकॉर्ड नहीं
2019 और 2020 में हुए पौधरोपण अभियान के तहत जिले में करीब 54 लाख पौधे लगाए गए थे। इन पौधों की बजाय गड्ढों की गूगल पर मैपिंग की गई।
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आगरा जिले में कागजों में 54 लाख पौधे रोपे गए। उनमें कितने जिंदा रहे, कितने मर गए। इसका रिकॉर्ड न वन विभाग के पास है, न जिला प्रशासन के। ये हाल है 2019 और 2020 में हुए पौधरोपण अभियान का। पौधों की बजाय गड्ढों की गूगल पर मैपिंग की गई।
2019 में मारुति एस्टेट चौराहे से बोदला तक दो किमी सड़क के डिवाइडर पर 1750 पौधे रोपे गए थे। अमर उजाला ने सोमवार को इनकी पड़ताल की। मौके पर पौधों की सुरक्षा के लिए ट्री गार्ड लगे मिले, परंतु बीती जून में सीवर पाइपलाइन डालने के लिए सड़क खोदाई के दौरान 250 से अधिक पौधे नष्ट हो गए।
2019-20 में ही मदिया कटरा से गुरुद्वारा फ्लाईओवर तक नगर निगम ने 10 हजार पौधे रोपने की रिपोर्ट वन विभाग को भेजी। सत्यापन के समय मौके पर सिर्फ गड्ढे मिले। दो साल पहले रोपे गए पौधों में कितने बचे, कितने सूख गए इसका आकलन आज तक नहीं हो सका है। हरियाली के नाम पर फर्जीवाड़े की आशंका है। वहीं, जिम्मेदार भी पौधरोपण को लेकर गंभीर नजर नहीं आते।
'मेरे पास रिपोर्ट नहीं, डीएफओ से पूछिए'
जिलाधिकारी प्रभु एन. सिंह ने कहा कि पिछले साल कितने पौधे लगे, कितने मर गए। इसका आकलन कराया जा चुका है। मेरे पास रिपोर्ट नही हैं। वर्तमान स्थिति के बारे में डीएफओ जानकारी देंगे।
हमारे जिंदा, दूसरों की पता नहीं
डीएफओ व नोडल अधिकारी अखिलेश पांडेय ने कहा कि हमारे 100 फीसदी पौधे जिंदा हैं और विभागों का हमें पता नहीं। पिछले साल लगे पौधों का सत्यापन चल रहा है। विभागों से रिपोर्ट नहीं आई है। जिलाधिकारी की बैठक में पौधरोपण अभियान की भौतिक स्थिति पर चर्चा की जाएगी।
बारिश खत्म होने को, नहीं लगे सात लाख पौधे
इस साल 45 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य जिले को मिला था। प्रशासन ने एक दिन में 38 लाख पौधे लगाने का दावा किया था। मानसून विदा होने की कगार पर है, लेकिन बाकी सात लाख पौधे नहीं लगे हैं। जुलाई में एक दिन में 38 लाख पौधरोपण का दावे पर भी प्रश्न उठ रहे हैं।
वरिष्ठ पर्यावरणविद डॉ. शरद गुप्ता का कहना है कि एक दिन में 38 लाख पौधे नहीं लगाए जा सकते। इतने पौधे लगाने के लिए क्या मैकेनिज्म है, प्रशासन सार्वजनिक करें। वहीं, डीएफओ अखिलेश पांडेय का कहना है कि बारिश अच्छी नहीं होने के कारण शेष सात लाख पौधे नहीं लग सके हैं, उन्हें लगवाया जाएगा।
नर्सरियों में रखे है 25 लाख पौधे
जिले में 35 से अधिक सरकारी व निजी नर्सरियां हैं। जहां पौधे रखे रह गए। वनस्पति विज्ञानी एसपी शर्मा का कहना है कि निजी खर्च से जिन लोगों ने नर्सरियों से पौधे खरीदे हैं, वही लगे हैं। नर्सरियों से इस बार अधिक पौध का उठान नहीं हुआ है। नर्सरियों में करीब 25 लाख पौधे अभी रखे हैं।
10 वर्ग किलोमीटर घटी हरियाली
फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया की मार्च 2020 की रिपोर्ट के मुताबिक जिले में 2017 में 272 वर्ग किलोमीटर हरियाली क्षेत्र था जो 2019 में 262.62 वर्ग किलोमीटर रह गया। करीब 10 वर्ग किलोमीटर हरित क्षेत्र में कमी आई है, जबकि ताज ट्रिपेजियम जोन (टीटीजेड) में हरियाली बढ़ाने के लिए पिछले एक दशक में 9 करोड़ पौधे रोपे गए हैं।
आगरा का क्षेत्रफल 4041 वर्ग किलोमीटर है, परंतु जिले में वन क्षेत्र 6.73 वर्ग किलोमीटर ही बचा है। ये हाल तब है जब हर साल अफसर पौधरोपण के रिकॉर्ड बनाने का दावा करते आ रहे हैं, जबकि पर्यावरणविद पौधरोपण के नाम पर घोटाले के आरोप लगा रहे हैं।
विशेषज्ञ बोले- गर्मी में नहीं लगते पौधे
मृदा संरक्षण के पूर्व मंडलीय निदेशक तिलक सिंह ने कहा कि जुलाई के पहले सप्ताह में पौधे नहीं लगाए जाते। तब धरती गर्म होती है। पौधे तभी लगाए जाते हैं जब दो-तीन बार बारिश हो जाए। क्योकि गर्म जमीन में पौधे नहीं पनप पाते। पौधे लगाने के लिए मानसून और मिट्टी का ध्यान रखना पड़ता है। उनकी नियमित देखभाल व पानी देना पड़ता है। दो साल तक पौधों की निगरानी की जाए, तो फिर पौधे बढ़ने लगते हैं।