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सेवा की राह चलकर तंत्र को मजबूत बना रहे शहर के ये पहरुए

Sat, 25 Jan 2020 11:46 PM IST
Agra Bureau आगरा ब्यूरो
Updated Sat, 25 Jan 2020 11:46 PM IST
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re pablic day
25एमएनपी-20-गणतंत्र दिवस को लेकर शहर में एक दुकान से तिरंगा खरीदते लोग - फोटो : MAINPURI
मैनपुरी। देश की आजादी के बाद आज हम एक पूर्ण गणराज्य देश में सांस ले रहे हैं। इस गणराज्य को कायम रखना जितनी सरकार की जिम्मेदारी है उतनी ही हम और आपकी भी। हम अपनी व्यस्त जिंदगी में समाज के लिए समय ही नहीं निकाल पाते हैं, लेकिन हमारे बीच कुछ ऐसे लोग हैं, जो एक सजग पहरुए बनकर न केवल देश हित में कार्य कर रहे हैं, बल्कि गणतंत्र की रक्षा भी कर रहे हैं। दिन हो या रात वे हर पल समाज की बेहतरी के लिए दृढ़ संकल्पित हैं। ये वे लोग हैं जो समाज को दिशा देकर वर्तमान दशा को बदलने का काम कर रहे हैं। गणतंत्र दिवस के इस पर्व पर आओ हम सब मिलकर देश के इन सजग प्रहरियों को नमन करें।
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महिला सशक्तीकरण
महिलाओं को आत्मनिर्भर बना रहीं आरती
विकास खंड मैनपुरी के गांव नगला मानसिंह निवासी आरती शाक्य (26) आज महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने का काम कर रही हैं। ये मुहिम उन्होंने वर्ष 2015 में खुद एक स्वयं सहायता समूह से जुड़कर की थी। बचत कर सिलाई की शुरुआत की। काम बेहतर हुआ तो एक साल में ही राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ने उन्हें समूह सखी बना दिया। इसके बाद उन्होंने गांव में नौ समूह गठित कर 100 से अधिक महिलाओं को रोजगार दिलाया। इसके एक वर्ष बाद उनके बेहतर कार्य को देखते हुए वर्ष 2017 उन्हें ब्लॉक रिसोर्स पर्सन और एक साल बाद उन्हें डिस्ट्रिक्ट रिसोर्स पर्सन बना दिया गया। आज वे मैनपुरी ही नहीं बल्कि प्रदेश के अन्य जिलों में भी महिलाओं को रोजगार दिला रही हैं। अब तक वे पांच हजार से अधिक महिलाओं को रोजगार के लिए प्रशिक्षित कर चुकी हैं। वे बताती हैं कि महिलाओं के लिए आत्मनिर्भर होना बहुत जरूरी है। इसके लिए वे हर संभव प्रयास करने को तैयार हैं।
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आरटीआई एक्टिविस्ट
आरटीआई को हथियार बनाकर कब्जा मुक्त कराई सरकारी भूमि
मैनपुरी।
विकास खंड घिरोर के गांव कल्होर पछां निवासी घनश्याम सिंह गुजरात पुलिस में सब इंस्पेक्टर थे। करीब 12 साल पहले सेवानिवृत्त होने के बाद उन्होंने समाजसेवा के लिए आरटीआई को हथियार बना लिया। उन्होंने अपनी ग्राम पंचायत में सरकारी जमीनों और तालाबों का आरटीआई के माध्यम से पता लगाया। जब सूचना देखी तो उन्हें पता चला कि सैकड़ों बीघा भूमि पर दबंगों ने कब्जा कर रखा है। वहीं पूरे विकास खंड के तालाब दफन हो चुके हैं। इसके बाद उन्होंने खुद ही पेंशन की धनराशि से न्यायालय में इसकी लड़ाई शुरू कर दी। अब तक वे 50 बीघा से अधिक जमीन कब्जा मुक्त करवा चुके हैं। वहीं तालाबों और भूमि पर कब्जे के कई मामले विचाराधीन भी हैं। वे बताते हैं कि जब तक आखिरी सांस है तब तक समाज के लिए जंग लड़ते रहेंगे।
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अशोक दे रहे उपचारात्मक शिक्षा का ज्ञान
मैनपुरी। बरनाहल विकास खंड के उच्च प्राथमिक विद्यालय उरथान पर तैनात प्रधानाध्यापक अशोक कुमार शिक्षा प्रहरी के रूप में अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं। एक तरफ वे विद्यालय समय में छात्र-छात्राओं को किताबी ज्ञान देते हैं, तो दूसरी तरफ अवकाश के बाद उपचारात्मक शिक्षा का ज्ञान भी छात्र-छात्राओं को दे रहे हैं। उनके द्वारा छात्र-छात्राओं को उपचारात्मक शिक्षा के साथ जो ज्ञान दिया जा रहा है वह व्यवहारिक रूप से महत्वपूर्ण है। उनकी इस शिक्षा व्यवस्था को लेकर गांव उरथान के लोग भी उनके मुरीद हैं। अशोक कुमार पिछले 10 वर्षों से यह कार्य कर रहे हैं। उनके इस कार्य के लिए उन्हें बीएसए ने सम्मानित भी किया है। यहां तक कि राज्यपाल पुरस्कार के लिए वर्ष 2019 में भी उनका नाम भेजा गया था। अशोक कुमार मूल रूप से मैनपुरी विकास खंड के गांव अकबरपुर के रहने वाले हैं। वे अपने पिता सेवानिवृत्त शिक्षक बालिस्टर सिंह को अपना प्रेरणाश्रोत मानते हैं।

गरीबों के हक की लड़ाई लड़ रहे सतीश
मैनपुरी। किशनी विकास खंड क्षेत्र के गांव कनहूपुर निवासी समाजसेवी सतीश कुमार ने 20 साल पहले समाज सेवा का वीणा उठाया। गरीबों और मजदूरों को इंसाफ दिलाने के लिए उन्होंने आरटीआई का सहारा लिया। जिस भी गरीब और मजदूर को शासन या जनप्रतिनिधि के साथ ताकतवर लोगों ने सताने का कार्य किया, उसके विरुद्ध उन्होंने अपनी आवाज उठाई। शासन से यदि वे लोगों को न्याय नहीं दिला पाए तो उन्होंने कोर्ट की शरण भी ली। इस कार्य में जो खर्च हुआ वह उन्होंने अपनी खेती की कमाई से किया। 20 साल में वह नौ सौ से अधिक लोगों को न्याय दिला चुके हैं। भोगांव के एक पूर्व तहसीलदार और लेखपाल ने गरीबों की जगह पर दूसरों को पट्टे दे दिए तो सतीश ने उनके खिलाफ भी मोर्चा खोला और गरीबों को उनकी जमीन दिलाई। इस मामले में तहसीलदार और लेखपाल को निलंबित किया गया।
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