आगरा में जलभराव से स्मारक को नुकसान: रामबाग में घुसा नाले का पानी, मुगलकालीन दीवार ढही
स्मारक में जलभराव के कारण मुगलकालीन ककैया ईंटों की दीवार ढह गई। एएसआई ने इस मामले में नेशनल हाईवे अथॉरिटी और नगर निगम से कार्रवाई की मांग की है।
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आगरा में मुगल बादशाह बाबर द्वारा बनवाए गए देश के पहले चारबाग शैली के मुगलिया बाग रामबाग में नाला उफनाने से गंदा पानी बगीचे में भर गया। जलभराव के कारण गुरुवार को स्मारक की मुगलकालीन ककैया ईंटों की दीवार ढह गई।
यमुनापार के क्षेत्रों का गंदा पानी संरक्षित स्मारक की दीवार से सटे नाले के उफनाने के कारण यहां भर गया है, जिस कारण पर्यटक दुर्गंध से बेहाल हो गए। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने इस मामले में नेशनल हाईवे अथॉरिटी और नगर निगम से कार्रवाई की मांग की है।
संरक्षित स्मारक है रामबाग
समरकंद की चार बाग शैली में बने पहले बागीचे रामबाग की यह दुर्दशा इससे सटे नाले के कारण हुई है। बारिश में चोक पड़ा नाला स्मारक की दीवार के नजदीक उफना तो दीवार ढह गई और नाले का पानी अंदर भर गया।
हाईवे की ओर के हिस्से में गंदा पानी भरने से कीचड़ और दुर्गंध फैल गई। जो पर्यटक दोपहर बाद स्मारक आए, उन्होंने दुर्गंध की शिकायत भी की। इस मामले में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण अधिकारियों ने नगर निगम और नेशनल हाईवे अथारिटी दोनों से ही कार्रवाई के लिए कहा है।
मरम्मत के लिए प्रस्ताव कर रहे तैयार
अधीक्षण पुरातत्वविद वसंत कुमार स्वर्णकार ने कहा कि हाईवे से सटे नाले का गंदा पानी रामबाग स्मारक में पहुंच रहा है, जिससे अंदर कीचड़ और गंदगी जमा हो गई है। हमने नेशनल हाईवे अथॉरिटी के साथ नगर निगम से भी इसके समाधान के लिए कहा है। हाईवे अथॉरिटी की टीम ने निरीक्षण भी किया है। टूटी हुई दीवार की मरम्मत के लिए प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है।
टेढ़ी बगिया में चौथी बार ढहा नाला
बारिश के बाद गुरुवार सुबह टेढ़ी बगिया स्थित 100 फीट रोड का नाला फिर ढह गया। यह नाला तीन बार टूट चुका है। कालिंदी विहार योजना में एडीए द्वारा बनवाए गए नाले का बड़ा हिस्सा अब तक ढह चुका है। गुरुवार सुबह दुकानों के पास नाले की दीवार गिरने से नाला बंद हो गया, जिससे पीछे के क्षेत्रों की गलियों में भी जलभराव शुरू हो गया।
क्षेत्रीय पार्षद मिथिलेश देवी ने बताया कि एक साल पहले उन्होंने नगर निगम में नाले की मरम्मत के लिए 98 लाख रुपये का प्रस्ताव तैयार कराया था, लेकिन उसे न तो 14वें वित्त आयोग की धनराशि से पास किया गया और न ही अब 15वें वित्त आयोग की धनराशि में शामिल किया गया।
पार्षद ने आरोप लगाया कि नगर निगम अब तक 55 लाख रुपये से ज्यादा नाले की कागजी मरम्मत पर खर्च कर चुका है। इससे बेहतर तो आरसीसी का नया नाला तैयार हो जाता, लेकिन नगर निगम के अधिकारी मरम्मत के नाम पर निगम के पैसे को ठिकाने लगा रहे हैं।
क्षेत्रीय निवासी यशपाल सिंह ने बताया कि नाले की दीवार ढह जाने से इसका पानी इससे सटी दुकानों की नींव में भर गया, जिससे चार दुकानों में चटकन आ गई है और पीछे की गलियों में जलभराव शुरू हो गया है। टीटी दीवार का मलबा नाले में ही पड़ा हुआ है।