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आगरा में दवा गोदाम पर छापा: माधव ड्रग हाउस में 17 दवाओं के बिलों में पकड़ी गई गड़बड़ी

Sun, 18 Jul 2021 04:03 PM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा Published by: Abhishek Saxena Updated Sun, 18 Jul 2021 04:03 PM IST
सार

सहायक आयुक्त औषधि अखिलेश जैन ने बताया कि दवाएं कहां से खरीदी और किन फर्मों को बिक्री की इसकी जांच कर रहे हैं।

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Raid On Madhav Drug House Investigation Of Illegal Sales Agra News
आगरा में दवा के गोदाम पर छापा - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

आगरा के माधव ड्रग हाउस में 22 घंटे चली जांच में खरीद और बिक्री के बिलों में गड़बड़ी पकड़ी गई। कंप्यूटर के स्टॉक रजिस्टर और गोदाम में भंडारण का मिलान करने पर 17 तरह की दवाओं में अंतर मिला। स्टॉक रजिस्टर में जो दवाएं बिक्री बताईं, गोदाम में भरी मिली। जिन दवाओं को स्टॉक में बताया, उनका गोदाम में स्टॉक नहीं मिला। संचालक को नोटिस देकर जवाब मांगा है।  

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शनिवार को 10 घंटे की जांच के बाद दो गोदाम और स्टोर सील कर दिए थे, रविवार की सुबह दस बजे फिर खोले गए। सहायक आयुक्त औषधि अखिलेश जैन ने बताया कि तकनीकी विशेषज्ञ की मदद से माधव ड्रग हाउस के कंप्यूटर में एक अप्रैल से अब तक की दवाओं की बिक्री और खरीद की जांच की। कंप्यूटर में स्टॉक की जांच करने पर 17 तरह की दवाएं ऐसी  रहीं, जिनका भंडार और स्टॉक रजिस्टर से मिलान नहीं हो रहा था।
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जो दवाएं स्टॉक में बताईं, वह गोदाम में नहीं थी और जिनकी बिक्री दर्शाई उन दवाओं का भारी भंडारण पाया गया। दवाओं की खरीद-बिक्री में यह अंतर कैसे आया, पूछने पर संचालक नवीन अरोरा कोई जानकारी नहीं दे सका। नोटिस देकर जवाब मांगा है। यह रिपोर्ट लखनऊ मुख्यालय दी जा रही है। 

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बिना बिल के कोविड व नारकोटिक्स दवाओं की खरीद और बिक्री
माधव ड्रग हाउस से बिना बिल के दवाओं की खरीद और बिक्री की। औषधि विभाग की शुरूआती जांच में यह जानकारी मिली है। इसमें अधिकांश दवाएं एंटीबायोटिक हैं, जिनका कोरोना वायरस के मरीजों के इलाज में उपयोग किया। नारकोटिक्स की दवाएं भी शामिल हैं। सहायक आयुक्त औषधि अखिलेश जैन ने बताया कि जिन 17 तरह की दवाओं के भंडारण और स्टॉक रजिस्टर में गड़बड़ी मिली है। 

इनमें 15 दवाएं एंटीबायोटिक, खासतौर से एजिथ्रोमाइसिन दवा शामिल हैं। इन दवाओं का कोरोना के मरीजों के इलाज में उपयोग किया जाता है। अप्रैल और मई के महीने में बिक्री और खरीद के बिल में काफी अंतर मिला है। इन दो महीने में कोरोना वायरस की दूसरी लहर भी रही थी और इन दवाओं की बाजार में भारी मांग थी। बाकी दो दवाएं नारकोटिक्स की रहीं। इनका उपयोग नशे के तौर पर भी लोग करते हैं। 

गर्भपात किट प्रकरण में दूसरी बार जांच
राजस्थान, हरियाणा में भ्रूण लिंग जांच गैंग के पास से गर्भपात कराने वाली किट बरामद हुई थी। पुलिस की पूछताछ में एके इंटरप्राइजेज और माधव ड्रग हाउस का नाम सामने आया था। औषधि विभाग के निरीक्षक नरेश मोहन दीपक ने इनकी जांच की। 

जांच में एके इंटरप्राइजेज ने गर्भपात किट माधव ड्रग हाउस से खरीदी थी, बिल दिखाने पर इसे क्लीन चिट दे दी और एके इंटरप्राइजेज का लाइसेंस निरस्त करते हुए कार्रवाई की। इस पर शासन ने माधव ड्रग हाउस का निरीक्षण करने के लिए लखनऊ मुख्यालय ने आदेश दिया। 

पहले दिन 10, दूसरे दिन 12 घंटे जांच
लखनऊ मुख्यालय के आदेश पर औषधि विभाग की टीम ने शनिवार को छापा मारा था। इसमें मथुरा के औषधि निरीक्षक अनिल आनंद और फिरोजाबाद के औषधि निरीक्षक सुनील कुमार को शामिल किया गया। आगरा के औषधि निरीक्षक राजकुमार शर्मा को शाम को बुलाया गया था। जांच के पहले दिन 10 घंटे तक रिकार्ड खंगाले और रविवार को 12 घंटे तक जांच की गई। 

टिटनेस के 14640 इंजेक्शन जब्त
औषधि विभाग की जांच में टिटनेस से भरे 122 कार्टन मिले थे, एक कार्टन में 120 इंजेक्शन थे। इस तरह से 14640 इंजेक्शन को जब्त किए हैं। यह खुले में रखे थे, इनको रेफ्रिजरेटर में निश्चित तापमान पर रखना होता है। इसका कोर्ट में मुकदमा दर्ज कराया जाएगा।  

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