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राष्ट्रीय मैकश एवार्ड से नवाजे गए प्रो. अख्तर उल वासे
ब्यूरो, अमर उजाला
Updated Mon, 20 Apr 2015 01:40 AM IST
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सूफी शायर अल्लामा मैकश की याद में बज्म ए मैकश संस्था ने उर्दू भाषा और साहित्य के लिए प्रो. अख्तर उल वासे को इस साल के राष्ट्रीय मैकश एवार्ड से नवाजा है। रविवार को ग्रांड होटल में आयोजित समारोह में पद्मश्री प्रो. वासे ने आध्यात्म के जरिए दुनिया में भारत को महान शक्ति के रूप में उभरने की उम्मीद जताई।
समारोह की शुरुआत डा. इरशाद अहमद के कलाम से हुई। प्रो. वासे को राष्ट्रीय मैकश एवार्ड से संस्था के संरक्षक सैयद अजमल अली शाह नियाजी ने स्मृति चिह्न और मानपत्र सौंपकर नवाजा। सैयद शब्बीर अली शाह ने रजत पदक प्रदान किया। बज्म ए मैकश महासचिव डा. नसरीन बेगम और सैयद मेराजुद्दीन ने मोमेंटो दिया। अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के अरबी विभाग चेयरमैन प्रो. मसूद अनवर अलवी ने शोधपत्र पेश करते हुए कहा कि सूफियों के नजदीक सबसे ज्यादा अहमियत मोहब्बत की है।
एएमयू के ही डा. खुसरो कासिम ने कहा कि मैकश ने आंख ही ऐसे माहौल में खोली जहां सबसे पहले तसव्वुफ का सबक दिया जाता है। मुख्य अतिथि जस्टिस (रिटा.) सुहेल एजाज सिद्दीकी ने कहा कि तहजीब में आगरा का अहम स्थान रहा है। आगरा में मैकश के नाम से प्राइमरी स्कूल होना चाहिए। प्रो. वासे ने कहा कि धर्म निरपेक्ष हिंदुस्तान को मजबूत करने में मैकश के संदेश का प्रयोग करें। समारोह में अमीर अहमद, शाहिद नदीम, महमूद अहमद, शशि टंडन, माहिर अकबराबादी, डा. विजय शर्मा, केसी श्रीवास्तव, अरुण डंग, समी अगाई, डा. सिराज कुरैशी आदि मौजूद रहे। संचालन डा. नसरीन बेगम ने किया।
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इस्लाम-मुसलमान के दुश्मन हैं आतंकी संगठन
आगरा। राष्ट्रीय मैकश एवार्ड से नवाजे गए पद्मश्री प्रो. अख्तर उल वासे ने कहा कि आईएसआईएस, बोको हरम, अलकायदा समेत तमाम आतंकी संगठन जो इस्लाम के नाम पर खून बहा रहे हैं, वह असलियत में इस्लाम और मुसलमानों के दुश्मन हैं। वह अपनी करतूतों से मुसलमानों के लिए दुनिया भर में जमीन तंग कर रहे हैं। 24-25 फरवरी को मक्का मदीना में दुनिया भर के मुसलमानों की बैठक आतंकवाद के मुद्दे पर हुई, जिसमें भारतीय मुसलमानों ने आगे बढ़कर आतंकवाद से लड़ाई लड़ने का फैसला किया। प्रो. वासे ने कहा कि सूफी और आध्यात्म में भारत दुनिया का नेतृत्व कर सकता है। सूफी नाम या धर्म नहीं पूछते, वह बस भूखे को खाना खिलाते हैं। प्रो. वासे ने पद्मश्री पुरस्कार पर जदयू नेता शरद यादव के विवादित बयान पर कहा कि उन्हें सोच समझकर बयान देना चाहिए।
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समारोह की शुरुआत डा. इरशाद अहमद के कलाम से हुई। प्रो. वासे को राष्ट्रीय मैकश एवार्ड से संस्था के संरक्षक सैयद अजमल अली शाह नियाजी ने स्मृति चिह्न और मानपत्र सौंपकर नवाजा। सैयद शब्बीर अली शाह ने रजत पदक प्रदान किया। बज्म ए मैकश महासचिव डा. नसरीन बेगम और सैयद मेराजुद्दीन ने मोमेंटो दिया। अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के अरबी विभाग चेयरमैन प्रो. मसूद अनवर अलवी ने शोधपत्र पेश करते हुए कहा कि सूफियों के नजदीक सबसे ज्यादा अहमियत मोहब्बत की है।
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एएमयू के ही डा. खुसरो कासिम ने कहा कि मैकश ने आंख ही ऐसे माहौल में खोली जहां सबसे पहले तसव्वुफ का सबक दिया जाता है। मुख्य अतिथि जस्टिस (रिटा.) सुहेल एजाज सिद्दीकी ने कहा कि तहजीब में आगरा का अहम स्थान रहा है। आगरा में मैकश के नाम से प्राइमरी स्कूल होना चाहिए। प्रो. वासे ने कहा कि धर्म निरपेक्ष हिंदुस्तान को मजबूत करने में मैकश के संदेश का प्रयोग करें। समारोह में अमीर अहमद, शाहिद नदीम, महमूद अहमद, शशि टंडन, माहिर अकबराबादी, डा. विजय शर्मा, केसी श्रीवास्तव, अरुण डंग, समी अगाई, डा. सिराज कुरैशी आदि मौजूद रहे। संचालन डा. नसरीन बेगम ने किया।
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इस्लाम-मुसलमान के दुश्मन हैं आतंकी संगठन
आगरा। राष्ट्रीय मैकश एवार्ड से नवाजे गए पद्मश्री प्रो. अख्तर उल वासे ने कहा कि आईएसआईएस, बोको हरम, अलकायदा समेत तमाम आतंकी संगठन जो इस्लाम के नाम पर खून बहा रहे हैं, वह असलियत में इस्लाम और मुसलमानों के दुश्मन हैं। वह अपनी करतूतों से मुसलमानों के लिए दुनिया भर में जमीन तंग कर रहे हैं। 24-25 फरवरी को मक्का मदीना में दुनिया भर के मुसलमानों की बैठक आतंकवाद के मुद्दे पर हुई, जिसमें भारतीय मुसलमानों ने आगे बढ़कर आतंकवाद से लड़ाई लड़ने का फैसला किया। प्रो. वासे ने कहा कि सूफी और आध्यात्म में भारत दुनिया का नेतृत्व कर सकता है। सूफी नाम या धर्म नहीं पूछते, वह बस भूखे को खाना खिलाते हैं। प्रो. वासे ने पद्मश्री पुरस्कार पर जदयू नेता शरद यादव के विवादित बयान पर कहा कि उन्हें सोच समझकर बयान देना चाहिए।