Agra: ताजमहल के आसपास दुकानें बंद कराने की कार्रवाई दो दिन से रुकी, एडीए को कानूनी सलाह का इंतजार
सुप्रीम कोर्ट ने 26 सितंबर को ताजमहल की दीवार से 500 मीटर की परिधि में सभी व्यावसायिक गतिविधियां बंद करने के आदेश दिए थे। जिसके अनुपालन के लिए एडीए ने प्रतिष्ठानों को नोटिस देकर 17 अक्तूबर तक व्यवसाय बंद करने का अल्टीमेटम दिया था। यह मियाद खत्म हो चुकी है।
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आगरा विकास प्राधिकरण और प्रशासन को सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ताओं की सलाह का इंतजार है। कानूनी सलाह के इंतजार में ही ताजमहल के 500 मीटर के दायरे में दुकानों को हटाने की कार्रवाई दो दिन से रुकी है। बृहस्पतिवार को भी ताजमहल के आसपास व्यावसायिक गतिविधियां बंद नहीं कराई जाएंगी।
आगरा विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष चर्चित गौड़ ने बताया कि बृहस्पतिवार तक विधिक राय मिलने की उम्मीद है। सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ताओं से लगातार संपर्क स्थापित किया जा रहा है। सलाह नहीं मिलने के कारण बृहस्पतिवार को दुकानों को जबरन बंद नहीं कराया जाएगा। एडीए की विधिक सेल वरिष्ठ अधिवक्ताओं के संपर्क कर रही है। कानूनी सलाह मिलते ही आगे की स्थिति स्पष्ट हो जाएगी।
सुप्रीम कोर्ट ने दिया है यह आदेश
ताजमहल पश्चिमी गेट मार्केट एसोसिएशन की याचिका पर 26 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने ताजमहल की दीवार से 500 मीटर की परिधि में सभी व्यावसायिक गतिविधियां बंद करने के आदेश दिए थे। जिसके अनुपालन के लिए एडीए ने 500 मीटर क्षेत्र का पहले सीमा निर्धारण कराया और फिर वहां संचालित व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को नोटिस देकर 17 अक्तूबर तक व्यवसाय बंद करने का अल्टीमेटम दिया था।
मुख्यमंत्री से लगाई थी गुहार
एडीए की मियाद खत्म होने से एक दिन पहले ही ताजगंज के व्यापारियों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और मुख्य सचिव दुर्गाशंकर मिश्रा से लखनऊ में प्रत्यावेदन सौंपा। त्योहार पर व्यावसायिक गतिविधियां बंद नहीं कराने की मांग रखी। मुख्य सचिव के निर्देश पर 17 अक्तूबर को जिलाधिकारी नवनीत चहल, एडीए उपाध्यक्ष चर्चित गौड़ सहित 15 विभागों के अधिकारियों के साथ ताजगंज के व्यापारियों की बैठक हुई।
जिसके बाद प्रशासन ने आगे की कार्रवाई करने से पहले सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ताओं से इस मामले में विधिक राय लेने का निर्णय किया। परंतु दो दिन में विधिक राय को लेकर सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने रुचि नहीं दिखाई। जिसके कारण मामला अधर में फंसा है। यदि एडीए सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन नहीं कराता तो अवमानना के मामले में अधिकारियों पर कार्रवाई हो सकती है। ऐसे में एडीए और प्रशासन फूंक-फूंक कर कदम रख रहे हैं।