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Mental Health: युवाओं में बढ़ रही है तनाव-अवसाद की समस्या, जानें वो वजह...जो दे रहीं मानसिक बीमारी
Thu, 27 Feb 2025 10:08 AM IST
धीरेन्द्र सिंह
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Thu, 27 Feb 2025 10:08 AM IST
सार
लंबे समय तक बने रहने वाली तनाव की समस्या उच्च रक्तचाप का भी कारण बन सकती है जिसका असर प्रतिरक्षा प्रणाली की कमजोरी और हृदय रोग जैसी समस्याओं को बढ़ाने का कारण बन सकता है। आइए जानते हैं कि युवाओं में बढ़ रही है तनाव-अवसाद की समस्या को कैसे पहचानें और इसकी रोकथाम के लिए क्या किया जाना चाहिए?
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स्ट्रेस, तनाव
- फोटो : Freepik.com
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विस्तार
घर-कार की किस्त, बच्चों की पढ़ाई का खर्च, कार्य का दबाव ऐसी कई वजह हैं, जिनसे युवा मानसिक बीमार हो रहे हैं। मानसिक स्वास्थ्य संस्थान एवं चिकित्सालय में आने वाले 20-22 फीसदी अवसाद के मरीजों में 70-75 फीसदी 30 से 45 साल के युवा हैं। ऐसे मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
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संस्थान निदेशक प्रो. दिनेश राठौर ने बताया कि ओपीडी में रोजाना 280-300 तक मरीज आते हैं। इनमें तनाव और अवसाद के मरीजों की संख्या 20-22 फीसदी होती है। 30-45 साल के मरीजों की संख्या 70-75 फीसदी है। इसके पीछे कार्य का दबाव, समय पर किस्त चुकाना, किराया, बच्चों की पढ़ाई, मनमाफिक वेतन-नौकरी नहीं मिलना वजह मिली। शुरूआत में चिड़चिड़ापन, गुस्सा अधिक आना, नींद कम आना और तनाव की दिक्कत बनने लगी। इससे घर में घरेलू कलह भी होने लगी। लंबे समय तक ऐसी स्थिति के बाद अवसाद हो गया। कई ऐसे भी मरीज मिले, जो दूसरों से तुलना के चलते बीमार पड़ गए। इन मरीजों के इलाज के साथ काउंसलिंग भी की गई। इससे मरीज ठीक भी हुए।
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आभासी मापदंड से भी आ रहा अवसाद
एसएन मेडिकल कॉलेज के मानसिक विभागाध्यक्ष डाॅ. विशाल सिन्हा ने बताया कि युवाओं ने दूसरों की नौकरी, मकान, कार, जीवनशैली आदि देखकर आभासी मापदंड बना लिए हैं। कई बार व्यक्ति उस क्षमता का भी नहीं होता है। इससे वह कुंठित होने लगता है। कई बार कामकाजी युवा कार्य के दबाव या फिर अधिकारी के खराब व्यवहार के चलते भी अवसाद के शिकार हो रहे हैं। इनकी संख्या तेजी से बढ़ रही है। ओपीडी में 20-25 फीसदी मरीज कामकाजी युवा हैं।
एसएन मेडिकल कॉलेज के मानसिक विभागाध्यक्ष डाॅ. विशाल सिन्हा ने बताया कि युवाओं ने दूसरों की नौकरी, मकान, कार, जीवनशैली आदि देखकर आभासी मापदंड बना लिए हैं। कई बार व्यक्ति उस क्षमता का भी नहीं होता है। इससे वह कुंठित होने लगता है। कई बार कामकाजी युवा कार्य के दबाव या फिर अधिकारी के खराब व्यवहार के चलते भी अवसाद के शिकार हो रहे हैं। इनकी संख्या तेजी से बढ़ रही है। ओपीडी में 20-25 फीसदी मरीज कामकाजी युवा हैं।
ये दिए सुझाव
फिटनेस: योग, व्यायाम करने से दिमाग में हैप्पी हार्मोन पैदा होते हैं, जिससे तनाव कम होता है।
हॉबी: तनाव कम करने के लिए पेंटिंग, संगीत, लेखन समेत अपनी हॉबी को पूरा करें।
मित्र: ऐसे मित्र बनाएं, जिससे मन की बात कहें। वह मजाक न बनाते हुए आपको समझे।
सामाजिक: सामाजिक गतिविधियों में खुद को सक्रिय रखें। समाज के लिए कार्य करें।
तुलना: दूसरे की सुख-सुविधा या नौकरी समेत अन्य से तुलना कतई न करें।
फिटनेस: योग, व्यायाम करने से दिमाग में हैप्पी हार्मोन पैदा होते हैं, जिससे तनाव कम होता है।
हॉबी: तनाव कम करने के लिए पेंटिंग, संगीत, लेखन समेत अपनी हॉबी को पूरा करें।
मित्र: ऐसे मित्र बनाएं, जिससे मन की बात कहें। वह मजाक न बनाते हुए आपको समझे।
सामाजिक: सामाजिक गतिविधियों में खुद को सक्रिय रखें। समाज के लिए कार्य करें।
तुलना: दूसरे की सुख-सुविधा या नौकरी समेत अन्य से तुलना कतई न करें।