चुनावी मुद्दा: हर साल बाढ़ से जूझते हैं कासगंज के गांव, चुनाव में वादे तो होते हैं, बाद में भूल जाते हैं नेताजी
कासगंज के गंजडुंडवारा क्षेत्र में हर साल बाढ़ का पानी तबाही मचाता है। हर चुनाव में बाढ़ की समस्या का समाधान कराने के लिए वादे तो होते हैं, लेकिन चुनाव के बाद नेताओं के वादे बाढ़ में बह जाते हैं। अब तक समस्या का समाधान नहीं हुआ है।
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कासगंज जिले के गंजडुंडवारा क्षेत्र में हर साल बाढ़ आती है। हर चुनाव में नेताजी इस समस्या के पुख्ता इंतजाम का भरोसा देते हैं, लेकिन हकीकत में कोई भी जनप्रतिनिधि इस समस्या से छुटकारा नहीं दिला पाया। योजनाएं कागजी नाव में सफर तय करती रहीं और हर बार पानी में फसलें डूबती रहीं और किसान बर्बाद होते रहे। अब विधानसभा चुनाव में बाढ़ का मुद्दा फिर उभर कर सामने आया है। जब क्षेत्र की जनता पूछ रही है कि इस समस्या से कब समाधान मिलेगा।
गंजडुंडवारा क्षेत्र में तीन दर्जन से अधिक गांव गंगा खादर में हैं। यहां के ग्रामीणों में उम्मीद रहती है कि शायद इस चुनाव के बाद बाढ़ की समस्या का समाधान मिल जाए, लेकिन सरकारें बनती हैं और उसके बाद इस ओर नेताओं की गंभीरता नहीं दिखती। ग्रामीणों का आरोप है कि आज तक किसी दल ने बाढ़ की समस्या से निपटने के पुख्ता इंतजाम नहीं किए।
ये गांव हैं बाढ़ प्रभावित
गांव कादरगंज, बरौना, समसपुर, बगवाश, नवाबगंज, नगरिया, इंदा, मिहौला, निबिया, प्रीतम नगर हडोरा, सिकंदरपुर, लालूपुर, नरदोली, नगला हीरा, सुनगढ़ी, उलाई खेड़ा, असत गढ़ किला, नगला खंदारी, काली गढिय़ा, रिकेरा, मूंजखेड़ा, नगला शीशम आदि गांव के किसान बाढ़ की तबाही झेलते हैं। किसानों का कहना है कभी भी न तो सत्ता पक्ष ने समस्या के निस्तारण को ठोस पहल की और न ही विपक्ष ने इसे मुद्दा बनाकर उछाला।
क्या कहते हैं ग्रामीण
इंदा जसनपुर के पूर्व प्रधान सुरेश कुमार ने बताया कि बाढ़ रोकने के लिए पक्के बांध बनें। बाढ़ आने से तीन दर्जन से अधिक गांव का संपर्क टूट जाता है पिछले चुनावों में यह मुद्दा बना लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ। लोगों की मांग पर ठोस पहल नहीं हुई।
कादरगंज के संग्राम सिंह ने कहा कि बाढ़ के साथ-साथ कटान की अहम समस्या है गांव मिहोला में हर बार कटान होता है। इस बार इस गांव के पास जो बांध है उससे मात्र 10 मीटर दूरी पर कटान हुआ। यदि बांध कट जाता तो पूरा गांव डूब जाता।
बरौना के राजवीर सिंह ने कहा कि बरौना, समसपुर, नगला खंदारी, नेथरा में भी बाढ़ व कटान का खतरा रहता है। प्रत्याशियों ने जब जब इस समस्या से समाधान का भरोसा दिया। तब तब उन्हें विधानसभा तक पहुंचाने में तराई के लोगों न अहम भूमिका निभाई।
नवादा के नेम चंद ने कहा कि क्षेत्र में जन सहयोग से एक कच्चा बांध लगभग 50 वर्ष पूर्व बना। इसी बांध पर हमेशा मरम्मत हो जाती है। पक्के बांध का कोई इंतजाम नहीं है जब तक पक्का बांध नहीं बनेगा तब तक इस समस्या से निपटना मुश्किल होगा।