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नमूना दिखाया बढ़िया, जूते और मोजे भेजे घटिया
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मैनपुरी। परिषदीय स्कूलों में पढ़ने वाले जिले के 1.59 लाख बच्चों को जूते और मोजे के लिए अभी और इंतजार करना पड़ेगा। जिस कंपनी से छात्रों के जूते-मोजे मंगाए गए थे, उसने उसे मानक के विपरीत भेज दिए। कंपनी ने नमूना बढ़िया दिखाया और जूते-मोजे घटिया किस्म के भेज दिए। डीएम ने शिक्षा विभाग को सभी जूते-मोजे को वापस करने के निर्देश दिए हैं।
सर्व शिक्षा अभियान के तहत परिषदीय, राजकीय तथा सहायता प्राप्त स्कूलों में बच्चों को ड्रेस और पाठ्य पुस्तकों के साथ जूता और मोजा भी उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। जिले में इस व्यवस्था के लिए हरियाणा की संस्था से जूते और मोजे क्रय करने का प्रस्ताव बना। सप्लाई आते ही गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे थे।
आरोप था कि कंपनी से निर्धारित सैंपल के हिसाब से आपूर्ति नहीं दी है। डीएम प्रमोद कुमार उपाध्याय ने शिकायतों का संज्ञान गंभीरता से लिया। उन्होंने बीएसए विजय प्रताप सिंह, लेखाधिकारी अशोक कुमार शर्मा तथा खंड शिक्षाधिकारी को जांच अधिकारी नियुक्ति किया।
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जांच में पाया गया कि जूते और मोजे मानक के अनुरूप नहीं हैं। इस पर डीएम ने जूते और मोजे वापस करने के निर्देश दिए हैं। वहीं, उम्मीद जताई जा रही है कि जूते और मोजे आपूर्ति अगस्त तक मिल सकेगी।
लोगो और मुहर नहीं लगी है जूतों पर
कार्यदायी संस्था ने नमूने के लिए जो जूते और मोजे उपलब्ध कराए थे उनमें संबंधित कंपनी की मुहर के साथ ही लोगो भी लगा हुआ था। वितरण के लिए जो सप्लाई उपलब्ध कराई उस पर न कोई मुहर लगी है और न ही लोगो।
संस्था को डिबार करने की संस्तुति की
जूता और मोजा वितरण के लिए राज्य परियोजना निदेशालय से टेंडर जारी हुआ था। इस टेंडर प्रक्रिया के माध्यम से ही हरियाणा की कार्यदायी संस्था को मैनपुरी में जूता और मोजे वितरण की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। संस्था ने नमूने में जो जूते भेजे उससे कहीं घटिया किस्म के जूते और मोजों की सप्लाई की गई।
जिलाधिकारी ने जांच टीम की रिपोर्ट के बाद निदेशक को पत्र लिखकर संबंधित कार्यदायी संस्था को तीन वर्ष तक के लिए डिबार करने की संस्तुति की है।
डीएम के निर्देशन पर टीम ने जांच की थी। जांच में जूते और मोजे नमूने के अनुसार नहीं प्राप्त हुए हैं, जिन्हें वापस भेजा जा रहा है।
-विजय प्रताप सिंह, बीएसए
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सर्व शिक्षा अभियान के तहत परिषदीय, राजकीय तथा सहायता प्राप्त स्कूलों में बच्चों को ड्रेस और पाठ्य पुस्तकों के साथ जूता और मोजा भी उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। जिले में इस व्यवस्था के लिए हरियाणा की संस्था से जूते और मोजे क्रय करने का प्रस्ताव बना। सप्लाई आते ही गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे थे।
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आरोप था कि कंपनी से निर्धारित सैंपल के हिसाब से आपूर्ति नहीं दी है। डीएम प्रमोद कुमार उपाध्याय ने शिकायतों का संज्ञान गंभीरता से लिया। उन्होंने बीएसए विजय प्रताप सिंह, लेखाधिकारी अशोक कुमार शर्मा तथा खंड शिक्षाधिकारी को जांच अधिकारी नियुक्ति किया।
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जांच में पाया गया कि जूते और मोजे मानक के अनुरूप नहीं हैं। इस पर डीएम ने जूते और मोजे वापस करने के निर्देश दिए हैं। वहीं, उम्मीद जताई जा रही है कि जूते और मोजे आपूर्ति अगस्त तक मिल सकेगी।
लोगो और मुहर नहीं लगी है जूतों पर
कार्यदायी संस्था ने नमूने के लिए जो जूते और मोजे उपलब्ध कराए थे उनमें संबंधित कंपनी की मुहर के साथ ही लोगो भी लगा हुआ था। वितरण के लिए जो सप्लाई उपलब्ध कराई उस पर न कोई मुहर लगी है और न ही लोगो।
संस्था को डिबार करने की संस्तुति की
जूता और मोजा वितरण के लिए राज्य परियोजना निदेशालय से टेंडर जारी हुआ था। इस टेंडर प्रक्रिया के माध्यम से ही हरियाणा की कार्यदायी संस्था को मैनपुरी में जूता और मोजे वितरण की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। संस्था ने नमूने में जो जूते भेजे उससे कहीं घटिया किस्म के जूते और मोजों की सप्लाई की गई।
जिलाधिकारी ने जांच टीम की रिपोर्ट के बाद निदेशक को पत्र लिखकर संबंधित कार्यदायी संस्था को तीन वर्ष तक के लिए डिबार करने की संस्तुति की है।
डीएम के निर्देशन पर टीम ने जांच की थी। जांच में जूते और मोजे नमूने के अनुसार नहीं प्राप्त हुए हैं, जिन्हें वापस भेजा जा रहा है।
-विजय प्रताप सिंह, बीएसए