Heat Stroke: लू से बचाव के लिए अपनाएं ये सावधानियां, गर्मी में बच्चों का इस तरह रखें ध्यान
गर्मी व लू ने बच्चों का हाल बेहाल कर रखा है। एसएन मेडिकल कॉलेज में रोज उल्टी दस्त और बुखार के 160 तक बच्चे ओपीडी में आ रहे हैं। ऐसे में चिकित्सकों ने बच्चों का खास तरह से ध्यान रखने की सलाह दी है।
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आगरा में भीषण गर्मी और लू के थपेड़ों ने बच्चों की हालत बिगाड़ दी है। उल्टी-दस्त, बुखार और पीलिया के रोजाना 25 से 30 बच्चे एसएन मेडिकल कॉलेज में भर्ती करने पड़ रहे हैं। शरीर में पानी की कमी से इनके मुंह और आंख भी शुष्क हो गए हैं। चमड़ी बेजान हो गई है।
बाल रोग विभाग के डॉक्टर नीरज यादव ने बताया कि एसएन मेडिकल कॉलेज में रोजाना 140 से 160 बच्चे ओपीडी और इमरजेंसी में आ रहे हैं। लू लगने, दूषित पानी-भोजन से उल्टी-दस्त, बुखार, खांसी, सिर में दर्द, पेट में दर्द की शिकायत हो रही है। 25 से 30 बच्चों की हालत तो ऐसी होती है, जिनको भर्ती करना पड़ रहा है। तीन से पांच बच्चों के तो मल में रक्त भी आ रहा है। जांच में 15 से 20 बच्चों में पानी की बेहद कमी मिल रही है, इनके होठ, मुंह और आंखों में नमी ही नहीं होती। त्वचा भी शुष्क पड़ गई रही, पेशाब भी नहीं आ रहा। बच्चों को तत्काल भर्ती कर ड्रिप चढ़ाई जा रही और अन्य दवाई दी जा रही है। 24 घंटे के इलाज के बाद राहत मिलती है।
20 बेड की अतिरिक्त व्यवस्था की
प्राचार्य डॉ प्रशांत गुप्ता ने बताया कि एसएन इमरजेंसी में आगरा के अलावा फिरोजाबाद, मथुरा, अलीगढ़, मैनपुरी समेत आसपास के जिलों के भी बच्चे लू और डायरिया के आ रहे हैं। इमरजेंसी के 20 बेड और बाल रोग विभाग के 102 बेड करीब फुल चल रहे हैं। गर्मी को देखते हुए इमरजेंसी में 10 बेड और वार्ड में 20 बेड की अतिरिक्त व्यवस्था है। बढ़ते मामलों को देखते हुए दवाओं का भी स्टॉक किया गया है।
फास्ट फूड से बच्चों को हो रहा डायरिया
आगरा पीडियाट्रिक एसोसिएशन के उपाध्यक्ष डॉ. अरुण जैन ने बताया कि बीमार हो रहे बच्चों में से 70 फीसदी में उल्टी-दस्त, पेट में दर्द की समस्या मिल रही है। चिकित्सक की पूछताछ में अधिकांश मामलों में बताया गया कि बच्चे ने फास्ट फूड, दूषित पानी और बाजार में बिकने वाली पैकेट बंद सामग्री खाई। इससे पेट में इंफेक्शन होने से उल्टी दस्त हुए। लू लगने से बुखार भी आ रहा है। गर्मी और धूप में खेलने पर बच्चों को लू लगने के मामले भी बीते महीने के मुकाबले करीब ढाई गुना बढ़ गए हैं।
इस स्थिति में तत्काल अस्पताल में भर्ती कराएं
1 - खाने-पीने के मुकाबले उल्टी-दस्त अधिक होना।
2 - बुखार के साथ उल्टी और दस्त होना।
3 - पेशाब बंद हो जाना, होठों पर पपड़ी जमना
4 - आंख और मुंह की नमी सूख जाना।
5 - बच्चा सुस्त होना, कमजोरी होना।
6 - बच्चों के मल के साथ खून आना।
7 - चमड़ी दबाने पर देर से सामान्य स्थिति में आना।
बचाव के लिए करें ये उपाय
1 - सुबह 10 बजे के बाद बच्चों को घर से बाहर न निकलने दें।
2 - रसदार फल जैसे तरबूज, खरबूज, अंगूर, खीरा, ककड़ी खूब खिलाएं।
3 - हाई प्रोटीन वाला भोजन दें, थोड़ी-थोड़ी मात्रा में चार से पांच बार खाना खिलाएं।
4 - नींबू पानी, शिकंजी, छाछ, लस्सी नारियल पानी खूब पिलाएं।
5 - बाजार में गन्ने का जूस पिलाने, फास्ट फूड खिलाने से बचें।
6 - बासी भोजन और पहले से कटे-गले फल खिलाने से बचें।
7 - दस्त होने पर ओआरएस का घोल पिलाते रहें।