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आगरा: बिजली कर्मचारियों ने रखी हड़ताल, सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी, ये हैं मांगें
Wed, 03 Feb 2021 09:50 AM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला,आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला,आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Wed, 03 Feb 2021 09:50 AM IST
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हड़ताल (सांकेतिक तस्वीर)
- फोटो : अमर उजाला
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बिजली कर्मचारियों ने बुधवार को कार्य बहिष्कार किया। दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (डीवीवीएनएल) मुख्यालय में कार्य बहिष्कार कर इसका विरोध जताया। उन्होंने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए अपनी मांगें दोहराईं। हड़ताल के कारण जनपद में बिल जमा करने, फॉल्ट सही करने का काम प्रभावित हुआ। हालांकि बिजली की आपूर्ति प्रभावित नहीं हुई।
विद्युत कर्मचारी संघर्ष समिति ने मंगलवार को इस संबंध में एलान किया था। बुधवार को ट्रांसमिशन, वितरण, पॉवर व अन्य यूनिटों के कर्मचारी एमडी कार्यालय पर एकत्रित हुए। क्षेत्रीय सचिव ओपी गुप्ता ने बताया कि राजस्व वसूली, बिल जमा कार्य ठप रहा। फॉल्ट सही हुए लेकिन त्वरित नहीं वहीं आपूर्ति सुचारू रही। डीवीवीएनल की ओर से समिति के संयोजक ओपी गुप्ता ने कहा कि केंद्र व राज्य सरकार ने विद्युत कर्मचारियों के विरुद्ध नई-नई नीतियां बनाकर निजीकरण करने के लिए तैयार है। इससे उपभोक्ता और विद्युत कर्मी दोनों को नुकसान हो रहा।
ये हैं मांगें
इलैक्ट्रिसिटी एमेंडमेंट बिल-2020 को निरस्त किया जाए।
ग्रेटर नोएडा का बिजली फ्रैंचाइजी करार निरस्त किया जाए।
केरल व हिमाचल की तर्ज पर यूपीएसआईबी गठित करें।
बिजलीकर्मियों के लिए पुरानी पेंशन वर्ष 2020 से लागू हो।
रिक्त पद भरे जाएं। नियमित पदों पर नियमित भर्तियां हों।
वेतन विसंगतियां दूर करने के लिए एक कमेटी बनाई जाए।
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विद्युत कर्मचारी संघर्ष समिति ने मंगलवार को इस संबंध में एलान किया था। बुधवार को ट्रांसमिशन, वितरण, पॉवर व अन्य यूनिटों के कर्मचारी एमडी कार्यालय पर एकत्रित हुए। क्षेत्रीय सचिव ओपी गुप्ता ने बताया कि राजस्व वसूली, बिल जमा कार्य ठप रहा। फॉल्ट सही हुए लेकिन त्वरित नहीं वहीं आपूर्ति सुचारू रही। डीवीवीएनल की ओर से समिति के संयोजक ओपी गुप्ता ने कहा कि केंद्र व राज्य सरकार ने विद्युत कर्मचारियों के विरुद्ध नई-नई नीतियां बनाकर निजीकरण करने के लिए तैयार है। इससे उपभोक्ता और विद्युत कर्मी दोनों को नुकसान हो रहा।
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ये हैं मांगें
इलैक्ट्रिसिटी एमेंडमेंट बिल-2020 को निरस्त किया जाए।
ग्रेटर नोएडा का बिजली फ्रैंचाइजी करार निरस्त किया जाए।
केरल व हिमाचल की तर्ज पर यूपीएसआईबी गठित करें।
बिजलीकर्मियों के लिए पुरानी पेंशन वर्ष 2020 से लागू हो।
रिक्त पद भरे जाएं। नियमित पदों पर नियमित भर्तियां हों।
वेतन विसंगतियां दूर करने के लिए एक कमेटी बनाई जाए।