अमर उजाला एक्सक्लूसिव: 63 साल में पहली बार 4000 रुपये कुंतल तक बिका आलू
- कोरोना काल में 'सब्जियों के राजा' ने तोड़े सभी रिकॉर्ड, पहली बार इतना महंगा बिका
- ताजनगरी में आलू की खेती 1957 में शुरू हुई थी, 1990 में मुख्य फसल में शामिल हुआ
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आगरा में आलू की खेती शुरू होने के 63 साल के इतिहास में किसानों को जितना मुनाफा इस बार मिला है, उतना पहले कभी नहीं मिला। कोरोना महामारी के दौर में आलू 4000 रुपये प्रति कुंतल तक बिक गया। नवंबर के आखिर और दिसंबर के शुरू तक तेजी बनी रही। पिछले साल नवंबर में आलू फेंकना पड़ा था क्योंकि कीमत 500 रुपये कुंतल से कम रह गई थी।
जिले में हर साल 70 से 75 हजार हेक्टेयर में आलू की बुवाई होती है। इसमें 20 से 21 लाख मीट्रक टन की पैदावार है। सामान्य तौर पर आलू 600 से 1000 रुपये तक ही बिका। बीते दस साल की बात करें तो वर्ष 2014 में आलू दो हजार रुपये प्रति क्विंटल तक बिका, जो सबसे बेहतर भाव था।
वर्ष 2020 में आलू की बंपर कीमत मिली। मार्च में 1209 रुपये कीमत थी। अगले महीने कोरोना वायरस के कारण लॉकडाउन लग गया। मई से आलू की कीमतें तेजी से बढ़ीं। मई में आलू का भाव 1500 रुपये क्विंटल था जो दिसंबर तक 4000 रुपये क्विंटल तक पहुंच गया।
तब आसपास के गांवों के लोग देखने आए थे आलू की खेती
खंदौली क्षेत्र के गोविंदपुर गांव में चौधरी चेतराम सिंह ने वर्ष 1957 में आलू की पहली बार खेती की। इनकी चौथी पीढ़ी के यशपाल सिंह के अनुसार, बाबा ने बताया कि जब आलू की खेती शुरू की तो आसपास के गांव से लोग देखने आते थे। वर्ष 1970 में आसपास के अन्य गांवों में आलू की खेती होने लगी।
कभी नहीं रहा इतना भाव
खंदौली निवासी यशपाल सिंह ने कहा कि हमारे परदादा ने 30 बीघा आलू की खेती कर शुरुआत की। इसके बाद हमारे दादा ने खेती संभाली और अब पट्टे पर लेकर लगभग ढाई हजार बीघा पर आलू की खेती कर रहे हैं। तब से अब तक आलू का भाव इतना कभी नहीं रहा।
भारतीय किसान यूनियन के जिलाध्यक्ष राजवीर लवानियां ने कहा कि 1972 में हमारे दादा ने आलू की खेती शुरू की। आलू में अन्य फसलों के मुकाबले लागत अधिक है, हर साल लगभग आलू में घाटा ही उठाना पड़ता था। इस बार 4000 रुपये के भाव मिलने से पुराने घाटे की भरपाई हुई।
2011: 369 से 680
2012: 345 से 1258
2013: 596 से 1395
2014: 687 से 2034
2015: 512 से 770
2016: 497 से 1524
2017: 462 से 588
2018: 516 से 1360
2019: 554 से 1291
2020: 1050 से 4000
(कृषि विपणन एवं कृषि विदेश व्यापार विभाग के अनुसार )
लॉकडाउन के बाद ऐसे बढ़ी आलू की कीमत
मई- 1502
जून- 1654
जुलाई- 1995
अगस्त- 2226
सितंबर- 2464
अक्तूबर- 2900
नवंबर- 3250
दिसंबर- 4000
(भाव रुपये प्रति कुंतल में)
जिले में आलू की फसल के आंकड़े
75 हजार हेक्टेयर तक में आलू की बुवाई
22 लाख मीट्रिक टन तक उत्पादन
280 कुंतल प्रति हेक्टेयर तक पैदावार