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Air Pollution: आगरा में बढ़ा प्रदूषण...टीटीजेड चेयरमैन ने एनजीटी में स्वीकारा, पांच साल के आंकड़े किए पेश

Sun, 07 Dec 2025 03:46 PM IST
अरुन पाराशर अमित कुलश्रेष्ठ, अमर उजाला, आगरा
अमित कुलश्रेष्ठ, अमर उजाला, आगरा Published by: अरुन पाराशर Updated Sun, 07 Dec 2025 03:46 PM IST
सार

टीटीजेड चेयरमैन की ओर से एनजीटी में दाखिल इस हलफनामे में कहा गया है कि पांच साल में प्रदूषण में काफी गिरावट आई है, लेकिन जो आंकड़े प्रस्तुत किए गए हैं। उनमें बीते साल से इस साल प्रदूषण की मात्रा बढ़ी है।

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Pollution increased in Agra, TTZ Chairman admitted in NGT
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला प्रिंट

विस्तार

आगरा शहर की जहरीली हवा के आंकड़ों से ऑटोमेटिक स्टेशनों के जरिये छेड़छाड़ पर सुप्रीम कोर्ट फटकार लगा चुका है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को आंकड़ों की बाजीगरी के लिए नोटिस भी जारी किया गया है। वहीं, नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में दाखिल किए गए हलफनामा में टीटीजेड अथॉरिटी ने एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) के जो आंकड़े पेश किए हैं, उनमें शहर में प्रदूषण बढ़ने की बात स्वीकारी गई है।
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नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में एयर एक्शन प्लान पर दायर की गई याचिका संख्या 680/2023 में ताज ट्रेपेजियम जोन अथॉरिटी के चेयरमैन शैलेंद्र कुमार सिंह ने हलफनामा दिया है। इसमें उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी) के शहर में स्थापित 6 ऑटोमेटिक मॉनिटरिंग स्टेशनों के पांच साल के आंकड़ों को पेश किया है। इन आंकड़ों पर पहले ही सुप्रीम कोर्ट में छेड़छाड़ करने के मामले में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को नोटिस जारी किए जा चुका है।
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एनजीटी में दाखिल इस हलफनामा में कहा गया है कि पांच साल में प्रदूषण में काफी गिरावट आई है, लेकिन जो आंकड़े प्रस्तुत किए गए हैं। उनमें बीते साल से इस साल प्रदूषण की मात्रा बढ़ी है। एयर क्वालिटी इंडेक्स की मासिक रिपोर्ट में केवल जनवरी में प्रदूषण घटा, लेकिन उसके बाद से लगातार प्रदूषण तत्वों की मात्रा बढ़ी है। वर्ष 2023 के मुकाबले आठ में से पांच महीनों में इस साल प्रदूषण में बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
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नवंबर में दो दिन अच्छी, चार दिन खराब रही हवा
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों में नवंबर में केवल दो दिन एक्यूआई अच्छा रहा, जबकि चार दिन यह बेहद खराब रहा। अन्य 24 दिन मध्यम दर्ज किया गया। पर्यावरणविद और याचिकाकर्ता डॉ. शरद गुप्ता ने सवाल उठाया कि हैरतअंगेज रूप से आगरा में दो दिन ही एक्यूआई खराब रहता है। उसके बाद अचानक अच्छा होने लगता है। दरअसल, ग्रेप लागू करने से बचने के लिए आंकड़ों से छेड़छाड़ की जा रही है। देश में कहीं भी एक्यूआई में इतना बदलाव नहीं आता।

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने जो आंकड़े दिखाए हैं, वह बीते साल से ज्यादा हैं। गूगल, स्मार्ट सिटी, एक्यूआई मापक यंत्रों में आंकड़े कुछ और हैं। हमने एनजीटी में टीटीजेड के हलफनामे पर आपत्ति जताई है। -सुमीत रमन, याचिकाकर्ता

एक्यूआई कम होने की जगह बढ़ा कैसे, कौन जिम्मेदार है। आगरा में सेंसरों पर पानी का छिड़काव कर आंकड़ों से छेड़छाड़ की गई है। अमर उजाला ने वीडियो भी जारी किए थे। हमें सिर्फ असली एक्यूआई बताया जाए ताकि बचाव कर सकें। -डॉ. शरद गुप्ता, पर्यावरणविद

 प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड लगातार आंकड़ों से छेड़छाड़ कर एक्यूआई कम दिखाने पर तुला हुआ है। जब तक बीमारी का पता नहीं होगा, इलाज कैसे होगा। अस्थमा, सांस रोगियों के आंकड़े बोर्ड की झूठी रिपोर्ट की पोल खोल रहे हैं। -डॉ. संजय कुलश्रेष्ठ, पर्यावरणविद

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