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Agra News: प्रदूषण और खराब फिटनेस बन रही मां बनने में बाधा
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माई सिटी रिपोर्टर
आगरा। प्रदूषण और खराब फिटनेस महिलाओं के मातृत्व सुख में बाधक बन रहा है। 28-30 की उम्र की महिलाओं में अंडाणु कम बन रहे हैं। इससे चिकित्सक चिंतित हैं। फतेहाबाद रोड स्थित होटल में आगरा ऑब्स एंड गायनी सोसाइटी (एओजीएस) की कार्यशाला में महिलाओं में बढ़ते बांझपन, रसौली, कैंसर समेत अन्य मर्ज पर व्याख्यान दिए।
मुंबई की डॉ. सरगम सोनी ने बताया कि बढ़ता प्रदूषण, मोटापा, फास्ट फूड और खराब दिनचर्या का असर महिलाओं के अंडाणु निर्माण पर भी पड़ रहा है। 28-30 साल की 5 फीसदी महिलाओं में कम अंडाणु बन रहे हैं, इनकी गुणवत्ता भी खराब मिल रही है। यही हाल 31-35 साल की 15 फीसदी महिलाओं का है। इससे इनको गर्भधारण करने, बार-बार गर्भपात होने समेत अन्य परेशानी बन रही हैं।
कोलकाता के डाॅ. बसब मुखर्जी ने कहा कि रसौली की परेशानी बढ़ रही है। इसकी एक वजह जांच होना और महिलाओं की जागरूकता भी है। नोएडा की डॉ. शैला जमाल ने माहवारी के वक्त दर्द अधिक होने की परेशानी को सामान्य न समझने की सलाह दी।
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कहा कि कई बार ये अन्य बीमारियों की दस्तक होती है। संस्था अध्यक्ष डॉ. रिचा सिंह ने कहा कि देर से शादी करना, एल्कोहल और धूम्रपान के चलते भी बांझपन समेत अन्य परेशानी बन रही हैं।
सर्वाइकल और स्तन कैंसर के बढ़ते मामलों पर भी उन्होंने एंटी सर्वाइकल वैक्सीन लगवाने और स्तन कैंसर से बचने के लिए खुद ही स्क्रीनिंग करने पर जोर दिया। सचिव डॉ. निधि बंसल ने सभी का आभार जताया। कार्यशाला में डॉ. सरोज सिंह, डॉ. सविता त्यागी, डॉ. मधु राजपाल, डॉ. सुधा बंसल, डॉ. रत्ना शर्मा, डॉ. संध्या अग्रवाल आदि ने भी व्याख्यान दिए।
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आगरा। प्रदूषण और खराब फिटनेस महिलाओं के मातृत्व सुख में बाधक बन रहा है। 28-30 की उम्र की महिलाओं में अंडाणु कम बन रहे हैं। इससे चिकित्सक चिंतित हैं। फतेहाबाद रोड स्थित होटल में आगरा ऑब्स एंड गायनी सोसाइटी (एओजीएस) की कार्यशाला में महिलाओं में बढ़ते बांझपन, रसौली, कैंसर समेत अन्य मर्ज पर व्याख्यान दिए।
मुंबई की डॉ. सरगम सोनी ने बताया कि बढ़ता प्रदूषण, मोटापा, फास्ट फूड और खराब दिनचर्या का असर महिलाओं के अंडाणु निर्माण पर भी पड़ रहा है। 28-30 साल की 5 फीसदी महिलाओं में कम अंडाणु बन रहे हैं, इनकी गुणवत्ता भी खराब मिल रही है। यही हाल 31-35 साल की 15 फीसदी महिलाओं का है। इससे इनको गर्भधारण करने, बार-बार गर्भपात होने समेत अन्य परेशानी बन रही हैं।
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कोलकाता के डाॅ. बसब मुखर्जी ने कहा कि रसौली की परेशानी बढ़ रही है। इसकी एक वजह जांच होना और महिलाओं की जागरूकता भी है। नोएडा की डॉ. शैला जमाल ने माहवारी के वक्त दर्द अधिक होने की परेशानी को सामान्य न समझने की सलाह दी।
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कहा कि कई बार ये अन्य बीमारियों की दस्तक होती है। संस्था अध्यक्ष डॉ. रिचा सिंह ने कहा कि देर से शादी करना, एल्कोहल और धूम्रपान के चलते भी बांझपन समेत अन्य परेशानी बन रही हैं।
सर्वाइकल और स्तन कैंसर के बढ़ते मामलों पर भी उन्होंने एंटी सर्वाइकल वैक्सीन लगवाने और स्तन कैंसर से बचने के लिए खुद ही स्क्रीनिंग करने पर जोर दिया। सचिव डॉ. निधि बंसल ने सभी का आभार जताया। कार्यशाला में डॉ. सरोज सिंह, डॉ. सविता त्यागी, डॉ. मधु राजपाल, डॉ. सुधा बंसल, डॉ. रत्ना शर्मा, डॉ. संध्या अग्रवाल आदि ने भी व्याख्यान दिए।