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यूपीः अखिलेश सरकार में 18 दिन बिना स्टाफ चला ये पुलिस थाना

Tue, 18 Jul 2017 05:12 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला एटा
ब्यूरो/अमर उजाला एटा Updated Tue, 18 Jul 2017 05:12 PM IST
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police station in etah worked without staff eighteen days
यूपी पुलिस - फोटो : अमर उजाला
सपा सरकार में जिले का एक थाना बिना पुलिस स्टाफ के 18 दिन तक चलता रहा। इन दिनो़ इस थाने पर न कोई एफआईआर लिखी गई और न ही एनसीआर। पूरा थाना स्टाफ बीमार रहा और अफसरों को भनक तक नहीं लगी। 
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इस खबर को पढ़ कर  आप भले ही चौंक गए होंगे, लेकिन ये सब सौ फीसदी सच है। जी हां तत्कालीन एसएसपी विसर्जन सिंह यादव ने 18 दिन तक रिपोर्ट नहीं दर्ज करने की शिकायत पर एक दागी दरोगा को बचाने के लिए अपनी जांच रिपोर्ट में यही लिखा है। 
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एटा जिले का यह खास थाना जैथरा है। दागी दरोगा कैलाश चंद्र दुबे को बचाने के लिए तत्कालीन एएसपी विसर्जन सिंह यादव ने अपनी जांच में ऐसे-ऐसे तथ्य लिखे कि सच्चाई की कसौटी पर दूर तक खरे नहीं उतर रहे। 
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ऊंची पहुंच के कारण खुद की कलम फंसने की चिंता किए बगैर एएसपी दागी दरोगा को अभयदान देते रहे। सपा सरकार में कई मामलों में हुई जांच रिपोर्टों में अफसरों की करतूत अब सामने आई है।

ये है पूरा मामला

police station in etah worked without staff eighteen days
डेमो - फोटो : डेमो ‌प‌िक
बताया गया है कि कस्बा जैथरा के बिजेंद्र सिंह के साथ डकैती की वारदात मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने कार्रवाई के आदेश दिए थे। तत्कालीन सीओ धर्मसिंह मार्च्छल ने एसओ कैलाश चंद्र दुबे को 18 अगस्त 2016 को रिपोर्ट दर्ज करने के आदेश दिए लेकिन एसओ ने 18 दिन बाद 3 सितंबर, 2016 को रिपोर्ट दर्ज की। 

जब पीड़ित ने विलंब से रिपोर्ट दर्ज करने की शिकातय कर कानूनी कार्रवाई की मांग की तो तत्कालीन एएसपी ने मामले की जांच खुद कर ली। एसएसपी विसर्जन सिंह यादव ने 18 दिन बाद रिपोर्ट दर्ज करने के पीछे एसएसपी को भेजी जांच रिपोर्ट में लिखा कि है सीओ और आयोग का आदेश पहुंचने के वक्त थाने का पूरा स्टाफ डेंगू, चिकुनगुनिया और बुखार की चपेट में था। 

अब एएसपी की जांच रिपोर्ट पर यकीन किया जाए तो साफ है कि पूरा थाना 18 दिन तक बिना स्टाफ के चलता रहा और 18 दिन थाने में रिपोर्ट और एनसीआर दर्ज नहीं हुई। ऐसे में तत्कालीन एएसपी बिसर्जन सिंह यादव की जांच रिपोर्ट सवालों के घेरे में है। 

यानी जैथरा थाने में तैनात पुलिस स्टाफ गंभीर बीमारियों से पीड़ित रहा और पुलिस अफसरों को भनक तक नहीं लगी। अब सवाल उठता है जब थाने का पूरा स्टाफ बीमार था और जनता से जुड़े कामकाज बंद थे तो मामले से शासन को अवगत क्यों नहीं कराया गया। 

खुद की जांच रिपोर्ट बदलते रहे एएसपी

police station in etah worked without staff eighteen days
दागी दरोगा के मामले में तत्कालीन एएसपी और एएसपी अपराध अपनी जांच बदलते रहे। पीड़ित की शिकायत पर दोनों अधिकारी पीड़ित द्वारा कोई पूर्व सूचना थाना पर न दिए जाने का कथन अंकित कर सीओ के आदेश के अनुपालन की आख्या देते रहे। जब पीड़ित ने थाने जाने सबूत सीएम ऑफिस भेजे, तो दोनों अधिकारी बैकफुट पर आ गए और रिपोर्ट बदल कर लिखा कि पीड़ित के परिजनों का मेडिकल पुलिस ने ही कराया था, जबकि पहले की रिपोर्ट मे दोनों अफसर मेडिकल कराने को नकारते रहे। 
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