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Agra: पुलिस की आख्या खारिज, किसान का शस्त्र लाइसेंस बहाल; जानें क्या है पूरा मामला
Sat, 04 Apr 2026 11:01 AM IST
Dhirendra Singh
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Sat, 04 Apr 2026 11:01 AM IST
सार
आगरा में पुलिस की रिपोर्ट को खारिज करते हुए प्रशासन ने किसान का शस्त्र लाइसेंस बहाल कर दिया। चार्जशीट में नाम न होने और पर्याप्त साक्ष्य के अभाव में लाइसेंस निरस्तीकरण की कार्रवाई रद्द की गई।
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शस्त्र लाइसेंस।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
आगरा जिला प्रशासन ने खेती करने वाले बसई जगनेर निवासी ग्रामीण के खिलाफ शुरू की गई शस्त्र लाइसेंस निरस्तीकरण की कार्रवाई को अनुचित मानते हुए समाप्त कर दिया है। अपर कलेक्टर प्रशासन एबी सिंह ने पुलिस की रिपोर्ट को दरकिनार करते हुए ग्रामीण के डीबीबीएल गन के लाइसेंस को बहाल रखने का आदेश जारी किया है।
थाना बसई जगनेर पुलिस और पुलिस उपायुक्त पश्चिमी जोन ने मूसलपुर निवासी होतम सिंह को आपराधिक प्रवृत्ति का बताते हुए लाइसेंस निरस्त करने की रिपोर्ट भेजी थी। पुलिस का तर्क था कि होतम सिंह के खिलाफ गंभीर धाराओं में प्राथमिकी दर्ज है। उनकी वजह से लोकशांति को खतरा हो सकता है। इसी आधार पर 25 नवंबर 2023 को लाइसेंस निलंबित कर कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। हालांकि जिस मुकदमे को आधार बनाया गया, उसकी कोर्ट में दाखिल चार्जशीट में पुलिस ने खुद ही विवेचना के बाद होतम सिंह का नाम हटा दिया था।
पीड़ित पक्ष ने दलील दी गई कि विपक्षी का 1987 से जमीन का विवाद चल रहा है और उसे साजिश के तहत फंसाया गया था। इलाहाबाद हाईकोर्ट और विभिन्न नजीरों का हवाला देते हुए कहा कि महज मुकदमों का लंबित होना या आशंका, लाइसेंस निरस्तीकरण का आधार नहीं हो सकता। सभी पहलुओं को सुनने और समझने के बाद अपर कलेक्टर प्रशासन ने पुलिस के आरोप पत्र में होतम सिंह की कोई भूमिका न होने को आधार मानते हुए कार्रवाई को निरस्त कर दिया। साथ ही कोर्ट में असलहा भी रिलीज करने के आदेश जारी कर दिए।
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थाना बसई जगनेर पुलिस और पुलिस उपायुक्त पश्चिमी जोन ने मूसलपुर निवासी होतम सिंह को आपराधिक प्रवृत्ति का बताते हुए लाइसेंस निरस्त करने की रिपोर्ट भेजी थी। पुलिस का तर्क था कि होतम सिंह के खिलाफ गंभीर धाराओं में प्राथमिकी दर्ज है। उनकी वजह से लोकशांति को खतरा हो सकता है। इसी आधार पर 25 नवंबर 2023 को लाइसेंस निलंबित कर कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। हालांकि जिस मुकदमे को आधार बनाया गया, उसकी कोर्ट में दाखिल चार्जशीट में पुलिस ने खुद ही विवेचना के बाद होतम सिंह का नाम हटा दिया था।
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पीड़ित पक्ष ने दलील दी गई कि विपक्षी का 1987 से जमीन का विवाद चल रहा है और उसे साजिश के तहत फंसाया गया था। इलाहाबाद हाईकोर्ट और विभिन्न नजीरों का हवाला देते हुए कहा कि महज मुकदमों का लंबित होना या आशंका, लाइसेंस निरस्तीकरण का आधार नहीं हो सकता। सभी पहलुओं को सुनने और समझने के बाद अपर कलेक्टर प्रशासन ने पुलिस के आरोप पत्र में होतम सिंह की कोई भूमिका न होने को आधार मानते हुए कार्रवाई को निरस्त कर दिया। साथ ही कोर्ट में असलहा भी रिलीज करने के आदेश जारी कर दिए।
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