चिकित्सक से 73 लाख की साइबर ठगी: लोकेशन मिली, फिर भी नहीं पकड़ सके साइबर अपराधी
आगरा के वरिष्ठ चिकित्सक को धोखाधड़ी का शिकार बनाया गया था। खाता बंद होने का मैसेज भेजकर उनके खाते से 73 लाख रुपये निकाल लिए गए थे। इस मामले में पुलिस आजतक खाली हाथ है। हालांकि आरोपियों की लोकेशन मिली, फिर भी पुलिस साइबर अपराधियों को नहीं पकड़ सकी।
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आगरा में दयालबाग के चिकित्सक अरुण कुमार के खाते से 73 लाख रुपये निकालने वाले साइबर अपराधी आठ महीने बाद भी पुलिस की पकड़ से दूर हैं। पुलिस की जांच में पता चला था कि आरोपियों ने रकम ट्रांसफर करने और कॉल पर बात करने के लिए जिन सिम का इस्तेमाल किया, वो झारखंड और पश्चिम बंगाल की थीं। आरोपियों की लोकेशन भी वहीं की आई थी। पुलिस टीम भी दोनों राज्यों में गई, लेकिन गिरफ्तारी नहीं कर सकी।
दयालबाग स्थित प्रेम नगर निवासी चिकित्सक अरुण कुमार गुप्ता का हीरा बाग स्थित भारतीय स्टेट बैंक की शाखा में खाता था। नवंबर 2021 में उनके मोबाइल पर एक मैसेज आया था। इसमें खाता बंद होने और पुन: चालू करने के बारे में जानकारी ली। एक नंबर पर कॉल करने के लिए कहा गया। कॉल करने पर एक व्यक्ति ने बात की। खुद को बैंक अधिकारी बताया। इसके बाद मोबाइल पर एक लिंक भेजा। लिंक पर क्लिक करते ही एक एप डाउनलोड हो गया। इसके बाद नेट बैकिंग से 73 लाख रुपये ट्रांसफर कर लिए गए। मामले में साइबर थाने में मुकदमा दर्ज किया गया।
पुलिस की जांच में सामने आया था कि 15 से अधिक खातों में रकम ट्रांसफर की गई है। जिन नंबर से कॉल किया गया और रकम जिन खातों से ट्रांसफर की गई? सबकी जानकारी जुटाई गई। पता चला कि कॉल करने वाले के सिम की आईडी झारखंड के जामताड़ा और देवघर की थी। वहीं पश्चिम बंगाल और बिहार के खातों में रकम ट्रांसफर की गई थी। इस पर पुलिस टीम जांच के लिए गई, लेकिन कोई पकड़ा नहीं जा सका।
रेंज साइबर थाना के प्रभारी निरीक्षक आकाश सिंह ने बताया कि साइबर अपराधियों ने खातों और सिम में फर्जी आईडी का प्रयोग किया था। टीम को लोकेशन मिली थी। आरोपियों के पते गलत होने की वजह से पकड़े नहीं जा सके। टीम लगी हुई हैं। अन्य माध्यम से गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं।
इन घटनाओं का भी खुलासा नहीं
- जुलाई 2021 को पुलिस विभाग से सेवानिवृत्त हुए फालोअर को ट्रेजरी अफसर बनकर कॉल किया गया था। फंड का भुगतान दिलाने के नाम पर खाते की जानकारी लेकर 15 लाख रुपये निकाल लिए थे।
- वर्ष 2021 में ही ट्रेजरी अफसर बनकर सेवानिवृत्त दरोगा को कॉल किया गया था। उनसे जानकारी ले ली गई थी। ओटीपी पूछकर नेट बैंकिंग चालू की गई। इसके बाद खाते से सात लाख रुपये से अधिक निकाले गए थे।
- वर्ष 2020 में फायर सर्विस कर्मी सेवानिवृत्त हुए थे। उन्हें भी कॉल किया गया था। इसके बाद खाते से 27 लाख रुपये निकाल लिए गए थे। उन्होंने मुकदमा भी दर्ज कराया। रकम वापस नहीं हुई।