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पुलिस की जांच में झूठी निकली भाजपा विधायक की कहानी, सीसीटीवी के फुटेज में दिखी सच्चाई

Sun, 04 Nov 2018 10:46 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला आगरा Updated Sun, 04 Nov 2018 10:46 PM IST
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Police investigation in false attempt to murder charges by BJP MLA vinod katiyar
विधायक विनोद कटियार की गाड़ी
कानपुर देहात के भोगनीपुर से भाजपा विधायक विनोद कटियार की जानलेवा हमले की कहानी पुलिस की जांच में झूठी निकली है। पुलिस को इसके साक्ष्य मिल गए हैं कि मामला दो गाड़ियों की टक्कर का है, जानलेवा हमले का नहीं। 
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इसी आधार पर मुकदमे से जानलेवा हमले की धारा 307 हटा दी गई है। जेल में बंद तीन युवकों को इससे बड़ी राहत मिलेगी। उनकी जमानत आसानी से हो जाएगी। विधायक के दबाव में ही इनकी गिरफ्तारी की गई थी।
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पुलिस ने सीसीटीवी के फुटेज देखे। इससे सच्चाई सामने आ गई। मौके पर मौजूद लोगों के बयान ने भी झूठी कहानी से पर्दा उठा दिया। हादसा 30 अक्तूबर को यमुना एक्सप्रेस वे पर खंदौली टोल प्लॉजा पर हुआ था। विनोद कटियार नोएडा से कानपुर जा रहे थे।
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यह है मामला

उनकी कार में एक अन्य कार टकरा गई थी। हादसे में विधायक समेत उनकी गाड़ी में मौजूद लोग सुरक्षित बच गए थे, जो कार विधायक की कार से टकराई थी, उसमें सवार नेहरू गार्डन गाजियाबाद निवासी आकाश दीक्षित, रोहित और राजू को हल्की चोटें आई थीं। उनका उपचार टोल प्लाजा स्थित हॉस्पिटल में किया गया था।

विधायक की तहरीर पर पुलिस ने आकाश दीक्षित, रोहित, राजू और गाड़ी मालिक  ललित को नामजद कर रिपोर्ट दर्ज कर ली। गाड़ी मालिक हाथ नहीं आया था। अन्य तीन को पुलिस ने तीन दिन थाने में रखा। इसके बाद कोर्ट में पेश किया। वहां से जेल भेज दिया गया था।

जेल गए युवकों केपरिजन आरोप लगा रहे थे कि विधायक ने गाड़ी में हुए नुकसान केबदले 1.5 लाख रुपये मांगे थे। धमकी दी थी कि अगर पैसा नहीं मिला तो युवकों को जेल भिजवा देगा। मीडिया में यह मामला उछला तो पुलिस के आला अफसर हरकत में आए। 

जानलेवा हमले की धारी हटाई

एसएसपी अमित पाठक ने खंदौली थाना पुलिस को निर्देश दिए कि विवेचना के आधार पर ही कार्रवाई हो। खंदौली पुलिस ने बताया कि धारा 307 हटा दी गई है। अब केस केवल दुर्घटना की धाराओं में है।

मेडिकल रिपोर्ट नहीं दी गई

पांच दिन बाद भी विधायक की ओर से पुलिस को कोई मेडिकल रिपोर्ट नहीं दी गई जिससे साबित होता कि मामला जानलेवा हमले का है। ऑडियो टेप से भी पुलिस की जांच को दिशा मिली। हालांकि पुलिस ने इसे जांच में शामिल नहीं किया है। अगर इसे शामिल किया तो विधायक के लिए परेशानी खड़ी हो जाएगी।
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