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धर्मांतरण गैंग: धर्म परिवर्तन कराने का हाईटेक तरीका, इस तरह फंस रहे थे लोग; रजिस्टर और लैपटाॅप में है पूरा सच

Thu, 07 May 2026 08:16 AM IST
Dhirendra Singh अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा Published by: Dhirendra Singh Updated Thu, 07 May 2026 08:16 AM IST
सार

धर्मांतरण गिरोह मामले में पुलिस आज आरोपियों की कस्टडी रिमांड पर सुनवाई कराएगी। जांच एजेंसियों को शक है कि गिरोह का पूरा नेटवर्क, फंडिंग और धर्मांतरण का रिकॉर्ड मोबाइल, लैपटॉप और रजिस्टर में छिपा है।

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Police Hunt for Secret Conversion Network Data Accused to Be Taken to Delhi and Deeg
आगरा धर्मांतरण केस। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

देशभर में सक्रिय धर्मांतरण गिरोह हाईटेक तरीके से लोगों को अपने जाल में फंसाने के बाद पूरा रिकार्ड भी अपने पास रखता था। कहां से फंडिंग मिल रही है? कितने लोगों को जोड़ा गया है? किन लोगों को पैसा दिया गया? जिन लोगों का धर्मांतरण कराया गया, उन्हें कहां पर रखा गया है? इस सबकी जानकारी रजिस्टर से लेकर मोबाइल और लैपटाॅप में रखी जाती थी। चार और आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद यह जानकारी सामने आई है। अब पुलिस रजिस्टर, मोबाइल और लैपटाॅप की बरामदगी के लिए आरोपियों को एक बार फिर रिमांड पर लेने की तैयारी कर रही है। रिमांड मिलने पर आरोपियों को दिल्ली और भरतपुर जाएगी।
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सदर की सगी बहनों के धर्मांतरण के मामले में पुलिस ने एक मई को दिल्ली निवासी परवेज अख्तर, जाशिम उर्फ जतिन कपूर, तलमीज उर रहमान और राजस्थान के डीग निवासी हसन मोहम्मद को पकड़ा था। उन्हें कोर्ट में पेश करने के बाद जेल भेजा गया था। चारों को केस के संबंध में पूछताछ के लिए तीन दिन की रिमांड पर लिया था।
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रिमांड के दाैरान पुलिस के साथ ही आईबी और एटीएस ने पूछताछ की थी। आरोपियों ने कई जानकारी दी हैं। बताया कि उनके पास धर्मांतरण से जुड़ा पूरा डाटा है। इसे रजिस्टर, मोबाइल और लैपटाॅप तक में सुरक्षित रखा हुआ है। इस पर पुलिस आरोपियों को दिल्ली और राजस्थान लेकर गई थी, लेकिन बरामदगी नहीं हो सकी। आरोपियों को मंगलवार जेल में दाखिल कर दिया गया था। बुधवार को उन्हें दोबारा रिमांड पर लेने के लिए न्यायालय में प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया था, जिस पर बृहस्पतिवार को सुनवाई के बाद न्यायालय निर्णय लेगा।
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टास्क पूरा करने पर साहित्य में छपता था नाम
मौलाना कलीम सिद्दीकी का सहयोगी रह चुका तलमीज उर रहमान मूल रूप से मुरादाबाद का रहने वाला है। परवेज अख्तर बिजनौर का मूल निवासी है। हसन मोहम्मद राजस्थान के डीग का रहने वाला है। सूत्रों के मुताबिक, उन्होंने पुलिस को बताया था कि धर्मांतरण कराने वालों को टास्क दिया जाता था। टास्क पूरा होने पर इस्लामिक साहित्य में नाम छापा जाता था। इसके अलावा सुविधाएं भी दी जाती थीं।
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