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कवि गोपालदास नीरज ने अमर उजाला के मंच पर किया था अंतिम बार काव्य पाठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला आगरा
Updated Fri, 20 Jul 2018 11:37 AM IST
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अमर उजाला के मंच पर कवि गोपाल दास नीरज (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
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गीतों के राजकुमार गोपालदास 'नीरज' ने अपनी लंबी काव्य यात्रा में अंतिम बार काव्य पाठ आगरा में अमर उजाला के मंच पर किया था। तारीख थी दो जुलाई 2017, स्थान सूर सदन प्रेक्षागृह आगरा, मौका था अमर उजाला काव्य महाकुंभ का।
इसमें उन्हें काव्य रत्न सम्मान से नवाजा गया था। इस मौके पर छह कवियों को काव्य भूषण और 26 को काव्य श्री सम्मान दिया गया था। गोपालदास 'नीरज' ने मंच से काव्य पाठ किया तो पूरा हॉल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा था।
इस काव्य महाकुंभ में गीतकार संतोष आनंद, शायर राहत इंदौरी, कवि हरिओम पंवार, सोम ठाकुर, प्रदीप चौबे, रमेश मुस्कान, पवन आगरी मौजूद रहे। इस मंच से महाकवि युवाओं को अहम संदेश देकर गए थे।
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इसमें उन्हें काव्य रत्न सम्मान से नवाजा गया था। इस मौके पर छह कवियों को काव्य भूषण और 26 को काव्य श्री सम्मान दिया गया था। गोपालदास 'नीरज' ने मंच से काव्य पाठ किया तो पूरा हॉल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा था।
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इस काव्य महाकुंभ में गीतकार संतोष आनंद, शायर राहत इंदौरी, कवि हरिओम पंवार, सोम ठाकुर, प्रदीप चौबे, रमेश मुस्कान, पवन आगरी मौजूद रहे। इस मंच से महाकवि युवाओं को अहम संदेश देकर गए थे।
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'शब्द के क्षरण का दौर चल रहा है'
काव्य महाकुंभ में गोपाल दास 'नीरज' ने अमर उजाला से बातचीत में कहा था कि यह दौर भ्रम का है, युवा भटक रहा है, साहित्य की ओर रुझान कम हो रहा है, शब्द के क्षरण का दौर चल रहा है।
उन्होंने कहा था कि एक दौर था, जब फिल्मी गीतों में संदेश छिपा होता था। इस दौर के गीतों की जीवन यात्रा बहुत कम होती है, कुछ दिन बात वो भुला दिए जाते हैं। इतिहास खुद को दोहराता है, गीत, गजल और साहित्य के उपासकों को फिर वो दौर हासिल होगा।
उन्होंने कहा था कि एक दौर था, जब फिल्मी गीतों में संदेश छिपा होता था। इस दौर के गीतों की जीवन यात्रा बहुत कम होती है, कुछ दिन बात वो भुला दिए जाते हैं। इतिहास खुद को दोहराता है, गीत, गजल और साहित्य के उपासकों को फिर वो दौर हासिल होगा।