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कोरोना संक्रमित मरीजों के इलाज को प्लाज्मा की किल्लत, डोनर न मिलने से परेशानी
Mon, 12 Oct 2020 10:00 AM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Mon, 12 Oct 2020 10:00 AM IST
सार
एसएन मेडिकल कॉलेज के ब्लड बैंक में रोजाना पांच से आठ मरीजों के लिए आ रही है मांग, एबी-पॉजिटिव ब्लड ग्रुप वाले मरीजों के लिए हो रही है सबसे ज्यादा परेशानी
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प्लाज्मा थेरेपी
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
केस एक:
कमला नगर के कपड़ा व्यवसायी के 65 साल के पिता को दो यूनिट प्लाज्मा की जरूरत पड़ी। निजी अस्पताल में इनका इलाज चल रहा था। एसएन ब्लड बैंक में प्लाज्मा स्टॉक में नहीं था, काफी प्रयास के बाद भी डोनर नहीं मिला, मैनपुरी से किसी परिचित को प्लाज्मा दान कराने के लिए लाए, इसमें दो दिन लग गए। तब मरीज को प्लाज्मा चढ़ाया गया।
केस दो:
राजामंडी निवासी 45 साल के मरीज को प्लाज्मा की जरूरत पड़ने पर एसएन ब्लड बैंक से पता किया। उनसे डोनर की व्यवस्था करने को कहा, लेकिन काफी प्रयास के बाद कोई डोनेट करने वाला नहीं मिला। ब्लड बैंक ने एनजीओ की मदद से डोनर की काउंसिलिंग की तब उसने प्लाज्मा दान किया। दो दिन बाद मरीज को प्लाज्मा लग पाया।
कोरोना के मरीजों के इलाज को प्लाज्मा की किल्लत हो रही है। डोनरों की कमी के कारण मरीजों को प्लाज्मा नहीं मिल पा रहा है। सबसे ज्यादा दिक्कत एबी-पॉजिटिव मरीजों के लिए हो रही है। पंजीकरण कराने पर दो से तीन दिन डोनर की व्यवस्था में लग रहे हैं।
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कमला नगर के कपड़ा व्यवसायी के 65 साल के पिता को दो यूनिट प्लाज्मा की जरूरत पड़ी। निजी अस्पताल में इनका इलाज चल रहा था। एसएन ब्लड बैंक में प्लाज्मा स्टॉक में नहीं था, काफी प्रयास के बाद भी डोनर नहीं मिला, मैनपुरी से किसी परिचित को प्लाज्मा दान कराने के लिए लाए, इसमें दो दिन लग गए। तब मरीज को प्लाज्मा चढ़ाया गया।
केस दो:
राजामंडी निवासी 45 साल के मरीज को प्लाज्मा की जरूरत पड़ने पर एसएन ब्लड बैंक से पता किया। उनसे डोनर की व्यवस्था करने को कहा, लेकिन काफी प्रयास के बाद कोई डोनेट करने वाला नहीं मिला। ब्लड बैंक ने एनजीओ की मदद से डोनर की काउंसिलिंग की तब उसने प्लाज्मा दान किया। दो दिन बाद मरीज को प्लाज्मा लग पाया।
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कोरोना के मरीजों के इलाज को प्लाज्मा की किल्लत हो रही है। डोनरों की कमी के कारण मरीजों को प्लाज्मा नहीं मिल पा रहा है। सबसे ज्यादा दिक्कत एबी-पॉजिटिव मरीजों के लिए हो रही है। पंजीकरण कराने पर दो से तीन दिन डोनर की व्यवस्था में लग रहे हैं।
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एसएन मेडिकल कॉलेज के ब्लड बैंक में रोजाना पांच से आठ मरीजों के लिए प्लाज्मा की मांग आ रही है। प्लाज्मा की मांग करने वालों में आगरा के अलावा मथुरा, फिरोजाबाद, दिल्ली, नोएडा के भी मरीज हैं। मांग लगातार बढ़ने और डोनर की कमी के कारण मरीजों को प्लाज्मा समय पर नहीं मिल पा रहा है। संक्रमण से ठीक होने वाले लोगों की काउंसिलिंग करने के बाद बमुश्किल वह प्लाज्मा दान करने के लिए तैयार होते हैं।
ऐसे में मरीजों को प्लाज्मा के लिए दो-तीन दिन लग रहे हैं। ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. नीतू चौहान ने बताया कि एसएन में भर्ती मरीजों के लिए प्लाज्मा देने की प्राथमिकता रहती है, निजी अस्पतालों के मरीजों को डोनर की व्यवस्था करने को कहते हैं।
ये भी पढ़ें- मानवता के लिए 'खाकी' की पहल, कोरोना मरीजों के लिए प्लाज्मा दान करेंगे 130 पुलिसकर्मी
छह शहरों में ही है प्लाज्मा दान करने की सुविधा
प्रदेश में आगरा समेत छह मेडिकल कॉलेज में ही संक्रमित मरीजों के लिए प्लाज्मा दान करने की व्यवस्था है। इस कारण एसएन में अन्य शहरों के मरीज भी संपर्क करते हैं। संक्रमण से ठीक होने वाले मरीजों की सूची बनाकर उन्हें प्लाज्मा दान करने के लिए काउंसिलिंग भी करते हैं। एबी-पॉजटिव ग्रुप के मरीज को इसी ग्रुप का प्लाज्मा दिया जा सकता है, ऐसे में इनकी अलग से सूची बनाई गई है।
ऐसे में मरीजों को प्लाज्मा के लिए दो-तीन दिन लग रहे हैं। ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. नीतू चौहान ने बताया कि एसएन में भर्ती मरीजों के लिए प्लाज्मा देने की प्राथमिकता रहती है, निजी अस्पतालों के मरीजों को डोनर की व्यवस्था करने को कहते हैं।
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छह शहरों में ही है प्लाज्मा दान करने की सुविधा
प्रदेश में आगरा समेत छह मेडिकल कॉलेज में ही संक्रमित मरीजों के लिए प्लाज्मा दान करने की व्यवस्था है। इस कारण एसएन में अन्य शहरों के मरीज भी संपर्क करते हैं। संक्रमण से ठीक होने वाले मरीजों की सूची बनाकर उन्हें प्लाज्मा दान करने के लिए काउंसिलिंग भी करते हैं। एबी-पॉजटिव ग्रुप के मरीज को इसी ग्रुप का प्लाज्मा दिया जा सकता है, ऐसे में इनकी अलग से सूची बनाई गई है।